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इस बिजनेस में होने लगा जबरदस्त घाटा, बिजनेसमैन ने बयां किया दर्द; चीन भी जिम्मेदार!

अलग डिजाइन का मटेरियल चीन ने बनाना शुरू कर दिया. अब दिल्ली में जो मटेरियल आता है, वह चीन से आता है.

आमिर कुरेशी 4 years ago

आगरा: मोहब्बत की नगरी  आगरा (Agra City) में प्रतिदिन हजारों की संख्या में सैलानी ताज महल के साथ ही अन्य इमारतों का दीदार करने के लिए आते हैं. पर्यटक आगरा आएं और यहां का पेठा और जूता लेना भूल जाएं, ऐसा नहीं हो सकता. लेकिन जिस तरह से जूते के मेटेरियल के दाम आसमान छू रहे हैं, इसको लेकर आगरा के जूतों की चमक फीकी पड़ती हुई दिखाई दे रही है. आलम यह है कि जिस जूते की फैक्ट्री में प्रतिदिन एक हजार जूते की जोड़ी बनती थी, अब सिर्फ 200 से 250 तक ही सीमित रह गई है.

जीएसटी का बढ़ना भी मेन कारण
इसके पीछे का कारण यह है कि मेटेरियल के दाम बढ़ गए, जिसके कारण जूते के दाम भी बढ़ गए और ट्रेडर्स अब सिर्फ  ऑर्डर उतना ही दे रहा जितनी उसको जरूरत है. हालंकि इसके कारण जूते के कारीगरों को काफी परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है. आगरा को जूते और पेठे का हब भी कहा जाता है, लेकिन बढ़ते दामों के कारण धीरे-धीरे जूते का कारोबार कम होता जा रहा है. हालंकि इसमें जीएसटी की भी मुख्य भूमिका निभा रही है. पहले जीएसटी जूते पर दामों के हिसाब से रखी गई थी, लेकिन कुछ समय पहले जीएसटी को भी बढ़ा दिया गया, जिसके कारण बीते दिनों आगरा के जूता व्यापारियों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन भी किया था.

चीन से आ रहा मटेरियल
जूते के मटेरियल की दुकान करने वाले कमल कहते हैं कि पहले मटेरियल इंडिया में ही बनता था, जिसके कारण दाम कम होते थे और जूते भी सस्ते बनते थे. लेकिन अलग डिजाइन का मटेरियल चीन ने बनाना शुरू कर दिया. अब दिल्ली में जो मटेरियल आता है, वह चीन से आता है. यही कारण है मटेरियल के दामों में वृद्धि हुई है और जूते के दाम भी फैक्ट्री स्वामियों ने बढ़ा दिए. इसका असर काम पर भी देखने को मिला है.

कारीगरों को अपनी जेब से देते हैं पैसा 
पैंथर शूज फैक्ट्री के मालिक साकेब कुरेशी ने बताया कि हम कई सालों से जूते की फैक्ट्री करते हैं. कई अलग-अलग तरह के जूते बनाते हैं. लेकिन जो कारीगर हमारे यहां पर काम करते हैं, उनको ऑर्डर से मतलब नहीं रहता है. कारीगर कहते हैं कि काम तो हम करेंगे. अब ऑर्डर आगे से ही नहीं मिलेगा तो कारीगर क्या काम करेगा. उन्हें अपनी जेब से पैसे देने पड़ते हैं, जिससे कि वह काम छोड़ कर न चले जाएं.

जितना ऑर्डर आगे से आता उतना फैक्ट्री मालिकों को देते 
इंडियन शूज कंपनी के मालिक मोहम्मद इमरान और फरमान ने बताया कि हम जूते की ट्रेडिंग का काम करते हैं. फैक्ट्रियों से बना हुआ जूता लेते हैं और उसको देश के अलग अलग हिस्सों में सप्लाई करते हैं, लेकिन जिस तरह से जूते के दामों ने आसमान छुआ है, उसको लेकर हमें ऊपर से बहुत ही कम ऑर्डर मिलता है. हम भी फैक्ट्री स्वामियों को सिर्फ उतना ही ऑर्डर देते हैं, जितनी हमें आवश्यकता है.

सोल के अलग अलग डिजाइन बनते हैं आकर्षक का केंद्र  
सोल विक्रेता कामरान ने बताया कि हमारी जूते की मंडी कही जाने वाली हींग की मंडी में कामरान सोल के नाम से दुकान है. लेकिन चीन द्वारा लगातार नए नए तरीके के सोल डिजाइन किए जा रहे हैं, जो लोगों को पसंद आते हैं. यही वजह रहती है कि फिर हमें भी उसी तरह के सोल बनाने पड़ते हैं, लेकिन सोल के मटेरियल  के दाम भी बढ़े जिसकी वजह से सोल के दाम बढ़ाए गए थे. फैक्ट्री स्वामियों को जितने सोल की जरूरत होती है, वह अब सर्फ उतना ही लेते हैं. पहले स्टॉक भी करते थे, लेकिन अब स्टॉक नही करते.


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