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नवंबर में GST से भर गया सरकार का खजाना, 8.5% बढ़कर ₹1.82 लाख करोड़ का हुआ कलेक्शन
सरकार ने जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े जारी किए हैं और ये नवंबर में 8.5 फीसदी की उछाल के साथ बढ़कर 1.82 लाख करोड़ रुपये रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर अच्छी खबर है, नवंबर में जीएसटी कलेक्शन 8.5 फीसदी बढ़कर 1.82 लाख करोड़ रुपये हो गया. सरकार के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है. GST अप्रत्यक्ष कर है, जब हम कहते हैं कि जीएसटी संग्रह बढ़ गया है तो इसका सीधा सा मतलब है कि सरकार को वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले जीएसटी के रूप में अधिक पैसे मिले हैं, यानी लोग ज्यादा सामान खरीद रहे हैं और अधिक सेवाएं ले रहे हैं. सरकार ने बताया कि नवंबर में जीएसटी कलेक्शन 8.5% बढ़कर 1.82 लाख करोड़ रुपये हो गया. अप्रैल से नवंबर तक कुल कलेक्शन 14.57 लाख करोड़ रुपये रहा, यह जानकारी वित्त मंत्रालय के आंकड़ों से मिली है.
कहां से कितना कलेक्शन?
नवंबर में घरेलू लेनदेन से जीएसटी कलेक्शन में 9.4% की बढ़ोतरी देखी गई, यह 1.40 लाख करोड़ रुपये रहा. आयात पर टैक्स से राजस्व में भी लगभग 6% की वृद्धि हुई, जो 42,591 करोड़ रुपये रहा, इससे पता चलता है कि देश में व्यापार गतिविधियां बढ़ रही हैं. रिफंड की बात करें तो नवंबर में 19,259 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया, यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 8.9% कम है. रिफंड को समायोजित करने के बाद कुल GST कलेक्शन 11% बढ़कर 1.63 लाख करोड़ रुपये हो गया, यह आंकड़ा सरकार के लिए उत्साहजनक है.
अक्टूबर में भी हुआ था रिकॉर्ड कलेक्शन
पिछले महीने यानी अक्टूबर 2024 में भी जीएसटी कलेक्शन में 9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. अक्टूबर का कुल कलेक्शन 1.87 लाख करोड़ रुपये था, जो अब तक का दूसरा सबसे बड़ा कलेक्शन था. इसमें घरेलू बिक्री में तेजी और बेहतर अनुपालन का अहम योगदान था.
केंद्रीय जीएसटी (CGST): ₹33,821 करोड़
राज्य जीएसटी (SGST): ₹41,864 करोड़
एकीकृत जीएसटी (IGST): ₹99,111 करोड़
सेस: ₹12,550 करोड़
जीएसटी कलेक्शन में बढ़त क्या दिखाता है?
बढ़ा हुआ जीएसटी कलेक्शन सरकार को विकास कार्यों में अधिक निवेश का मौका देता है. इससे सड़क, स्वास्थ्य, और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं को सुधारने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा, उच्च जीएसटी संग्रह दिखाता है कि अर्थव्यवस्था में मांग और खपत बढ़ रही है. यह कंपनियों की बिक्री और सेवाओं में हो रही वृद्धि का भी प्रमाण है. हालांकि, बढ़ता हुआ जीएसटी कलेक्शन महंगाई का भी संकेत हो सकता है. अक्सर कंपनियां टैक्स का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल देती हैं, जिससे कीमतें बढ़ जाती हैं.
जीएसटी में सुधार के संकेत
हाल ही में जीएसटी परिषद के मंत्री समूह ने हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी हटाने और अन्य दरों में बदलाव पर अपनी रिपोर्ट सौंपी है. 21 दिसंबर को जैसलमेर में होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में इस पर फैसले लिए जा सकते हैं. प्रमुख संभावित बदलावों की बात करें तो इसमें हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी को हटाने या दरों को कम करने पर विचार किया जा सकता है. इसके अलावा, रोजमर्रा की कई वस्तुओं पर जीएसटी दर को 12% से घटाकर 5% करने का प्रस्ताव है.
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