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ग्लोबल बोर्ड ने सस्टेनेबिलिटी को लेकर की प्रगति, लेकिन नई चुनौतियां भी उभरीं- रिपोर्ट

एक नई वैश्विक सर्वेक्षण से पता चलता है कि सस्टेनेबिलिटी प्रबंधन में भरोसा बढ़ रहा है, लेकिन बोर्ड और CEO एक-दूसरे की नेतृत्व क्षमता पर अभी भी भरोसा नहीं कर पा रहे हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

INSEAD, Heidrick & Struggles और BCG की एक नई वैश्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट में पता चला है कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स सस्टेनेबिलिटी के मुद्दों पर कुछ प्रगति कर रहे हैं, लेकिन वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जियोपॉलिटिकल रिस्क्स को लेकर बढ़ती चिंताओं से घिरे हुए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड ने सस्टेनेबिलिटी से जुड़े विषयों को लेकर अच्छे कदम उठाए हैं, लेकिन अन्य मामलों, जैसे जनरेटिव AI का बढ़ता महत्व और व्यापार व जियोपॉलिटिकल रिस्क्स का सामना करने में वे उतने आत्मविश्वास से भरे नहीं हैं. 

ये चार आपस में जुड़े हुए विषय डायरेक्टर्स और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) को एक अनिश्चित माहौल में काम करने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जहां कई बार विरोधाभासी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मांगें होती हैं. साथ ही, रिपोर्ट में दिखा कि कंपनी के नेतृत्व में यह तय करने को लेकर असहमति है कि प्रतिस्पर्धा को कैसे बढ़ाया जाए, खासतौर पर इन चुनौतियों का सामना करते हुए. 

रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में शामिल 77% ग्लोबल बोर्ड मेंबर्स मानते हैं कि उनकी कंपनियों की समाज से जुड़े मुद्दों को सुलझाने की जिम्मेदारी है. लेकिन इनमें से 54% का कहना है कि कंपनी के बिजनेस ऑब्जेक्टिव्स प्राथमिक फोकस में होने चाहिए. इसके विपरीत, केवल 36% बोर्ड मेंबर्स ही खुद को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बदलती क्षमता का उपयोग करने के लिए तैयार महसूस करते हैं. वहीं, सिर्फ 37% का मानना है कि उनकी कंपनियों के पास जियोपॉलिटिकल रिस्क्स से निपटने की पर्याप्त रणनीतियां हैं. 

ये आंकड़े दिखाते हैं कि पारंपरिक गवर्नेंस (शासन और भविष्य के लिए तैयार रणनीतियों में बेहतर संतुलन बनाने और बोर्ड की क्षमता को बढ़ाने की तत्काल जरूरत है. हालांकि, उभरती तकनीकों और जोखिमों को लेकर आत्मविश्वास कम है, फिर भी 60% से अधिक सदस्य मानते हैं कि उनका बोर्ड जोखिम प्रबंधन (रिस्क मैनेजमेंट) को लेकर सक्रियता दिखा रहा है.

बढ़ती चुनौतियों के बीच आत्मविश्वास की कमी  

नई रिपोर्ट से पता चलता है कि बोर्डरूम में विभाजन की चिंताजनक स्थिति है. 29% डायरेक्टर्स अपने CEO की क्षमता पर भरोसा नहीं करते, जो मुश्किल हालात का सामना करते हुए लॉन्ग-टर्म वैल्यू बढ़ाने में सक्षम हों. वहीं, लगभग 26% CEO अपने बोर्ड की प्रभावशीलता को लेकर संदेह रखते हैं. यह दिखाता है कि टॉप लीडरशिप के बीच तनाव बढ़ रहा है, क्योंकि उन्हें पहले से कहीं अधिक जटिल और विविध मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है. 

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि लगभग आधे डायरेक्टर्स इस बात को लेकर आत्मविश्वास में नहीं हैं कि उनकी कंपनी स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी), जनरेटिव AI और जियोपॉलिटिक्स रिस्क से जुड़ी नई चुनौतियों और अवसरों की पहचान कर सकती है. साथ ही, वे इन्हें प्रतिस्पर्धात्मक लाभ (कंपेटिटिव एडवांटेज) में बदलने में भी सक्षम नहीं हैं. जैसे-जैसे वैश्विक व्यावसायिक परिदृश्य बदल रहा है, बोर्ड का एकजुट रहना, नेतृत्व के साथ तालमेल बिठाना और नई चुनौतियों का सामना करने के लिए नवीन रणनीतियां अपनाना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है.  

प्रभावी गवर्नेंस, जो दूरदृष्टि और स्थिरता (रेजिलियंस) को अपनाए, इन बाधाओं को अवसरों में बदलने की कुंजी होगी. इससे व्यवसाय न केवल जीवित रहेंगे बल्कि एक अस्थिर दुनिया में फल-फूल भी सकेंगे. INSEAD कॉरपोरेट गवर्नेंस सेंटर की कार्यकारी निदेशक सोनिया टाटर ने कहा, "आज के बोर्ड रिएक्टिव होने से प्रोएक्टिव बनने से लाभ उठा सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि "बोर्ड को सिर्फ समस्याओं को समझने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भविष्य की चुनौतियों और संभावित जोखिमों की पहचान कर, उभरते रुझानों को अवसरों में बदलने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. सोनिया टाटर के अनुसार, जब बोर्ड अपने विचारों को रणनीतिक कार्यों में बदलते हैं, तो वे कंपनियों को अधिक मजबूत और बदलावों का प्रभावी तरीके से सामना करने में बेहतर दिशा दे सकते हैं. 

जेरमी हैनसन, जो हीड्रिक एंड स्ट्रगल्स में पार्टनर हैं, ने कहा, "यह देखना अच्छा है कि बोर्ड सस्टेनेबिलिटी पर काम कर रहे हैं. लेकिन इस साल की रिपोर्ट दिखाती है कि निदेशकों और प्रबंधन के बीच यह तनाव बना हुआ है कि कौन बदलावों का सामना करने में अधिक सक्षम है. उन्होंने कहा कि आज के जटिल माहौल में, जहां सबकुछ दांव पर है, बोर्ड और प्रबंधन के बीच तालमेल केवल एक अच्छी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आज और भविष्य की चुनौतियों को सुलझाने के लिए बेहद जरूरी है. हालांकि, हैनसन ने यह भी कहा कि तालमेल का मतलब यह नहीं है कि बोर्ड को प्रबंधन के साथ जरूरी चर्चाओं और मतभेदों से बचना चाहिए. खुले और कठिन मुद्दों पर चर्चा करना बहुत जरूरी है ताकि बोर्ड आज के मुश्किल माहौल में मजबूत और संतुलित फैसले ले सके.

डेविड यंग, जो BCG में मैनेजिंग डायरेक्टर और सीनियर पार्टनर हैं, ने कहा, "बोर्ड भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, तकनीक में तेज बदलाव और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच नई और जटिल चुनौतियों का सामना कर रहे हैं." उन्होंने यह भी जोड़ा कि बोर्ड ने स्थिरता से जुड़े मुद्दों को हल करने में अच्छा काम किया है. अब उनके पास इस अनुभव से सीखने और नेतृत्व के साथ गहरी चर्चा करने का मौका है ताकि वे नई और बढ़ती चुनौतियों का सामना कर सकें.
 


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