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जिंदगी का 5% हिस्सा ऑफिस पहुंचने में खर्च कर रहे हैं बेंगलुरु, हैदराबाद और NCR के GCC प्रोफेशनल्स: रिपोर्ट
भारत वैश्विक कंपनियों के लिए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) स्थापित करने वाले वैश्विक उद्यमों के लिए अग्रणी गंतव्य के रूप में उभरा है, जहां पिछले पांच वर्षों में केंद्रों की संख्या में 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
MoveInSync की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु, हैदराबाद और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में कार्यरत GCC वर्कफोर्स अपने जीवन का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा ऑफिस आने-जाने में खर्च करता है. यह रिपोर्ट 2025 की पहली तिमाही के कम्यूट डेटा पर आधारित है और यह दिखाती है कि कर्मचारियों को आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए बेहतर सफर समाधान कितने जरूरी हैं.
GCC के विकास में भारत अग्रणी
भारत में GCCs की सबसे अधिक संख्या वाले शहरों में बेंगलुरु, हैदराबाद और एनसीआर प्रमुख हैं, जिनका क्रमशः 30%, 14% और 16% का योगदान है. MoveInSync के सीईओ और सह-संस्थापक दीपेश अग्रवाल ने कहा, जैसे-जैसे GCCs भारत में विस्तार कर रहे हैं, किफायती और बेहतर कम्यूट सॉल्यूशंस की जरूरत भी बढ़ रही है. राज्य सरकार की GCC नीतियाँ जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर और अन्य जरूरतों को पूरा करती हैं. वहीं, एक सुरक्षित और प्रभावी सफर का समाधान भी अब उतना ही जरूरी हो गया है.
शहरों में GCCs की वृद्धि
- बेंगलुरु में 2019 से 2024 के बीच GCCs में 41% की वृद्धि दर्ज की गई.
- हैदराबाद में यह वृद्धि 54% रही.
- एनसीआर में 6% की बढ़ोतरी देखी गई.
प्रमुख सेक्टरों में BFSI (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा), इंटरनेट टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्रियल्स और एनर्जी शामिल हैं.
कम्यूट पैटर्न और समय
- बेंगलुरु में कर्मचारी औसतन सप्ताह में 2–3 दिन ऑफिस जाते हैं और 15 किमी की दूरी तय करने में लगभग 50 मिनट** का समय लेते हैं.
- हैदराबाद में यह दूरी 16 किमी और समय 45 मिनट है.
- एनसीआर में कर्मचारी 22 किमी की दूरी तय करने में औसतन 55 मिनट लगाते हैं और सप्ताह में 3 दिन ऑफिस जाते हैं.
बेंगलुरु के टेक कॉरिडोर फैले हुए हैं, जिससे सफर लंबा होता है, जबकि हैदराबाद में ऑफिस मुख्य रूप से कुछ केंद्रों में केंद्रित हैं. एनसीआर में कई कर्मचारी राज्य की सीमाएं पार करके लंबी दूरी तय करते हैं.
ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा
GCC कंपनियाँ अब इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और राइड शेयरिंग को अपनाकर कार्बन उत्सर्जन घटाने पर जोर दे रही हैं. इससे न सिर्फ पर्यावरण को लाभ हो रहा है, बल्कि रूट ऑप्टिमाइजेशन और प्रति व्यक्ति यात्रा लागत में भी कमी आ रही है.
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