‘इंडिया बिजनेस लिटरेचर फेस्टिवल’ (IBLF) के दूसरे एडिशन का आयोजन गुरुग्राम में किया जा रहा है. इस दौरान विख्यात लेखक अपने विचार रख रहे हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
#IBLF: देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ‘BW Business World’ द्वारा ‘इंडिया बिजनेस लिटरेचर फेस्टिवल’ (IBLF) के दूसरे एडिशन का आयोजन गुरुग्राम स्थित The Leela होटल में किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में देश-विदेश के शीर्ष लेखक, शिक्षाविद, विद्वान और प्रकाशक शामिल हो रहे हैं. फेस्टिवल की शुरुआत BW Business World के चेयरमैन एवं एडिटर इन चीफ डॉक्टर अनुराग बत्रा के ओपनिंग एड्रेस के साथ हुई. इसके बाद लेखकों ने अपने विचार रखे और अपनी किताबों के बारे में बताया.
पैशन फॉलो करना आसान
कार्यक्रम में Passion Economy & Side Hustle Revolution किताब के लेखक उत्कर्ष अमिताभ ने बदलते जॉब कल्चर और वाइड रेंज प्रोफेशन के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि किस तरह आज लोगों के लिए अपने पैशन को फॉलो करना आसान हो गया है. उत्कर्ष अमिताभ 5ire के Chief Marketing Officer (CMO) हैं और उनकी दो किताबें कोरोना महामारी के दौरान प्रकाशित हुई थीं. उत्कर्ष से उनकी किताब के बारे में IMT Ghazibad में फाइनेंस मैनेजमेंट के प्रोफेसर और PGDM BFS Program के हेड डॉक्टर आनंद कृष्णमूर्ति ने बात की.
सबसे पहले इंजीनियरिंग
सबसे पहले, उत्कर्ष अमिताभ ने बताया कि उन्हें लेखन की प्रेरणा कहां से मिली. उन्होंने कहा, 'हर किसी को कहीं न कहीं से प्रेरणा मिलती है और मुझे राइटिंग की प्रेरणा मेरी मां से मिली. कोरोना के दौरान उन्होंने मुझे केवल ऑनलाइन प्रोग्राम अटेंड करते देखा है, लेकिन आज वो मुझे यहां लाइव देख रही हैं'. उन्होंने आगे कहा - अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि क्या लेखन में करियर बनाया जा सकता है? मुझे लगता है कि जब बात करियर की आती है, तो भारत में ज़्यादातर लोग पहले इंजीनियरिंग करते हैं फिर सोचते हैं कि क्या करना है. मैंने भी ऐसा ही किया. मैंने पहले इंजीनियरिंग की, लिबरल आर्ट की पढ़ाई की, फिर MBA किया और उसके बाद फिलॉसफी में PHD.
युवाओं पर रहता है दबाव
मैंने टीच फॉर इंडिया के साथ शुरुआत की, फिर माइक्रोसॉफ्ट में 7 साल काम किया. लेकिन मैं यह भी जानता था कि मुझे कुछ लिखना है. माइक्रोसॉफ्ट में मुझे एक ऐसा प्रोजेक्ट मिला जहां काफी कुछ जानने-समझने का मौका मिला. हमारे देश में युवाओं पर सूटेबल बॉय या गर्ल बनने का दबाव रहता है. लेकिन मुझे लगता है कि अपने पैशन को डिस्कवर करना एक यात्रा है और हमें इस यात्रा पर निकलना चाहिए. पैशन अपने आप नहीं आता, यह प्रयोगों से आता है. इसलिए प्रयोग करते रहने चाहिए. मुझे क्या पसंद है और मेरा पैशन क्या है, ये दो अलग बात हैं.
ग्रेट रेजिग्नेशन न्यू नॉर्मल
उत्कर्ष अमिताभ ने आगे कहा - मुझे क्रिकेट पसंद है. मुझे एक्टिंग से भी प्यार है, मैंने कुछ प्ले भी किए हैं. इसके बावजूद न मैं क्रिकेटर बना, न एक्टर. मैं खुद में बार-बार इन्वेस्ट करता रहा. मैंने वाइड रेंज प्रोफेशन चुना, मैं एक कंपनी में बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहा हूं और लेखक भी हूं. डॉक्टर आनंद कृष्णमूर्ति के सवाल पर उत्कर्ष ने कहा कि वर्क आज एम्प्लॉयमेंट से अलग हो रहा है और ग्रेट रेजिग्नेशन न्यू नॉर्मल बन गया है. जैसे-जैसे पैशन इकोनॉमी मुख्यधारा में आती है, लोग ऐसे प्रोफेशन का पोर्टफोलियो तैयार करेंगे, जो एक से ज्यादा इनकम स्ट्रीम्स बनाते हैं. वे अपने पैशन को monetize करेंगे और अपनी शर्तों पर करियर बनाएंगे. आज यह संभव है कि आप दिल से जो करना चाहते हैं, उसमें भविष्य बना सकें.
लोगों से जुड़ाव जरूरी
उत्कर्ष अमिताभ ने कहा कि लोगों से जुड़ाव बहुत मायने रखता है और यह हर व्यक्ति के लिए जरूरी है. सच्चे फॉलोअर्स की जरूरत हर किसी को होती है. उन्होंने आगे कहा कि आज इंटरनेट ने समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र को बदल दिया है. आने वाला समय और ज्यादा टेक्नोलॉजी केंद्रित होगा. इस सवाल के जवाब में कि कोरोना के बाद इंगेजमेंट लेवल कैसा रहेगा? उत्कर्ष ने कहा, 'इंगेजमेंट लेवल में तो कमी आई है. खासकर टेक इंडस्ट्री इस कमी को अच्छे से महसूस कर रही है. एडटेक कंपनियों ने लिए कोरोना के दौरान और बाद की स्थिति में काफी बदलाव आया है. मुझे लगता है कि यहां से ऑनलाइन और ऑफलाइन का कॉम्बिनेशन काम करेगा. आने वाले समय में हाइब्रिड एनवायरनमेंट पर ज्यादा जोर रहेगा.
अदालत ने नीरव मोदी को लगभग 10.7 मिलियन डॉलर यानी करीब 100 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है. यह रकम उन कर्जों से जुड़ी है, जिनकी व्यक्तिगत गारंटी नीरव मोदी ने दी थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
लंदन (UK) की एक अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बड़ा झटका देते हुए बैंक ऑफ इंडिया (BOI) के पक्ष में फैसला सुनाया है. अदालत ने उन्हें बैंक ऑफ इंडिया को करीब 10.7 मिलियन डॉलर (लगभग 100 करोड़ रुपये) चुकाने का आदेश दिया है. यह मामला उन कर्जों से जुड़ा है, जिनकी व्यक्तिगत गारंटी नीरव मोदी ने दी थी. इस फैसले के बीच भारत प्रत्यर्पण को लेकर उनकी कानूनी लड़ाई भी जारी है.
डायमंड FZE को दिए गए कर्ज से जुड़ा मामला
यह मामला जुलाई 2012 में बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दुबई स्थित कंपनी डायमंड FZE को दिए गए कर्ज से जुड़ा है. यह कंपनी नीरव मोदी के नियंत्रण में थी. अगस्त 2013 में नीरव मोदी ने इन कर्जों के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी. हालांकि, लंदन सर्किट कमर्शियल कोर्ट में नीरव मोदी ने दलील दी कि यह गारंटी लागू नहीं की जा सकती और उन्हें बैंक की ओर से कोई वैध मांग नोटिस नहीं मिला था.
कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के दावे को माना वैध
मामले की सुनवाई करते हुए जज साइमन टिंकलर ने बैंक ऑफ इंडिया के दावे को वैध और लागू करने योग्य माना. अदालत ने कहा कि नीरव मोदी व्यक्तिगत गारंटी के तहत 4.1 मिलियन डॉलर की मूल बकाया राशि के लिए जिम्मेदार हैं.
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस राशि पर ब्याज भी जोड़ा जाएगा. जज ने अपने आदेश में कहा कि नीरव मोदी ऐसा कोई ठोस बचाव पेश नहीं कर सके, जिससे यह साबित हो सके कि बैंक इस रकम का हकदार नहीं है.
भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ जारी है कानूनी लड़ाई
नीरव मोदी को मार्च 2019 में ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया था. वह फिलहाल लंदन की जेल में बंद हैं और भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. भारत सरकार लगातार उनके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है. विदेश मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि भारत सरकार भगोड़े आर्थिक अपराधियों को वापस लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस मामले में ब्रिटिश अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है.
हाई कोर्ट भी खारिज कर चुका है अपील
मार्च 2026 में यूके हाई कोर्ट ने नीरव मोदी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अपने प्रत्यर्पण मामले को दोबारा खोलने की मांग की थी. अदालत ने भारतीय सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों को पर्याप्त माना था. इसके बाद अप्रैल में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने भी उनके मामले को सार्वजनिक सुनवाई से हटाकर उन्हें गुमनामी की सुविधा प्रदान की थी.
13,000 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले का आरोपी
55 वर्षीय नीरव मोदी पर अपने मामा मेहुल चोकसी के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक में लगभग 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है. सीबीआई के अनुसार, इस घोटाले में अकेले नीरव मोदी पर करीब 6,498 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है. वर्ष 2021 में उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन इसके बाद से वह विभिन्न कानूनी विकल्पों के जरिए भारत भेजे जाने की प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं.
व्हाट्सऐप, क्रेड और भारतीय उपभोक्ताओं के डेटा को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुई चर्चा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मेटा द्वारा कथित तौर पर 4.5 अरब डॉलर में क्रेड के अधिग्रहण और कुणाल शाह को व्हाट्सऐप का ग्लोबल सीईओ बनाए जाने की खबरों के बाद भारत में डेटा स्वामित्व, गोपनीयता और नियामकीय निगरानी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. मुंबई के उद्यमी अर्नब मित्रा की एक लिंक्डइन पोस्ट ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया और स्टार्टअप जगत में चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
अर्नब मित्रा ने उठाए डेटा स्वामित्व से जुड़े सवाल
LIQVD ASIA के प्रबंध निदेशक और DigiBoxx के निदेशक अर्नब मित्रा ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि इस सौदे के जश्न के बीच सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे को नजरअंदाज किया जा रहा है. उनके अनुसार असली सवाल यह है कि मेटा ने आखिर खरीदा क्या है. मित्रा ने कहा कि यह केवल एक कारोबारी अधिग्रहण नहीं हो सकता, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं के बड़े डेटा बेस तक पहुंच का मामला भी हो सकता है. उनका मानना है कि इस सौदे के पीछे डेटा की अहम भूमिका हो सकती है.
फ्रीचार्ज का उदाहरण देकर समझाया अपना पक्ष
अपने तर्क को मजबूत करने के लिए अर्नब मित्रा ने फ्रीचार्ज का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि कंपनी ने 269 करोड़ रुपये खर्च कर केवल 35 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था, लेकिन इसके बावजूद वर्ष 2015 में इसे 2,800 करोड़ रुपये में बेच दिया गया. बाद में यह कंपनी मात्र 370 करोड़ रुपये में एक्सिस बैंक को हस्तांतरित कर दी गई. उनके अनुसार यह दर्शाता है कि कई बार कंपनियों का मूल्यांकन केवल राजस्व के आधार पर नहीं, बल्कि उनके डेटा और उपभोक्ता आधार के आधार पर भी किया जाता है.
क्रेड के 2.5 करोड़ यूजर्स बने चर्चा का केंद्र
मित्रा ने कहा कि क्रेड ने एक अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटाई है और कंपनी ने 1,457 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया है. उनके मुताबिक, क्रेड भले ही क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं के लिए एक लॉयल्टी प्लेटफॉर्म हो, लेकिन इसकी सबसे बड़ी संपत्ति इसके करोड़ों सत्यापित और उच्च आय वर्ग के उपभोक्ताओं का डेटा हो सकता है. उन्होंने दावा किया कि मेटा के लिए क्रेड के 2.5 करोड़ सत्यापित उपभोक्ताओं की क्रेडिट प्रोफाइल सबसे बड़ा आकर्षण हो सकती हैं.
'राष्ट्रीय स्तर पर डेटा आर्बिट्रेज' का लगाया आरोप
अर्नब मित्रा ने इस संभावित अधिग्रहण को "राष्ट्रीय स्तर पर डेटा आर्बिट्रेज" करार दिया. उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में विदेशी कंपनियों द्वारा संवेदनशील तकनीकी कंपनियों के अधिग्रहण पर कड़ी निगरानी रखी जाती है.
उनका मानना है कि भारत में भी इस तरह के सौदों को केवल कारोबारी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.
डेटा प्रोटेक्शन कानून के पालन पर भी उठे सवाल
मित्रा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस सौदे में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के प्रावधानों का पालन किया गया है. उनके अनुसार यदि किसी विदेशी कंपनी को उपभोक्ताओं का वित्तीय डेटा हस्तांतरित किया जाता है तो इसके लिए स्पष्ट सहमति आवश्यक हो सकती है. उन्होंने कहा कि या तो क्रेड ने अपने उपयोगकर्ताओं से ऐसी अनुमति प्राप्त की होगी या फिर इस पहलू की पर्याप्त जांच नहीं हुई होगी.
कुणाल शाह की सराहना, लेकिन व्यवस्था पर सवाल
हालांकि अर्नब मित्रा ने कुणाल शाह की कारोबारी क्षमता की सराहना भी की. उन्होंने कहा कि कुणाल शाह ने अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है और उन्होंने खेल को बेहतरीन तरीके से खेला है. मित्रा ने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से है जिसमें ऐसे महत्वपूर्ण सवालों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होती.
डेटा स्वामित्व पर बहस हुई तेज
सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है. अब चर्चा केवल स्टार्टअप वैल्यूएशन, फंडिंग और संस्थापकों की सफलता तक सीमित नहीं रही है. डेटा स्वामित्व, सीमा पार डेटा हस्तांतरण, उपभोक्ता की सहमति और नागरिकों के डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में देखने जैसे मुद्दे अब इस बहस के केंद्र में आ गए हैं. आने वाले समय में यह मुद्दा भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और डेटा नियमन से जुड़ी नीतियों पर भी असर डाल सकता है.
मंगलवार को BSE सेंसेक्स 893.39 अंक गिरकर 76,200.68 पर बंद हुआ था. वहीं NSE एनएसई निफ्टी 278.80 अंक टूटकर 23,824.10 के स्तर पर पहुंच गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को आई भारी गिरावट के बाद बुधवार को बाजार खुलने से पहले निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आईटी शेयरों पर बनी हुई है. पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स करीब 900 अंक टूटा था, जबकि निफ्टी भी 23,850 के नीचे फिसल गया था. विशेषज्ञों का मानना है कि आज के कारोबार में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति और आईटी सेक्टर की चाल पर निर्भर करेगी.
मंगलवार को आई थी बड़ी गिरावट
मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 893.39 अंक गिरकर 76,200.68 पर बंद हुआ था. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) एनएसई निफ्टी 278.80 अंक टूटकर 23,824.10 के स्तर पर पहुंच गया था. इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई थी.
ग्लोबल संकेतों पर रहेगी नजर
एशियाई बाजारों में कमजोरी और दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स में आई तेज गिरावट ने वैश्विक बाजारों की धारणा को प्रभावित किया था. ऐसे में आज भी निवेशक एशियाई बाजारों की चाल पर नजर रखेंगे. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो घरेलू बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है.
अमेरिकी फेड और कच्चे तेल की कीमतें अहम
मध्य पूर्व में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं. साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि वैश्विक महंगाई का दबाव बना रहता है तो विदेशी निवेशकों की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है.
आईटी शेयरों पर रहेगी नजर
पिछले कारोबारी सत्र में टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक जैसे आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली थी. वैश्विक आईटी खर्च को लेकर चिंताओं के कारण इस सेक्टर पर दबाव बना हुआ है. आज के कारोबार में भी आईटी शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
रुपये और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां महत्वपूर्ण
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. निवेशकों की नजर आज एफआईआई और डीआईआई के आंकड़ों पर भी रहेगी. विश्लेषकों का मानना है कि मंगलवार की बड़ी गिरावट के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. यदि वैश्विक संकेतों में सुधार आता है तो निचले स्तरों से खरीदारी देखने को मिल सकती है. हालांकि निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और चुनिंदा शेयरों में ही निवेश करने की सलाह दी जा रही है.
इन शेयरों पर रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजार में आज कई बड़ी कंपनियों से जुड़ी अहम कारोबारी घोषणाओं के चलते निवेशकों की नजर चुनिंदा शेयरों पर रहेगी. आईटी कंपनी इंफोसिस ने ग्लोबलफाउंड्रीज के साथ अपनी एआई आधारित साझेदारी को मजबूत किया है, जबकि मामाअर्थ की पैरेंट कंपनी होनासा कंज्यूमर ने फ्लुएंस फार्मा में 58 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदकर न्यूट्रास्यूटिकल्स क्षेत्र में प्रवेश किया है. वहीं सरकार 24 और 25 जून को ऑफर फॉर सेल के जरिए आईआरएफसी में 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने जा रही है. सिटी यूनियन बैंक ने 500 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी दी है. दूसरी ओर वेदांता की प्रमोटर कंपनी ट्विन स्टार होल्डिंग्स ने 6.5 करोड़ शेयर बेचे हैं, जबकि डेल्हीवरी में नेक्सस वेंचर्स ने भी अपनी हिस्सेदारी घटाई है. इसके अलावा स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स के प्रमोटरों ने भी हिस्सेदारी बिक्री की है. इन सभी घटनाक्रमों के कारण आज इंफोसिस, होनासा कंज्यूमर, आईआरएफसी, सिटी यूनियन बैंक, वेदांता, डेल्हीवरी और स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स के शेयर निवेशकों के फोकस में रह सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उपभोक्ता खर्च में सतर्कता बढ़ी है, जिससे रिटेल सेक्टर की रफ्तार धीमी हुई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बढ़ती महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश में रिटेल बिक्री की रफ्तार मई 2026 में धीमी पड़ गई. रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मई में रिटेल बिक्री वृद्धि दर घटकर 5 प्रतिशत रह गई, जो अप्रैल 2026 में 7 प्रतिशत थी. हालांकि, आवश्यक वस्तुओं से जुड़ी श्रेणियां अब भी उपभोक्ता मांग को सहारा दे रही हैं.
पश्चिम भारत सबसे आगे, पूर्वी भारत की रफ्तार धीमी
RAI के मासिक बिजनेस सर्वे के 71वें दौर के अनुसार, पश्चिम भारत में रिटेल बिक्री में सबसे अधिक 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. उत्तर और दक्षिण भारत में 5-5 प्रतिशत की वृद्धि रही, जबकि पूर्वी भारत में वृद्धि दर 4 प्रतिशत रही, जो उपभोक्ता मांग में अपेक्षाकृत धीमी गति को दर्शाती है.
महंगाई और वैश्विक तनाव का असर
RAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कुमार राजगोपालन ने कहा, “मई में वृद्धि दर घटकर 5 प्रतिशत रह गई, जबकि अप्रैल में यह 7 प्रतिशत थी. वैश्विक संघर्षों के कारण बढ़े महंगाई के दबाव ने उपभोक्ता भावना को प्रभावित किया है. खुदरा कारोबारी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि उपभोक्ता खर्च अधिक सतर्क हो गया है.”
QSR और किराना श्रेणी में सबसे अधिक बढ़ोतरी
विभिन्न श्रेणियों में क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और इसमें 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इसके बाद खाद्य एवं किराना श्रेणी में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही. फुटवियर श्रेणी में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि परिधान एवं कपड़े, आभूषण और खेल सामग्री की बिक्री में 5-5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.
मूल्य आधारित खरीदारी की ओर बढ़ रहे उपभोक्ता
रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता अब अधिक सतर्कता के साथ खर्च कर रहे हैं और मूल्य आधारित खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं. इसका असर लगभग सभी श्रेणियों की मांग पर दिखाई दे रहा है. RAI ने कहा कि खुदरा कारोबारियों का फोकस इन्वेंट्री ऑप्टिमाइजेशन, ग्राहक जुड़ाव और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर बना हुआ है.
AI और डिजिटल तकनीक का बढ़ रहा इस्तेमाल
रिटेल कंपनियां अब निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने, ग्राहकों के अनुभव को मजबूत करने और लाभप्रदता बनाए रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीकों का तेजी से इस्तेमाल कर रही हैं.उद्योग जगत का मानना है कि डिजिटल टूल्स और डेटा आधारित रणनीतियां आने वाले समय में रिटेल कारोबार की वृद्धि और प्रतिस्पर्धा को नई दिशा दे सकती हैं.
इस फंडिंग राउंड में CRED के संस्थापक कुणाल शाह और Shadowfax के सीईओ अभिषेक बंसल समेत कई एंजेल निवेशकों ने भी निवेश किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अर्ली लर्निंग स्टार्टअप LiLLBUD ने ₹6 करोड़ की सीड फंडिंग जुटाई है. यह निवेश Zeropearl VC की अगुवाई में हुआ है. कंपनी 0-3 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए सुरक्षित और BIS-प्रमाणित शैक्षणिक उत्पाद विकसित कर रही है. इस फंडिंग राउंड में CRED के संस्थापक कुणाल शाह और Shadowfax के सीईओ अभिषेक बंसल समेत कई एंजेल निवेशकों ने भी निवेश किया है.
0-3 वर्ष के बच्चों के लिए अर्ली लर्निंग प्रोडक्ट्स बनाने वाले स्टार्टअप LiLLBUD ने ₹6 करोड़ की सीड फंडिंग जुटाई है. इस निवेश दौर का नेतृत्व Zeropearl VC ने किया. व्यक्तिगत क्षमता में निवेश करने वालों में CRED के संस्थापक कुणाल शाह, Shadowfax के सीईओ अभिषेक बंसल और उपभोक्ता एवं सप्लाई चेन क्षेत्र के कई निवेशक शामिल रहे.
100 नए उत्पाद लॉन्च करने की तैयारी
कंपनी ने बताया कि जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही तक 18-36 महीने की आयु के बच्चों के लिए 100 नए उत्पाद लॉन्च करने, क्विक कॉमर्स वितरण नेटवर्क को मजबूत करने, सप्लाई चेन विस्तार और ब्रांड निर्माण पर किया जाएगा.
भारत में तेजी से बढ़ रहा है अर्ली लर्निंग बाजार
भारत में हर साल लगभग 2.3 करोड़ बच्चों का जन्म होता है, जो दुनिया में सबसे बड़ा जन्म समूह है. इसके बावजूद छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रमाणित शैक्षणिक उत्पादों के विकल्प सीमित हैं. देश का खिलौना बाजार वर्ष 2025 में करीब 2.1 अरब डॉलर का था, जो 2034 तक बढ़कर लगभग 4.7 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. शिक्षा और विकास आधारित खिलौने इस बाजार के सबसे तेजी से बढ़ने वाले वर्गों में शामिल हैं.
सुरक्षा को लेकर बड़ी चुनौती
कंपनी का कहना है कि भारत में खिलौनों के लिए BIS प्रमाणन अनिवार्य होने के बावजूद बाजार में बड़ी संख्या में ऐसे उत्पाद मौजूद हैं, जिनके पास सुरक्षा प्रमाणन नहीं है. ऐसे खिलौनों में भारी धातुएं जैसे सीसा (Lead) पाए जाने के मामले सामने आए हैं, जो बच्चों के मानसिक विकास पर दीर्घकालिक असर डाल सकते हैं. LiLLBUD का पूरा उत्पाद पोर्टफोलियो BIS-प्रमाणित है, जिससे कंपनी माता-पिता की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रही है.
आईआईटी और आईआईएम के पूर्व छात्रों ने की स्थापना
कंपनी की स्थापना अभिषेक शर्मा और आयुष बंसल ने की है. अभिषेक शर्मा आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र हैं और इससे पहले Shadowfax तथा CityMall से जुड़े रहे हैं. वहीं, आयुष बंसल आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व छात्र हैं तथा BCG और BYJU'S में काम कर चुके हैं.
कंपनी मोंटेसरी पद्धति से प्रेरित खिलौने और लर्निंग प्रोडक्ट्स तैयार करती है, जो बच्चों के संज्ञानात्मक, संवेदी और मोटर कौशल के विकास में मदद करते हैं.
तीन साल की उम्र तक होता है 80% मस्तिष्क विकास
कंपनी के अनुसार, वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 80 प्रतिशत विकास तीन वर्ष की उम्र से पहले हो जाता है. इसी कारण 0-3 वर्ष की आयु को संज्ञानात्मक और संवेदी विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है.
LiLLBUD को अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन प्लेटफॉर्म Rocket Learning के सह-संस्थापक अजीज गुप्ता का भी मार्गदर्शन मिल रहा है, जो कंपनी में निवेशक और सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं.
पिता बनने के अनुभव से जन्मा स्टार्टअप का विचार
कंपनी के सह-संस्थापक आयुष बंसल ने बताया कि पिता बनने की तैयारी के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि बाजार में सुरक्षित, वैज्ञानिक आधार वाले और भरोसेमंद अर्ली लर्निंग उत्पादों की कमी है. इसी अनुभव ने LiLLBUD की नींव रखी.
एक साल में 3.5 करोड़ रुपये की रन रेट
मई 2025 में लॉन्च होने के बाद कंपनी ने 3.5 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व रन रेट हासिल कर ली है. वर्तमान में कंपनी के पास 200 से अधिक उत्पाद हैं, जो उसकी वेबसाइट के अलावा Amazon, Flipkart और Blinkit जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं.
कंपनी का भविष्य का रोडमैप
LiLLBUD आने वाले समय में क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स चैनलों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने, BIS-प्रमाणित उत्पादों की संख्या बढ़ाने और बच्चों के शुरुआती विकास से जुड़े उत्पादों के क्षेत्र में भरोसेमंद ब्रांड बनने की दिशा में काम करेगी. कंपनी का लक्ष्य भारत में अर्ली चाइल्डहुड प्रोडक्ट्स के लिए सुरक्षा और विकास का नया मानक स्थापित करना है.
राज्य सरकार का मानना है कि एक्सचेंज के दोबारा शुरू होने से कोलकाता को एक बार फिर पूर्वी भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मुंबई की दलाल स्ट्रीट की तरह अब कोलकाता की ऐतिहासिक लायन्स रेंज भी एक बार फिर शेयर कारोबार की हलचल से गुलजार हो सकती है. पश्चिम बंगाल सरकार ने 118 साल पुराने कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज (CSE) को पुनर्जीवित करने का ऐलान किया है. राज्य सरकार का मानना है कि एक्सचेंज के दोबारा शुरू होने से पूर्वी भारत में पूंजी बाजार को नई ऊर्जा मिलेगी, कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना आसान होगा और कोलकाता को फिर से एक प्रमुख वित्तीय केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकेगा.
बजट में सरकार ने किया बड़ा ऐलान
पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने बजट में कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज को पुनर्जीवित करने की मंशा जाहिर की. सरकार ने कहा कि 118 साल पुरानी यह संस्था कानूनी और नियामकीय अड़चनों के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच गई है, लेकिन अब इसे दोबारा शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे. सरकार का मानना है कि इससे कोलकाता को एक बार फिर पूर्वी भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी.
क्यों अहम है CSE की वापसी?
कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंजों में से एक है. एक समय यह पूर्वी भारत की कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने का बड़ा मंच था. राज्य सरकार के मुताबिक, एक्सचेंज के फिर से सक्रिय होने से क्षेत्रीय कंपनियों को लिस्टिंग और ट्रेडिंग की कम लागत पर सुविधा मिल सकेगी. इसके अलावा नए रोजगार अवसर भी पैदा होंगे और स्थानीय उद्योगों को पूंजी तक आसान पहुंच मिल सकेगी.
उद्योग मंत्री से मिला था CSE का प्रतिनिधिमंडल
हाल ही में कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय से मुलाकात की थी. प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से एक्सचेंज को बंद होने से बचाने और दोबारा शुरू करने में मदद की मांग की. CSE अधिकारियों ने सरकार को बताया कि वे सेबी को दी गई अपनी स्वैच्छिक निकास (वॉलंटरी एग्जिट) की अर्जी वापस लेना चाहते हैं और दोबारा ट्रेडिंग शुरू करना चाहते हैं. उद्योग मंत्री ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्र सरकार और सेबी से बातचीत करेगी.
2013 से बंद है ट्रेडिंग
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अप्रैल 2013 में कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग पर रोक लगा दी थी. इसके बाद लगभग एक दशक तक नियामकीय और कानूनी विवाद जारी रहे. फरवरी 2025 में एक्सचेंज ने स्वेच्छा से स्टॉक एक्सचेंज कारोबार से बाहर निकलने के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक सेबी की ओर से अंतिम एग्जिट आदेश जारी नहीं किया गया है.
SEBI और केंद्र से सहयोग की उम्मीद
राज्य सरकार का मानना है कि यदि मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज को मुंबई से परिचालन की अनुमति मिल सकती है, तो पर्याप्त बुनियादी ढांचे, वित्तीय संसाधनों और राष्ट्रीय उपस्थिति वाले कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज को भी दोबारा अवसर मिलना चाहिए. CSE से जुड़े लोगों का कहना है कि एक्सचेंज के पास मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, जिनका उपयोग दोबारा शेयर कारोबार शुरू करने के लिए किया जा सकता है.
पूर्वी भारत के वित्तीय केंद्र के रूप में उभर सकता है कोलकाता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज दोबारा शुरू होता है, तो इससे पूर्वी भारत के उद्योगों और निवेशकों को बड़ा फायदा मिल सकता है. इससे क्षेत्रीय कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने के विकल्प बढ़ेंगे और कोलकाता एक बार फिर देश के प्रमुख वित्तीय केंद्रों में अपनी जगह बना सकता है.
फंड जुटाने की इस योजना में 6,555 करोड़ रुपये के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि 947.7 करोड़ रुपये के शेयर प्रमोटर समूह की ओर से ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचे जाएंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सज्जन जिंदल समूह की कंपनी जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर ने अपने विस्तार कार्यक्रम और बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए 7,502.7 करोड़ रुपये का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) लॉन्च किया है. कंपनी इस फंड का इस्तेमाल नए निवेश, परियोजनाओं के विस्तार, कर्ज कम करने और रणनीतिक विकास योजनाओं के लिए करेगी.
6,555 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी करेगी कंपनी
फंड जुटाने की इस योजना में 6,555 करोड़ रुपये के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि 947.7 करोड़ रुपये के शेयर प्रमोटर समूह की ओर से ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचे जाएंगे. कंपनी ने शेयर का सांकेतिक इश्यू प्राइस 285 रुपये प्रति शेयर तय किया है, जो 22 जून को एनएसई पर बंद भाव के मुकाबले लगभग 7.2 प्रतिशत कम है.
इक्विटी हिस्सेदारी में होगा बदलाव
प्रस्तावित लेनदेन के तहत नए शेयर जारी होने से कंपनी की पोस्ट-इश्यू इक्विटी में लगभग 9.9 प्रतिशत का डाइल्यूशन होगा. वहीं, ऑफर फॉर सेल के कारण अतिरिक्त 1.4 प्रतिशत हिस्सेदारी में कमी आएगी. कंपनी ने कहा कि जुटाई गई पूंजी का उपयोग मुख्य रूप से पूंजीगत व्यय, सहायक कंपनियों में निवेश, कर्ज चुकाने और रणनीतिक विस्तार योजनाओं के लिए किया जाएगा.
फंड का एक हिस्सा चल रही परियोजनाओं के विकास के लिए सहायक कंपनियों में लगाया जाएगा, जबकि दूसरी ओर इसका इस्तेमाल मूल कंपनी और उसकी सहयोगी इकाइयों के कर्ज को चुकाने या समय से पहले भुगतान करने में किया जाएगा. इसके अलावा, कंपनी अधिग्रहण, रणनीतिक निवेश और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए भी इस राशि का उपयोग करेगी.
फ्लोर प्राइस 290.35 रुपये तय
सोमवार को कंपनी की फाइनेंस कमेटी ने क्यूआईपी जारी करने को मंजूरी देते हुए प्रति शेयर 290.35 रुपये का फ्लोर प्राइस तय किया था. अंतिम इश्यू मूल्य बुक रनिंग लीड मैनेजर्स के साथ परामर्श के बाद तय किया जाएगा. कंपनी को फ्लोर प्राइस पर अधिकतम 5 प्रतिशत तक की छूट देने की भी अनुमति है.
प्रमोटर समूह भी बेचेगा हिस्सेदारी
इस ऑफर के तहत कंपनी अधिकतम 230 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करेगी, जबकि सज्जन जिंदल फैमिली ट्रस्ट की ओर से 33.25 करोड़ शेयरों की बिक्री की जाएगी. लेनदेन की शर्तों के अनुसार कंपनी 60 दिनों की लॉक-इन अवधि का पालन करेगी, जबकि प्रमोटर समूह इश्यू बंद होने के बाद 12 सप्ताह तक लॉक-इन अवधि में रहेगा.
30,000 करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी
यह फंड जुटाने की प्रक्रिया कंपनी के दीर्घकालिक विस्तार कार्यक्रम का हिस्सा है. जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर ने वित्त वर्ष 2025 से 2030 के बीच लगभग 30,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश की योजना बनाई है, जिसमें वित्त वर्ष 2028 तक करीब 16,500 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य है.
संस्थागत निवेशकों का दायरा बढ़ाने की रणनीति
कंपनी का मानना है कि यह क्यूआईपी केवल विस्तार योजनाओं को ही समर्थन नहीं देगा, बल्कि सार्वजनिक शेयरधारिता संबंधी नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करने और संस्थागत निवेशकों के आधार को मजबूत करने में भी मदद करेगा.
राज्य सरकार 'पश्चिम बंगाल निवेश ढांचा' लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत औद्योगिक क्लस्टरों और कॉरिडोर के जरिए निवेश आकर्षित किया जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार ने अपना पहला पूर्ण बजट पेश करते हुए 'विकसित बांग्ला' का विजन सामने रखा है. 4.38 लाख करोड़ रुपये के बजट में सरकार ने बुनियादी ढांचे, औद्योगीकरण, कनेक्टिविटी और निवेश को विकास की नई धुरी बनाया है. वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य पश्चिम बंगाल को 'विकसित भारत' का एक मजबूत और आधुनिक हिस्सा बनाना है.
'विकसित बांग्ला' को बनाया विकास का आधार
वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने कहा कि नई सरकार एक ऐसे पश्चिम बंगाल का निर्माण करना चाहती है, जो विकसित, सुरक्षित, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार हो. राज्य सरकार केंद्र की 'पूर्वोदय' पहल के तहत बंगाल के लिए एक व्यापक विकास खाका तैयार करेगी, जिसमें औद्योगिक गलियारों, विनिर्माण केंद्रों और पर्यटन आधारित बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी जाएगी.
औद्योगिक गलियारों और निवेश पर सरकार का जोर
राज्य सरकार 'पश्चिम बंगाल निवेश ढांचा' लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत औद्योगिक क्लस्टरों और कॉरिडोर के जरिए निवेश आकर्षित किया जाएगा. सरकार दुर्गापुर में सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई स्थापित करने की संभावना पर काम कर रही है, जबकि बांकुरा और बीरभूम में रक्षा विनिर्माण केंद्र विकसित करने की योजना है. इसके अलावा, राज्य की प्रतिभा और तकनीकी क्षमता का लाभ उठाने के लिए सरकार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीति भी लाने जा रही है.
ताजपुर पोर्ट परियोजना को मिल सकती है नई गति
वर्षों से लंबित ताजपुर डीप-सी पोर्ट परियोजना को पुनर्जीवित करने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाए हैं. पूर्वी मेदिनीपुर में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत इस परियोजना को विकसित करने पर विचार किया जा रहा है. सरकार का मानना है कि इससे राज्य में लॉजिस्टिक्स और व्यापार को नई गति मिलेगी.
मेट्रो और एयरपोर्ट परियोजनाओं पर बड़ा फोकस
कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए दुर्गापुर-आसनसोल और सिलीगुड़ी-जलपाईगुड़ी के बीच मेट्रो लिंक की व्यवहार्यता का अध्ययन कराया जाएगा. वहीं, केंद्र की उड़ान योजना के तहत पुरुलिया, बालुरघाट और मालदा में नए हवाई अड्डों के निर्माण की घोषणा की गई है. इसके अलावा, कोलकाता एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए कल्याणी के पास 1,000 से 1,500 एकड़ जमीन पर एक नए एयरपोर्ट की योजना भी बनाई जा रही है.
कर्ज का बोझ बना बड़ी चुनौती
वित्त मंत्री ने राज्य पर 8.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज को गंभीर चुनौती बताया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग और वित्तीय सुधारों के जरिए राज्य के वित्तीय हालात को स्थिर करने की कोशिश की जाएगी. सरकार के अनुमान के अनुसार, 2026-27 में राजस्व घाटा जीएसडीपी का 1.02 प्रतिशत रहेगा, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान 2.07 प्रतिशत से काफी कम है. वहीं, राजकोषीय घाटा 2.91 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है.
आर्थिक सुधारों के जरिए विकास की उम्मीद
सरकार का मानना है कि बुनियादी ढांचे, निवेश, उद्योग और कनेक्टिविटी पर केंद्रित यह बजट राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा. साथ ही, केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय से पश्चिम बंगाल को पूर्वी भारत के एक प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी आएगी.
आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता की अगुवाई में तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर मॉनसून कृषि उत्पादन, खाद्य कीमतों और आर्थिक गतिविधियों पर असर डाल सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में कमजोर पड़ते मॉनसून ने एक बार फिर अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा अर्थव्यवस्था स्थिति रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कमजोर रहता है तो इसका सीधा असर देश की आर्थिक विकास दर और महंगाई के अनुमान पर पड़ सकता है. हालांकि, आरबीआई ने यह भी कहा है कि मजबूत आर्थिक बुनियाद, नियंत्रित चालू खाता घाटा और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों का सामना करने की बेहतर स्थिति में है.
बारिश की कमी ने बढ़ाई चिंता
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कम रह सकता है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, 14 जून तक देश में बारिश की कमी 28.4 प्रतिशत थी, जो 21 जून तक बढ़कर 42.2 प्रतिशत हो गई. आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता की अगुवाई में तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर मॉनसून कृषि उत्पादन, खाद्य कीमतों और आर्थिक गतिविधियों पर असर डाल सकता है.
विकास दर और महंगाई पर पड़ सकता है असर
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.7 प्रतिशत के शुरुआती अनुमान से कम है. वहीं, खुदरा महंगाई दर 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मॉनसून इन अनुमानों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है.
वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत बनी भारतीय अर्थव्यवस्था
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति कई अन्य देशों की तुलना में अधिक मजबूत है. पिछले कुछ वर्षों में देश ने मजबूत आर्थिक वृद्धि, नियंत्रित महंगाई, राजकोषीय अनुशासन और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखा है.
निजी खपत और निवेश से मिली अर्थव्यवस्था को ताकत
आरबीआई के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जिसका मुख्य आधार निजी खपत और स्थिर निवेश रहा. चालू वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों के संकेतक भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती की ओर इशारा कर रहे हैं.
खाद्य और ईंधन कीमतों से बढ़ी महंगाई
महंगाई के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि मई में खाद्य और ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के कारण खुदरा महंगाई बढ़कर 3.9 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 3.5 प्रतिशत थी. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि और खाद्य वस्तुओं की महंगाई जून में भी बनी रहने के संकेत मिले हैं.
विदेशी मुद्रा भंडार और एफडीआई से मिला सहारा
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का बाह्य क्षेत्र भी मजबूत बना हुआ है. चालू खाता घाटा नियंत्रित है और विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त स्तर पर है. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में तेजी आई है, जबकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में कुछ निकासी देखने को मिली है. आरबीआई का मानना है कि सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने वाले कदमों से आने वाले समय में पूंजी प्रवाह को समर्थन मिल सकता है.
Meta ने CRED में किया बड़ा निवेश, कंपनी की वैल्यू 4.5 अरब डॉलर पहुंची
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
फिनटेक स्टार्टअप क्रेड (CRED) के संस्थापक कुणाल शाह अब मेटा (Meta) की वैश्विक नेतृत्व टीम का हिस्सा बनने जा रहे हैं. कंपनी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मेटा ने क्रेड में करीब 90 करोड़ डॉलर का निवेश किया है और इसी के साथ कुणाल शाह को व्हाट्सऐप (WhatsApp) के नए ग्लोबल हेड की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस समझौते के तहत मेटा, क्रेड में लगभग 20 प्रतिशत अल्पांश हिस्सेदारी खरीदेगी. इस निवेश के बाद कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन करीब 4.5 अरब डॉलर यानी लगभग 43,239 करोड़ रुपये आंका गया है. फंडिंग राउंड में प्राथमिक पूंजी निवेश के साथ सेकेंडरी शेयरों की खरीद भी शामिल है.
व्हाट्सऐप के अगले चरण की ग्रोथ का नेतृत्व करेंगे शाह
कुणाल शाह व्हाट्सऐप के विकास के अगले चरण का नेतृत्व करेंगे. उनकी प्राथमिकता विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन आधारित राजस्व मॉडल को बढ़ाना तथा प्लेटफॉर्म पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एजेंट्स की तैनाती को तेज करना होगी. नेतृत्व परिवर्तन के तहत कुणाल शाह क्रेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद से हट जाएंगे और मेटा की वैश्विक नेतृत्व टीम में शामिल होंगे. वह विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जिन्हें कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं.
मितेन संपत बने अंतरिम CEO
क्रेड में वर्ष 2020 से रणनीति और वित्त का नेतृत्व कर रहे मितेन संपत को तत्काल प्रभाव से अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है. कंपनी फिलहाल दीर्घकालिक प्रबंधन ढांचे पर काम कर रही है और संभावित आईपीओ की तैयारियों में जुटी है.
17 मिलियन से अधिक सक्रिय सदस्य
वर्ष 2018 में स्थापित क्रेड क्रेडिट योग्य उपभोक्ताओं के लिए भुगतान, ऋण, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट और लाइफस्टाइल सेवाएं प्रदान करती है. कंपनी के अनुसार, उसके 1.7 करोड़ मासिक सक्रिय सदस्य हैं और भारत के 40 प्रतिशत से अधिक क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान उसके प्लेटफॉर्म के माध्यम से होते हैं. कंपनी का लेंडिंग कारोबार पार्टनर वित्तीय संस्थानों के लिए लगभग 24,000 करोड़ रुपये की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट तक पहुंच चुका है. क्रेड ने करीब 3,200 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व और लाभप्रदता हासिल करने का भी दावा किया है.
भारत के फिनटेक सेक्टर पर मेटा का बड़ा दांव
मेटा का यह निवेश भारत के फिनटेक क्षेत्र में उसके सबसे बड़े निवेशों में से एक माना जा रहा है. कंपनी डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं के तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करना चाहती है.
कुणाल शाह ने इस बदलाव पर कहा कि क्रेड एक साधारण रिवॉर्ड प्लेटफॉर्म से विकसित होकर लाखों सदस्यों की सेवा करने वाला लाभदायक मंच बन चुका है और मौजूदा नेतृत्व टीम कंपनी को अगले चरण तक ले जाने के लिए पूरी तरह सक्षम है.