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IBC ने सुधारा भारत का बैंकिंग सेक्टर, एनपीए वसूली में आई तेजी: निर्मला सीतारमण
सीतारमण ने यह टिप्पणी IBC (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश करते समय की, जिसमें 12 नए संशोधन प्रस्तावित हैं. यह कानून पहली बार 2016 में लागू हुआ था और अब तक इसमें सात बार संशोधन किया जा चुका है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड (IBC) ने देश के बैंकिंग सेक्टर की सेहत सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि IBC के तहत गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) की वसूली भी तेजी से हुई है, जिससे बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत हुई और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में सुधार आया.
सीतारमण ने यह टिप्पणी IBC (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश करते समय की, जिसमें 12 नए संशोधन प्रस्तावित हैं. यह कानून पहली बार 2016 में लागू हुआ था और अब तक इसमें सात बार संशोधन किया जा चुका है.
IBC के जरिए NPA वसूली में सुधार
वित्त मंत्री ने बताया कि IBC लागू होने के बाद बैंकों ने आधे से अधिक NPA की वसूली की है. पुराने समय में बैंकिंग सिस्टम में एनपीए वसूलना बहुत धीमा और कोर्ट-कचहरी पर निर्भर था. कंपनियां डिफॉल्ट करने के बाद भी काम जारी रखती थीं, जिससे बैंकिंग सिस्टम पर दबाव बढ़ता था.
IBC के आने के बाद 180–330 दिनों की तय सीमा में इन मामलों का समाधान संभव हुआ. कंपनियों को बेचकर या पुनर्गठन के माध्यम से बैंकों का पैसा वापस आया. इससे प्रमोटरों पर दबाव बढ़ा और NPA रिकवरी में सुधार देखा गया.
कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर सकारात्मक असर
IBC ने केवल एनपीए वसूली ही नहीं बढ़ाई, बल्कि कंपनियों में अनुशासन और पारदर्शिता भी बढ़ाई. अब प्रमोटर डिफॉल्ट करने से पहले कई बार सोचते हैं. निवेशकों का भरोसा बढ़ा और कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर हुआ. वित्त मंत्री ने कहा कि IBC प्रक्रिया से बाहर आने के बाद कंपनियों का संचालन अधिक सुदृढ़ और जिम्मेदार बन गया. इसके साथ ही बैंकिंग सेक्टर की उधारी देने की क्षमता बढ़ी, जिससे निवेश और आर्थिक गतिविधियों को भी समर्थन मिला.
नए संशोधन का उद्देश्य
सरकार का लक्ष्य IBC को और प्रभावी बनाना है. प्रस्तावित संशोधनों में मुख्य फोकस इस प्रकार है:
1. केस स्वीकार करने में लगने वाला समय कम करना
2. प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना
3. छोटे मामलों का जल्दी निपटारा सुनिश्चित करना
IBC का प्रभावी क्रियान्वयन देश की आर्थिक वृद्धि और बैंकिंग प्रणाली की मजबूती के लिए अहम माना जा रहा है.
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