✕

होम / बिजनेस / भारत के रनिंग बाजार में विस्तार की तैयारी, डेकाथलॉन का 2030 तक ₹1,000 करोड़ कारोबार का लक्ष्य

भारत के रनिंग बाजार में विस्तार की तैयारी, डेकाथलॉन का 2030 तक ₹1,000 करोड़ कारोबार का लक्ष्य

50 लाख सक्रिय रनर्स तक पहुंचने की रणनीति, इस साल KIPRUN के 35 नए प्रोडक्ट होंगे लॉन्च

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 57 minutes ago

भारत में रनिंग के बढ़ते चलन और रनिंग इवेंट्स की बढ़ती संख्या के बीच डेकाथलॉन स्पोर्ट्स इंडिया ने अपने रनिंग सब-ब्रांड KIPRUN by Decathlon के विस्तार की रणनीति सामने रखी है. कंपनी ने 2030 तक रनिंग सेगमेंट में ₹1,000 करोड़ से अधिक का कारोबार हासिल करने और अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के जरिए 50 लाख से अधिक सक्रिय रनर्स तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है. कंपनी का पोर्टफोलियो हाई-परफॉर्मेंस रनिंग शूज, अपैरल, हाइड्रेशन पैक्स, ट्रेल गियर और एक्सेसरीज को कवर करता है.

इस विस्तार को गति देने के लिए KIPRUN इस साल रनिंग सेगमेंट में 35 नए प्रोडक्ट पेश कर रहा है. इनमें 17 हाई-परफॉर्मेंस रनिंग शूज शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक, इन उत्पादों को अलग-अलग स्तर के रनर्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है. इसके साथ ही भविष्य के लिए नए उत्पादों की पाइपलाइन भी तैयार की जा रही है.

रनिंग बाजार में बड़ा बदलाव

डेकाथलॉन स्पोर्ट्स इंडिया के स्पोर्ट्स डायरेक्टर हैंस पीटर जेन्सन ने कहा कि भारत में रनिंग अब सिर्फ फिटनेस गतिविधि नहीं रह गई है, बल्कि इसमें बड़ा सांस्कृतिक बदलाव देखने को मिल रहा है. उनके मुताबिक, देश में हर साल करीब 2,000 रनिंग इवेंट आयोजित हो रहे हैं, जबकि 2016 में इनकी संख्या करीब 600 थी. यह बदलाव रनिंग के बढ़ते कम्युनिटी बेस और बाजार की संभावनाओं को दिखाता है.

उन्होंने कहा कि आज रनर्स केवल रेस में हिस्सा लेकर फिनिश लाइन पार करने तक सीमित नहीं हैं. वे अपने प्रदर्शन को बेहतर करने और व्यक्तिगत रिकॉर्ड सुधारने पर भी फोकस कर रहे हैं. इसके चलते रनिंग प्रोडक्ट्स में तकनीक और प्रदर्शन की मांग बढ़ रही है. जेन्सन के मुताबिक, ग्राहक अब सिर्फ कम कीमत वाले उत्पाद नहीं चाहते, बल्कि कीमत के साथ बेहतर तकनीक, वास्तविक वैल्यू और उच्च स्तर के प्रदर्शन की भी अपेक्षा कर रहे हैं.

2030 तक 50 लाख रनर्स तक पहुंचने की रणनीति

जेन्सन ने कहा कि KIPRUN डेकाथलॉन की भारत में दीर्घकालिक मल्टी-स्पोर्ट रणनीति का प्रमुख हिस्सा है. कंपनी का लक्ष्य 2030 तक ₹1,000 करोड़ से अधिक का रनिंग कारोबार और 50 लाख से अधिक सक्रिय रनर्स तक पहुंच बनाना है.

उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी केवल उत्पादों के विस्तार पर निर्भर नहीं है, बल्कि परफॉर्मेंस फुटवियर में इनोवेशन के साथ स्टोर्स और डिजिटल चैनलों पर विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के जरिए ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दे रही है.

KIPRUN की शुरुआत रनिंग कम्युनिटी से

कंट्री स्पोर्ट्स लीडर-रनिंग, डेकाथलॉन स्पोर्ट्स इंडिया, ब्रूनो अराउजो ने कहा कि KIPRUN की शुरुआत खुद रनिंग कम्युनिटी से हुई है. उन्होंने बताया कि “Keep on Running” के संदेश से KIPRUN नाम सामने आया. ब्रूनो के मुताबिक, ब्रांड का उद्देश्य हर उम्र और स्तर के रनर्स को रनिंग जारी रखने, अपनी क्षमता को पहचानने और बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करना है.

उन्होंने कहा कि KIPRUN का लक्ष्य भारत में रनर्स के लिए पहला डेस्टिनेशन बनना है. ब्रांड पहली बार 5 किलोमीटर रनिंग शुरू करने वाले लोगों से लेकर हाफ मैराथन की तैयारी करने वाले और हाई-परफॉर्मेंस रनिंग करने वाले रनर्स की जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान दे रहा है. “More Runs, More Life” की सोच के तहत कंपनी रनर्स की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी स्पोर्ट्स गियर उपलब्ध कराने और रनिंग कम्युनिटी के विकास में योगदान देने पर जोर दे रही है.

बढ़ती रनर डिमांड पर हाई-परफॉर्मेंस फुटवियर का फोकस

ब्रूनो ने कहा कि आज भारतीय रनर्स का लक्ष्य केवल फिनिश लाइन पार करना नहीं है. वे अपनी सीमाओं को चुनौती दे रहे हैं और व्यक्तिगत रिकॉर्ड बेहतर करने पर ध्यान दे रहे हैं. इसके चलते उन्नत तकनीक वाले रनिंग प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है, लेकिन रनर्स इन उत्पादों के लिए उचित और पारदर्शी कीमत भी चाहते हैं. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए KIPRUN अपने हाई-परफॉर्मेंस रनिंग शूज का विस्तार कर रहा है.

नए टॉप रेसिंग मॉडल को पेश करते हुए उन्होंने कहा कि परफॉर्मेंस लंबे समय की रिसर्च और डेवलपमेंट का परिणाम है. उन्होंने बताया कि इससे पहले KIPRUN KD900X LD Plus को ओलंपिक स्तर के प्रदर्शन को ध्यान में रखकर विकसित किया गया था. कंपनी के मुताबिक, उसकी एथलीट और एंबेसडर मेलानी रोल ने 2024 में इसी जूते का इस्तेमाल करते हुए फ्रेंच मैराथन रिकॉर्ड तोड़ा और ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था. कंपनी के एक अन्य एथलीट जिमी ग्रासिया ने भी इसी जूते के साथ यूरोपियन हाफ मैराथन खिताब जीता था.

ब्रूनो के मुताबिक, नए जूते को एथलीट टेस्टिंग और बायोमैकेनिकल विश्लेषण के आधार पर विकसित किया गया है. इसका उद्देश्य उन रनर्स को डायनैमिक परफॉर्मेंस देना है जो अपने रिकॉर्ड को बेहतर करना चाहते हैं.

कुशनिंग और एनर्जी रिटर्न में सुधार

ब्रूनो ने बताया कि नए मॉडल में तीन प्रमुख तकनीकी बदलाव किए गए हैं. इनमें FAST-TECH तकनीक शामिल है, जिसमें डुअल-डेंसिटी मिडसोल का इस्तेमाल किया गया है. कंपनी के मुताबिक, इसे रनिंग के दौरान सॉफ्ट और डायनैमिक अनुभव देने के लिए डिजाइन किया गया है.

कंपनी ने अपनी पिछली टॉप-रेंज शू KD900X LD Plus की तुलना में नए मॉडल की कुशनिंग में 25 फीसदी और एनर्जी रिटर्न में 21 फीसदी सुधार का दावा किया है. इसमें पेटेंटेड कार्बन प्लेट स्ट्रक्चर भी दिया गया है, जो मेटाटार्सल के फ्लेक्सन को कम करने और रनिंग इकॉनमी को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. रनिंग इकॉनमी का मतलब समान गति और दूरी के लिए कम ऊर्जा खर्च करना है.

इसके अलावा, जूते में रेस रनिंग के लिए प्रीमियम 3D अपर मेश दिया गया है और इसका कुल वजन 216 ग्राम है. इसमें 64 मिलीमीटर का हील भी है, जिसे कंपनी के मुताबिक लैंडिंग को आसान बनाने और पैर को अगले स्टेप में तेजी से ट्रांजिशन करने के लिए डिजाइन किया गया है.

ब्रूनो ने कहा कि किसी भी तकनीक की असली परीक्षा सड़क पर रनिंग के दौरान होती है. इसी वजह से कंपनी ने एलीट टेस्टर्स से पूछा कि क्या वे 2026 में किसी रेस के दौरान इस जूते को भरोसे के साथ पहनेंगे. कंपनी के मुताबिक, 100 फीसदी एलीट टेस्टर्स ने इसका जवाब ‘हां’ में दिया.

उन्होंने कहा कि यह जूता उन रनर्स के लिए तैयार किया गया है जो अपनी सीमाओं को चुनौती देना, रिकॉर्ड बेहतर करना और पर्सनल बेस्ट हासिल करना चाहते हैं. उनके मुताबिक, एलीट स्तर के लिए विकसित तकनीक को अब अधिक रनर्स, खासकर भारत में रनर्स के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है.

2,000 से ज्यादा रनिंग इवेंट्स का बाजार

ब्रूनो ने कहा कि भारत में रनिंग तेजी से एक कम्युनिटी आधारित गतिविधि बन रही है. उनके मुताबिक, 2025 में देश में 2,000 से अधिक रनिंग इवेंट आयोजित हुए, जबकि 2016 में इनकी संख्या करीब 600 थी. उनके अनुसार, यह केवल एक अस्थायी ट्रेंड नहीं, बल्कि भारत में रनिंग से जुड़ा बड़ा सांस्कृतिक बदलाव है.

उन्होंने कहा कि रनर्स की अपेक्षाएं भी लगातार बढ़ रही हैं. अब लोग केवल इवेंट में हिस्सा लेने या सर्टिफिकेट हासिल करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बेहतर प्रदर्शन, तकनीकी उत्पाद और अपने व्यक्तिगत रिकॉर्ड में सुधार पर भी ध्यान दे रहे हैं. इसी बदलाव को देखते हुए KIPRUN शुरुआती रनर्स से लेकर हाई-परफॉर्मेंस रनिंग करने वालों तक के लिए उत्पाद और समाधान विकसित कर रहा है.

रनिंग गियर बाजार में बढ़ते अवसर

ब्रूनो अराउजो ने भारत में रनिंग से जुड़े उत्पादों के बड़े बाजार की ओर भी ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि रनिंग शूज, अपैरल और एक्सेसरीज को मिलाकर भारतीय बाजार करीब ₹20,000 करोड़ का है, जबकि घड़ियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने 2024 के संदर्भ में करीब ₹40,000 करोड़ के बाजार का भी उल्लेख किया. उनके मुताबिक, रनिंग में बढ़ती भागीदारी और रनर्स की बदलती जरूरतों के साथ इस बाजार में तकनीकी और हाई-परफॉर्मेंस उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है.

वहीं, IMARC Group के अनुसार, भारत का रनिंग गियर बाजार 2025 में 2.5 अरब डॉलर से बढ़कर 2026 में 2.7 अरब डॉलर हो गया है और 2034 तक इसके 4.9 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. एडवांस्ड कुशनिंग, रिस्पॉन्सिव फोम टेक्नोलॉजी और कार्बन-इन्फ्यूज्ड फुटवियर जैसी तकनीकों की बढ़ती मांग भी इस सेगमेंट के विस्तार को प्रभावित कर रही है.

डेकाथलॉन के मुताबिक, रनिंग बाजार में बढ़ती तकनीकी मांग को देखते हुए KIPRUN अपने हाई-परफॉर्मेंस पोर्टफोलियो का विस्तार कर रहा है. कंपनी का फोकस पहली बार रनिंग शुरू करने वालों से लेकर व्यक्तिगत रिकॉर्ड बेहतर करने वाले एलीट रनर्स तक अलग-अलग उपभोक्ता वर्गों की जरूरतों को पूरा करने पर है.

डेकाथलॉन की मल्टी-स्पोर्ट रणनीति में रनिंग अहम

जेन्सन के मुताबिक, डेकाथलॉन की मल्टी-स्पोर्ट रणनीति के तहत कंपनी करीब 60 खेलों को कवर करती है. दुनिया भर में कंपनी के पास करीब 1,400 इंजीनियर और 300 डिजाइनर हैं, जबकि 700 से अधिक पेटेंट उसके तकनीकी उत्पाद विकास का हिस्सा हैं. उन्होंने कहा कि भारत में युवा आबादी, बढ़ती खेल सुविधाओं, स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और रनिंग इवेंट्स के विस्तार से स्पोर्ट्स बाजार के लिए नए अवसर बन रहे हैं. उन्होंने कहा कि रनिंग इस बदलाव का एक प्रमुख हिस्सा है और आने वाले वर्षों में यह डेकाथलॉन के लिए कारोबार की वृद्धि का महत्वपूर्ण सेगमेंट बना रहेगा.

 


टैग्स India’s running market
सम्बंधित खबरें

मिठाई के डिब्बे से पर्सनलाइज्ड तोहफों तक, बदल रही फेस्टिव गिफ्टिंग की तस्वीर

प्रीमियम चॉकलेट, स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद, स्मार्ट उपकरण और अनुभव आधारित उपहारों की बढ़ती मांग; छोटे शहरों तक पहुंचा महंगे और व्यक्तिगत उपहारों का चलन

4 hours ago

MCX को-लोकेशन: SEBI बना युधिष्ठिर

नियामक का कहना है कि उसने MCX को अपने ट्रेडिंग इंजन को एक अमेरिकी स्वामित्व वाले डेटा सेंटर में ले जाने की "कोई अनुमति नहीं" दी. उसका यह भी कहना है कि उसे इसकी जानकारी दी गई थी. इन दोनों बयानों के बीच वह सब कुछ है जो भारत NSE से सीखने में विफल रहा.

4 hours ago

जब बोर्डरूम बन जाए ब्रांडरूम: टाटा ब्रांड की रक्षा कौन करेगा?

इतने मजबूत तरीके से भरोसे से जुड़े समूह के लिए बड़ा सवाल यह है कि क्या लंबे समय तक बनी रहने वाली अनिश्चितता अंततः व्यापक टाटा समूह को लेकर धारणाओं को प्रभावित कर सकती है, लिखते हैं डॉ. अनुराग बत्रा

6 hours ago

REIT-InvIT में बढ़ेगा निवेश, 5 साल में दोगुना हो सकता है AUM, ₹20 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान

ICRA के मुताबिक, वित्त वर्ष 2030-31 तक InvIT और REIT का संयुक्त AUM करीब ₹20 लाख करोड़ हो सकता है. सड़क, रिन्यूएबल एनर्जी, वेयरहाउसिंग और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर इस वृद्धि को रफ्तार दे सकते हैं.

9 hours ago

भारत-CARICOM बैठक में व्यापार और जलवायु सहयोग पर चर्चा, UNSC की 2028-29 अवधि के लिए भारत को समर्थन

विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में राजनीतिक संबंधों के साथ व्यापार और निवेश, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, डिजिटल गवर्नेंस, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता और ऊर्जा सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रहे.

11 hours ago


बड़ी खबरें

जब बोर्डरूम बन जाए ब्रांडरूम: टाटा ब्रांड की रक्षा कौन करेगा?

इतने मजबूत तरीके से भरोसे से जुड़े समूह के लिए बड़ा सवाल यह है कि क्या लंबे समय तक बनी रहने वाली अनिश्चितता अंततः व्यापक टाटा समूह को लेकर धारणाओं को प्रभावित कर सकती है, लिखते हैं डॉ. अनुराग बत्रा

6 hours ago

MCX को-लोकेशन: SEBI बना युधिष्ठिर

नियामक का कहना है कि उसने MCX को अपने ट्रेडिंग इंजन को एक अमेरिकी स्वामित्व वाले डेटा सेंटर में ले जाने की "कोई अनुमति नहीं" दी. उसका यह भी कहना है कि उसे इसकी जानकारी दी गई थी. इन दोनों बयानों के बीच वह सब कुछ है जो भारत NSE से सीखने में विफल रहा.

4 hours ago

REIT-InvIT में बढ़ेगा निवेश, 5 साल में दोगुना हो सकता है AUM, ₹20 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान

ICRA के मुताबिक, वित्त वर्ष 2030-31 तक InvIT और REIT का संयुक्त AUM करीब ₹20 लाख करोड़ हो सकता है. सड़क, रिन्यूएबल एनर्जी, वेयरहाउसिंग और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर इस वृद्धि को रफ्तार दे सकते हैं.

9 hours ago

भारत के रनिंग बाजार में विस्तार की तैयारी, डेकाथलॉन का 2030 तक ₹1,000 करोड़ कारोबार का लक्ष्य

50 लाख सक्रिय रनर्स तक पहुंचने की रणनीति, इस साल KIPRUN के 35 नए प्रोडक्ट होंगे लॉन्च

57 minutes ago

मिठाई के डिब्बे से पर्सनलाइज्ड तोहफों तक, बदल रही फेस्टिव गिफ्टिंग की तस्वीर

प्रीमियम चॉकलेट, स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद, स्मार्ट उपकरण और अनुभव आधारित उपहारों की बढ़ती मांग; छोटे शहरों तक पहुंचा महंगे और व्यक्तिगत उपहारों का चलन

4 hours ago