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कोरोना के चलते GDP में आया सूखा होगा खत्म, चालू वित्त वर्ष में इतनी हो सकती है ग्रोथ
डेलॉयट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि वित्त वर्ष 2021 जब समाप्त होने को था तब ओमिक्रॉन और यूक्रेन संकट से इकोनॉमी पर असर पड़ा था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः कोरोना के कारण पिछले दो सालों से इकोनॉमी, जीडीपी के फ्रंट पर सूखा साबित हो रही थी. हालांकि रेटिंग एजेंसी Deloitte की यह रिपोर्ट जीडीपी में आए सूखे को खत्म करने जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के 7.1 फीसदी से 7.6 फीसदी तक ग्रोथ करने के आसार हैं. हालांकि कुछ समय तक महंगाई और सप्लाई चेन में अवरोध उत्पन्न रह सकता है.
ओमिक्रॉन और यूक्रेन संकट का पड़ा असर
डेलॉयट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि वित्त वर्ष 2021 जब समाप्त होने को था तब ओमिक्रॉन और यूक्रेन संकट से इकोनॉमी पर असर पड़ा था. तब एक बार को फिर से लग रहा था कि भारतीय इकोनॉमी ने जो रफ्तार पकड़ी है वो एक बार फिर से नीचे की तरफ चली जाएगी. इससे महंगाई बढ़ गई, सप्लाई पर असर पड़ा और विश्व को एक नए संकट की तरफ जाते हुए देखा गया, जिसका अंत जल्दी नहीं दिख रहा था.
भारत बना रहेगा तेजी से बढ़ती इकोनॉमी वाला देश
रिपोर्ट में कहा गया है कि, ''भारत की इकोनॉमी के 2022-23 में 7.1-7.6 फीसदी और 2023-24 में 6-6.7 फीसदी से बढ़ने की उम्मीद है. इससे यह सुनिश्चित होगा की भारत अगले कुछ वर्षों में विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में आकर के ग्लोबल डेवलपमेंट को गति प्रदान करेगा.''
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मार्च 2023 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी की वृद्धि दर 7.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है.
रुपये में बनी रहेगी कमजोरी
रिपोर्ट में रुपये के कमजोर होने के बारे में भी कहा गया है. इसके मुताबिक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अगले साल की शुरुआत से पहले तक कमजोर बना रहेगा और ये फिर थोड़ा सा संभलेगा. भारत की अपेक्षाकृत मजबूत रिकवरी और वैश्विक मंदी से भारतीय रुपये की मजबूती में सुधार होगा. बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 3 पैसे की गिरावट के साथ 79.62 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था
डेलॉयट इंडिया की इकोनॉमिस्ट रुमकी मजूमदार ने कहा, "मुश्किल समय के दौरान अधिक लचीला और कम लागत वाले निवेश और एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन की तलाश करने के लिए वैश्विक व्यवसायों की इच्छा भारत के पक्ष में काम कर सकती है. " रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ग्लोबल बिजनेस ईकोसिस्टम में जारी अनिश्चितता जोखिम पैदा करेगी.
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