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Happiness एक कांसेप्ट है, जिसे सबको सेलीब्रेट करना चाहिए- डॉ. आशीष अंबस्टा
हैप्पीनेस एक कांसेप्ट है, जिसे सबको सेलीब्रेट करना चाहिए. यह सेलीब्रेशन वर्कप्लेस पर भी होना चाहिए, क्योंकि अब इस समिट के बाद यह एक मूवमेंट बन जाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः BW The Happiest Workplaces Summit में अपने उद्घाटन भाषण में बोलते हुए Happy Plus Consulting के फाउंडर व सीईओ डॉ. आशीष अंबस्टा ने कहा कि हैप्पीनेस एक कांसेप्ट है, जिसे सबको सेलीब्रेट करना चाहिए. यह सेलीब्रेशन वर्कप्लेस पर भी होना चाहिए, क्योंकि अब इस समिट के बाद यह एक मूवमेंट बन जाएगा. मैं खुश हूं इसके लिए, क्योंकि इसको बिजनेस लीडर्स के दिमाग में बैठाने में भी एक लंबा वक्त लगा है.
The Bridge to know your people नाम के सेशन की शुरुआत करते हुए डॉ. अंबस्टा ने कहा कि यह बहुत जरूरी बात है कि हैप्पीनेस हर जगह होनी चाहिए क्योंकि मैं 20 साल से विभिन्न कंपनियों के साथ सलाहकार के तौर पर काम कर रहा हूं और जहां भी मैं जाता हूं वहां कर्मचारियों से ये सवाल जरूर पूछता हूं कि क्या आप खुश हैं? इस सवाल के जवाब में डेटा कहीं नहीं बदला है और पिछले कई सालों से इसका जवाब एक सा ही मिलता है.
कर्मचारी नहीं है अपने काम से खुश
वहीं अगर कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों से यह पूछा जाए कि क्या आप इंगेज हैं, मोटिवेट होते हैं अपने काम से तो पिछले 23 सालों से डाटा में किसी तरह का कोई सुधार देखने को नहीं मिला है. पूरी वर्कफोर्स में केवल 12-13 फीसदी लोग ही अपने काम करने से खुश होते हैं और बाकी के 88 फीसदी लोग काम पर या तो आना नहीं चाहते हैं या फिर वो अपने को ऑफिस में घसीट रहे हैं. एक तरह से देखा जाए तो यह डाटा बिलकुल भी खुश नहीं करता है.
महामारी के बाद लानी है खुशी
डॉ. अंबस्टा ने कहा कि महामारी के दौरान और उसके बाद इस बात पर गंभीरता से विचार किया गया कि कार्यक्षेत्र में खुशी लेकर के आनी है. ऐसा इसलिए क्योंकि लोगों की जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा उनके ऑफिस या फिर फैक्ट्री में काम करके जाता है और अगर वहां पर कर्मचारी खुश नहीं है तो फिर यह जीवन को एक तरह से बर्बाद करने की बात है.
विश्व में बढ़ रही है नाखुशी
कई सर्वे में यह बात सामने निकलकर आई है कि दुनिया में ज्यादातर लोग अपने काम को लेकर के खुश नहीं हैं. इससे हैप्पीनेस इंडेक्स भी लगातार कम होता जा रहा है. व्हर्लपूल द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार पिछले एक साल में हैप्पीनेस इंडेक्स काफी गिर गया है और लोग दिन पर दिन खुश होना कम हो रहे हैं. रिसर्च फर्म गैल्लप द्वारा 2021 में किए गए एक सर्वे में कहा गया है कि लोग बहुत ज्यादा नाखुश थे. ये एक बहुत ही चिंता की बात है.
हमें डालनी होंगी Happy Habits
डॉ. अंबस्टा ने कहा कि हैप्पीनेस इंडेक्स को बढ़ाने के लिए वर्कप्लेस पर कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को काम करना होगा. इसके लिए व्यक्तिगत जवाबदेही के साथ ही कंपनियों को भी अपनी जवाबदेही तय करनी होगी. कंपनियों में ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जिससे हैप्पीनेस और पॉजिविटी तैयार हो, जिसके लिए हम सबको अपने -अपने वर्कप्लेस पर हैप्पी हैबिट्स तैयार करनी होंगी.
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