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BW Flexispace: कैसे बनता है एक ऑफिस जिसमें सब हों शामिल? जानिए एक्सपर्ट्स से!
कंपनियों और संस्थाओं को यह बात समझ आ रही है कि वर्क-स्पेस में लोगों की विभिन्नताओं का मतलब सिर्फ लैंगिक समानता से नहीं है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
BW बिजनेसवर्ल्ड (BW BusinessWorld) द्वारा मुंबई में BW Flexispaces समिट के पहले एडिशन का आयोजन किया गया. इस समिट के आयोजन के दौरान को-वर्किंग स्पेस के बढ़ते क्षेत्र को समझने की कोशिश की गई और साथ ही इस बात पर भी चर्चा की गई कि एक ऐसा वर्क-स्पेस किस तरह बनाया जा सकता है जिसमें सभी प्रकार के लोगों और विभिन्नताओं को जगह दी जा सके.
वर्क-स्पेस की यूनिवर्सल गाइडलाइन्स
इससे पहले कि हम इस विषय पर एक्सपर्ट्स की राय जानें, आइए Inclusiv की CEO और फाउंडर डॉक्टर वीणा शिनॉय से भारत में यूनिवर्सल गाइडलाइन्स के बारे में थोड़ा सा जान लेते हैं. हालांकि अमेरिका में सभी के लिए सामान वर्क-प्लेस की शुरुआत 1950 के आस पास ही हो गई थी, लेकिन 1950 में वहां युनिवर्सल वर्क-स्पेस की गाइडलाइन्स की शुरुआत हुई. भारत में मानसिक कल्याण के साथ जुड़कर 1987 के आस-पास एक मूवमेंट की शुरुआत हुई.
भारत में दिव्यांग जनों के आधिकार
इसके बाद जावेद अबिदी का नाम प्रमुख रूप से सामने आता है जिन्हें 1990 में दिव्यांग जनों के अधिकारों की शुरुआत करने वाले व्यक्ति के तौर पर जाना जाता है. जावेद अबिदी ने दिव्यांग जनों के अधिकारों के लिए तो विशेष रूप से काम किया ही साथ ही उन्होंने दिव्यांग जनों को नौकरी प्रदान करवाने के लिए भी प्रमुख रूप से काम किया. सभी लोगों को शामिल करने वाला एक वर्क-स्पेस बनाने के विषय पर बोइंग ग्लोबल की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रितु शर्मा ने कहा कि धीरे-धीरे कंपनियों और संस्थाओं को यह बात समझ आ रही है कि वर्क-स्पेस में लोगों की विभिन्नताओं का मतलब सिर्फ लैंगिक समानता से नहीं है.
यूनिवर्सल भिन्नता
रितु शर्मा ने यूनिवर्सल भिन्नता का उदाहरण देते हुए कहा कि बोइंग में ज्यादातर लोग चाहते हैं कि उनके वर्क-स्पेस में प्रार्थना करने की जगह भी बनाई जाए और यह मांग भारत में भी काफी ज्यादा देखने को मिलती है. इसी एक मांग को देखते हुए कंपनी ने ‘रिफ्लेक्शन-रूम’ बनाए हैं जहां जाकर आप प्रार्थना तो कर ही सकते हैं, आप ध्यान भी लगा सकते हैं और अगर आप चाहें तो अपना तनाव भी दूर कर सकते हैं.
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