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आखिर ऐसा क्या हुआ कि Wilmar Group से रिश्ता तोड़ना चाहते हैं गौतम अडानी?
अडानी समूह और विल्मर के जॉइंट वेंचर का नाम अडानी विल्मर है. ये कंपनी खाने के तेल से लेकर चावल-दाल तक बेचती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
कारोबारी दुनिया में इस बात की चर्चा है कि आखिर गौतम अडानी (Gautam Adani) सिंगापुर के विल्मर ग्रुप (Wilmar Group) के साथ अपना रिश्ता क्यों तोड़ना चाहते हैं. अडानी समूह और विल्मर ग्रुप की पार्टनरशिप में अडानी विल्मर (Adani Wilmar) अस्तित्व में आई थी. अब गौतम अडानी इस कंपनी में अपनी 44 प्रतिशत की हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं. Fortune ब्रैंड के तहत प्रोडक्ट बनाने वाली इस कंपनी में अडानी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Adani Enterprises Ltd) की हिस्सेदारी है.
तिमाही में हुआ घाटा
अडानी समूह (Adani Group) की तरफ से इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन माना जा रहा है कि ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से अडानी का इस जॉइंट वेंचर से मोह भंग हो गया है. उदाहरण के तौर पर Adani Wilmar की आर्थिक सेहत खास अच्छी नहीं है. कंपनी को जून तिमाही में 79 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है. कंपनी का कहना है कि खाने के तेल की कीमत में आई कमी और हाई-कॉस्ट इंवेंट्री के कारण उसे नुकसान का सामना करना पड़ा है. वहीं, स्टॉक मार्केट में भी Adani Wilmar का प्रदर्शन अच्छा नहीं चल रहा है. पिछले 5 दिनों में यह स्टॉक 4.97%, एक महीने में 1.98%, छह महीने में 10.68% और एक साल में 41.12% लुढ़क चुका है. जाहिर है इस तरह का प्रदर्शन अडानी समूह की छवि को प्रभावित करता है.
1999 में हुई थी स्थापना
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Adani Wilmar पर फोकस करने के बजाए अडानी अपने कोर बिजनेस पर ध्यान देना चाहते हैं, जहां ग्रोथ की संभावना काफी ज्यादा है. लिहाजा, इस जॉइंट वेंचर से अलग होने से अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को अपने कोर बिजनस के लिए पैसा मिल जाएगा. मौजूदा शेयर प्राइज के हिसाब से अडानी विल्मर में अडानी के शेयरों की कीमत करीब 2.7 अरब डॉलर के बराबर है. बता दें कि विल्मर सिंगापुर की कंपनी है, जिसकी स्थापना Martua Sitorus और Kuok Khoon Hong ने सन 1991 में की थी. जबकि अडानी एंटरप्राइजेज और विल्मर के बीच साझेदारी 1999 में हुई थी और इससे Adani Wilmar अस्तित्व में आई थी.
शुरू हो चुकी है बातचीत
मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अडानी समूह अपनी हिस्सेदारी बेचने को लेकर बातचीत शुरू कर चुका है. अडानी विल्मर शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी है. इसका आईपीओ पिछले साल आया था और इससे कंपनी ने करीब 36 अरब रुपए जुटाए थे. इस कंपनी में अडानी और विल्मर की कुल हिस्सेदारी 88% के करीब है. जबकि सेबी के नियम कहते हैं कि बड़ी कंपनियों में लिस्टिंग के पांच साल के भीतर कम से कम 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग होनी जरूरी है. Adani Wilmar खाने के तेल से लेकर आटा, चावल, दाल-चीनी तक बेचती है. भारत में इसका मुकाबला ITC और हिंदुस्तान यूनिलीवर से है.
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