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बिड़ला-अडानी में सीमेंट सेक्टर पर बादशाहत की जंग, छोटी कंपनियों का क्या होगा?

इस समय सीमेंट सेक्टर पर बिड़ला समूह की कंपनी अल्ट्राटेक का दबदबा है, लेकिन अडानी समूह भी तेजी से आगे बढ़ रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

देश के सीमेंट सेक्टर (Cement Sector) पर इस समय बादशाहत की जंग चल रही है. एक तरफ आदित्य बिड़ला ग्रुप है जो अपना नंबर 1 का ताज बचाने में लगा है, तो दूसरी तरफ अडानी समूह उससे यह ताज छीनने की शिद्दत से कोशिश कर रहा है. इस सेक्टर में अडानी समूह की एंट्री से पहले बिड़ला ग्रुप के लिए सबकुछ बेहद आसान था. समूह की कंपनी अल्ट्राटेक देश की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी ही और उसे टक्कर देने वाला कोई नहीं था. लेकिन पिछले दो सालों में तस्वीर तेजी से बदली है. अडानी समूह लगातार उसे चुनौती दे रहा है. दोनों तरफ से अपना दायरा बढ़ाने के लिए लगातार अधिग्रहण किए जा रहे हैं, ऐसे में यह सवाल अहम हो गया है कि इस सेक्टर की छोटी कंपनियों का क्या भविष्य है?

पकड होगी मजबूत
अडानी समूह से एक कदम आगे बने रहने के लिए बिड़ला ग्रुप ने इंडिया सीमेंट को अपना बनाने के लिए एक डील की है. इस डील के पूरा होने के बाद अल्ट्राटेक को दक्षिण भारत के बाजार में अपनी पकड़ जमाने का मौका मिलेगा. तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में फैली इंडिया सीमेंट्स की 14.5 मिलियन टन क्षमता अल्ट्राटेक की कुल क्षमता में इजाफा करेगी. खासतौर पर बिड़ला समूह की इस कंपनी का हाथ तमिलनाडु में ज्यादा मजबूत होगा, क्योंकि राज्य में  अल्ट्राटेक के पास 1.4 मिलियन टन क्षमता वाली एकमात्र यूनिट है. जबकि सीमेंट्स की क्षमता यहां 6 मिलियन टन है. 

और होंगे अधिग्रहण
आदित्य बिड़ला ग्रुप के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिड़ला अल्ट्राटेक की कुल सीमेंट उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर प्रतिवर्ष 200 मिलियन टन (MTPA) करना चाहते हैं. कंपनी की मौजूदा क्षमता 152.7 MTPA है. इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में बिड़ला समूह कुछ और अधिग्रहण करेगा. अल्ट्राटेक सीमेंट 2 साल से कम समय में 6 बड़ी डील कर चुकी है और इंडिया सीमेंट का अधिग्रहण उसकी 7वीं बड़ी डील होगा. इस साल की शुरुआत में कंपनी ने 7600 करोड़ की लागत से केसोराम सीमेंट का अधिग्रहण किया था. कुमार मंगलम बिड़ला ओरिएंट सीमेंट लिमिटेड को अपना बनाना चाहते हैं. ओरिएंट सीमेंट का मालिकाना हक इस समय सीके बिड़ला के पास है. 1979 में स्थापित Orient Cement पहले ओरिएंट पेपर एवं इंडस्ट्रीज का हिस्सा थी. 2012 में इसे डीमर्ज करके अलग कंपनी बनाया गया. 

इस पर दांव की तैयारी 
ओरिएंट सीमेंट ने सीमेंट प्रोडक्शन के शुरुआत 1982 में तेलंगाना के देवापुर से की थी. 8.5 MTPA कैपिसिटी वाली इस कंपनी की पहुंच, तेलंगाना, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक के साथ-साथ मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरला, गुजरात और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों तक है. यदि आदित्य बिड़ला समूह ओरिएंट को खरीदने में सफल रहता है, तो अल्ट्राटेक के कैपिसिटी में और इजाफा हो जाएगा. वैसे, अडानी समूह भी ओरिएंट सीमेंट को अपना बनाने की दौड़ का हिस्सा है. पिछले काफी समय से यह चर्चा है कि गौतम अडानी ओरिएंट सीमेंट में हिस्सेदारी खरीद सकते हैं. दोनों पक्षों में डील को लेकर बातचीत भी हुई है. 

उड़ाए रखा है चैन
अडानी समूह ने 2022 में अंबुजा सीमेंट और ACC लिमिटेड का अधिग्रहण कर इस सेक्टर में प्रवेश किया था. तब से अब तक अडानी ने बिड़ला को चैन से बैठने नहीं दिया है. महज 2 साल में अडानी ग्रुप 4 बड़े अधिग्रहण कर चुका है. अडानी समूह इस सेक्टर में दूसरा सबसे बड़ा प्लेयर है. अंबुजा सीमेंट ने कुछ वक्त पहले पेन्‍ना सीमेंट का अधिग्रहण किया था. इस अधिग्रहण से अडानी को अपने बाजार को दक्षिण भारत में विस्‍तार करने में मदद मिलेगी. अडानी समूह की सीमेंट उत्‍पादन क्षमता अब 57 MTPA तक पहुंच गई है, जिसे समूह 2028 तक बढ़ाकर 140 मिलियन टन करना चाहता है. पिछले साल समूह ने सांघी इंडस्ट्रीज लिमिटेड का अधिग्रहण किया था. इससे पहले सांघी इंडस्ट्रीज की कमान रवि सांघी एंड फैमिली के पास थी. वदराज सीमेंट (Vadraj Cement) पर भी बिड़ला और अडानी दांव लगाना चाहते हैं.  

नहीं बचेगा कोई विकल्प
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सीमेंट सेक्टर में अडानी समूह और बिड़ला ग्रुप के बीच जिस तरह की जंग चल रही है, उसमें छोटी कंपनियों के लिए टिकना बेहद मुश्किल होता जा रहा है. छोटी कंपनियां अपनी जैसी कंपनियों से मुकाबला कर सकती हैं, लेकिन बिड़ला और अडानी जैसे बड़े प्लेयर्स के सामने टिकना उनके लिए मुमकिन नहीं. क्योंकि बिडला और अडानी लगातार अधिग्रहण कर रहे हैं, ऐसे में छोटी कंपनियों के सामने अचानक से बड़े और मजबूत प्रतिद्वंद्वी आ गए हैं. इस स्थिति में ये कंपनियां ज्यादा समय तक खुद को बाजार में टिकाये नहीं रख पाएंगी. या तो उन्हें खुद अपना कारोबार बिड़ला-अडानी को सौंपना होगा या फिर उस पर ताला लगाना होगा. 


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