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भारत में फ्रीज, विदेश में कर्ज: Ebix ने अपने ऑस्ट्रेलियाई कारोबार को 271 करोड़ रुपये में गिरवी रखा
भारत के प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Ebix को अपनी संपत्तियों पर कोई भी लियन (ग्रहणाधिकार) बनाने से मना किया था. BW की जांच से पता चला है कि अब Ebix की ऑस्ट्रेलियाई इकाई ने इन्हीं संपत्तियों के बदले 4.1 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का कर्ज लिया है. फ्रीज किए जाने के बाद गिरवी रखी गई Ebix की यह दूसरी संपत्ति है, जिसकी जानकारी सामने आई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
पलक शाह
कल्पना कीजिए कि अदालत ने आपके घर को फ्रीज कर दिया है. जब तक आपके मामले पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक आप उसे बेच नहीं सकते, किसी को उपहार में नहीं दे सकते और न ही गिरवी रख सकते हैं. अब कल्पना कीजिए कि आप इसके बावजूद किसी कर्जदाता के कार्यालय जाते हैं, घर को गिरवी रखते हैं और नकदी लेकर लौट आते हैं. यदि आप मुकदमा हार जाते हैं, तो सरकार घर अपने कब्जे में ले लेती है. लेकिन सबसे पहले कर्जदाता को भुगतान मिलता है. सरकार को जो बचता है, वही मिलता है.
सरल शब्दों में कहें तो महादेव बेटिंग ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED द्वारा फ्रीज की गई संपत्तियों के साथ अब दो बार ऐसा हो चुका है. ED ने दावा किया है कि नैस्डैक में सूचीबद्ध कंपनी Ebix को महादेव बेटिंग घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग या हवाला के पैसे से खरीदा गया था.
नया कर्ज
अमेरिका स्थित Ebix Inc की सहायक कंपनी Ebix Australia Pty Ltd ने सिडनी की निजी ऋण देने वाली कंपनी iPartners से 4.1 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 271 करोड़ रुपये) का वरिष्ठ सुरक्षित कर्ज लिया है. इससे पहले इस कर्ज की जानकारी सामने नहीं आई थी.
iPartners ने अपने निवेशक पोर्टल पर इस सौदे को “EBIX Australia Secured Corporate Loan (EBIX02)” के नाम से सूचीबद्ध किया है. लिस्टिंग के अनुसार:
यह कर्ज तीन साल के लिए है, जिसमें 34 महीने शेष हैं. इससे संकेत मिलता है कि इसकी शुरुआत अगस्त 2026 के आसपास हुई.
इसमें कर्जदाता को संपत्तियों पर “पहली प्राथमिकता” का अधिकार दिया गया है.
कर्ज और संपत्ति के मूल्य का अनुपात 30 प्रतिशत से कम है.
इस पर एक महीने की BBSW दर के साथ सालाना 5.50 प्रतिशत ब्याज दिया जाता है. iPartners के अनुसार, प्रभावी ब्याज दर 9.82 प्रतिशत है.
निवेशकों के लिए इस कर्ज की पेशकश बंद हो चुकी है.
सरल शब्दों में इसका क्या मतलब है?
“पहली प्राथमिकता” का मतलब है कि Ebix Australia की संपत्तियों पर दावा करने वालों की कतार में कर्जदाता सबसे आगे है. कर्ज और संपत्ति के मूल्य का अनुपात 30 प्रतिशत से कम होने का अर्थ है कि उन संपत्तियों का मूल्य कर्ज की रकम से तीन गुना से भी अधिक है. इससे कर्जदाता को काफी सुरक्षा मिलती है. भारतीय सरकार समेत किसी अन्य पक्ष का दावा उसके बाद आता है.
iPartners ने अपने निवेशकों के सामने कर्ज लेने वाली कंपनी को “एक परिपक्व, अत्यधिक नकदी प्रवाह वाला और बाजार में दबदबा रखने वाला InsurTech कारोबार” बताया. दूसरे शब्दों में, यह समूह के पास बची सबसे अच्छी संपत्तियों में से एक है.
ED ने क्या आदेश दिया था
5 जून, 2026 को ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने अनंतिम कुर्की आदेश संख्या 16/2026 जारी किया. इसके तहत ₹893 करोड़ मूल्य की उस शेयर हिस्सेदारी को कुर्क किया गया, जो विकास गर्ग की सूचीबद्ध कंपनी Eraaya Lifespaces (जिसका नाम बाद में बदलकर Ebix Ltd कर दिया गया) के पास Ebix Inc में है. इस आदेश में कंपनी के शेयरों के साथ-साथ “उक्त कंपनी की सभी संपत्तियों और निवेशों” को भी शामिल किया गया था.
इस आदेश की एक प्रति Ebix Inc के प्रमोटर और प्रबंध निदेशक को भी भेजी गई थी. इसमें निर्देश दिया गया था कि वे “M/s EBIX Inc और उसकी सहायक कंपनियों की संपत्तियों के संबंध में किसी भी बिक्री, हस्तांतरण, स्वामित्व में बदलाव, संशोधन या लियन बनाने आदि की अनुमति न दें.”
Ebix Australia, Ebix Inc की सहायक कंपनी है. उसकी संपत्तियों पर पहली प्राथमिकता वाला सुरक्षा अधिकार बनाना एक लियन है.
ED को इस तरह की आशंका पहले से थी. उसके आदेश में चेतावनी दी गई थी कि संपत्तियों को “तीसरे पक्ष के हित बनाने के लिए बेचा, हस्तांतरित या भारग्रस्त किया जा सकता है.” आदेश में Ebix की शेयर हिस्सेदारी को “तेजी से एक कंपनी से दूसरी कंपनी में हस्तांतरित किए जाने, गिरवी रखे जाने या उस पर भार बनाए जाने की आशंका वाला” बताया गया था.
यह सिलसिला
गर्ग को 14 जुलाई, 2026 को गिरफ्तार किया गया था. इसके तीन सप्ताह बाद, 4 अगस्त को Ebix Inc ने जॉर्जिया के जॉन्स क्रीक स्थित अपने 17 एकड़ के मुख्यालय, 1 Ebix Way, को 1.26 करोड़ अमेरिकी डॉलर के कर्ज के बदले Velocity Commercial Capital के पास गिरवी रख दिया था, जैसा कि BW ने पहले रिपोर्ट किया था. इस संपत्ति से संबंधित दस्तावेज जॉर्जिया के भूमि रिकॉर्ड में डीड बुक 70417 के तहत दर्ज है.
ऑस्ट्रेलिया में कर्ज की यह सुविधा भी इसी महीने शुरू हुई.
यह पूरा खेल कैसे काम करता है, इसे समझिए. भारत ने समूह के शीर्ष स्तर पर मौजूद शेयरों को फ्रीज कर दिया, जो भारत की सूचीबद्ध कंपनी के पास हैं. लेकिन वास्तविक संपत्तियां, इमारतें, सॉफ्टवेयर कारोबार और नकदी प्रवाह समूह की निचली इकाइयों में हैं, जो अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में स्थित हैं. भारत का फ्रीज करने का आदेश अपने आप जॉर्जिया के भूमि रजिस्ट्रार या सिडनी के किसी कर्जदाता पर लागू नहीं होता. विदेश में इसे लागू कराने के लिए भारत को संधियों के माध्यम से लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.
इस अंतराल में नीचे मौजूद संपत्तियों को एक-एक करके गिरवी रखकर कर्ज लिया जा सकता है. फ्रीज किए गए शेयर कागजों पर अब भी मौजूद रहते हैं. लेकिन पहली प्राथमिकता वाले हर नए कर्ज का मतलब है कि उन शेयरों से जुड़े कारोबार का मूल्य उन सभी के लिए कम हो जाता है, जो कर्जदाता के बाद दावा करते हैं. इसमें वह सरकार भी शामिल है, जो इन संपत्तियों को जब्त करने की कोशिश कर रही है.
सितंबर में रायपुर में दायर अपनी पूरक अभियोजन शिकायत में ED ने अदालत को बताया कि कुर्की आदेश के बाद गर्ग ने ब्रोकर Cresa के जरिए जॉर्जिया स्थित परिसर को “बेचने की कोशिश की” और इसे “अपराध से अर्जित आय को ठिकाने लगाने” का जानबूझकर किया गया प्रयास बताया. इस शिकायत में अमेरिका में संपत्ति पर लिए गए कर्ज या ऑस्ट्रेलिया के कर्ज का उल्लेख नहीं है.
पैसा कहां जा रहा है
Ebix Australia लंबे समय से समूह की अपेक्षाकृत मजबूत इकाइयों में से एक रही है. जब Eraaya ने 2024 में इसका अधिग्रहण पूरा किया था, तब इसके तत्कालीन प्रबंध निदेशक दिवंगत लियोन डी'एपिस ने कहा था, “ऑस्ट्रेलियाई कारोबार लाभदायक और मजबूत बना हुआ है.” अब इसका नेतृत्व फिलिप फूरी कर रहे हैं.
मूल कंपनी की स्थिति कहीं अधिक खराब है. Eraaya ने सितंबर 2025 को समाप्त तिमाही के लिए 326 करोड़ रुपये का समेकित घाटा दर्ज किया था और उसकी समेकित नेटवर्थ नकारात्मक हो गई थी.
कंपनी के वित्तीय मामलों की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने BW को बताया कि यह कर्ज ऑस्ट्रेलियाई कर कार्यालय (ATO) के बकाया भुगतान को चुकाने के लिए लिया गया था. ये बकाया एक कर समझौते के तहत चुकाए जाने थे. उस समझौते ने यह सीमा तय कर दी थी कि Ebix Australia विदेश में स्थित समूह की अन्य कंपनियों को कितना पैसा भेज सकती है. व्यक्ति के अनुसार, ATO को भुगतान किए जाने के बाद ऑस्ट्रेलिया से नकदी Ebix की भारत और अमेरिका में घाटे में चल रही इकाइयों तक पहुंच सकती थी.
शॉर्ट सेलर Viceroy Research ने 2018 में अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ATO कम से कम 2016 से Ebix का ऑडिट कर रहा था.
यदि यह जानकारी सही है, तो समूह के सबसे मजबूत कारोबार को गिरवी रखकर कर्ज लिया गया, ताकि उसकी नकदी कमजोर इकाइयों तक पहुंचाई जा सके. समूह के भीतर इस तरह पैसे का हस्तांतरण रोकना ही ED के आदेश का उद्देश्य था.
चुप्पी
BW को सूचीबद्ध मूल कंपनी Ebix Ltd की ओर से Ebix Australia के इस कर्ज के संबंध में कोई सार्वजनिक खुलासा नहीं मिला. ED ने शेयरों को फ्रीज कर दिया. लेकिन उनके नीचे मौजूद संपत्तियों को एक-एक करके अलग-अलग देशों में गिरवी रखा जा रहा है.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और द मार्केट माफिया: क्रॉनिकल ऑफ इंडियाज हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री तथा द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री के निडर लेखक हैं. उनकी चर्चित खोजपरक रिपोर्टिंग ने भारत के वित्तीय बाजारों के अंधेरे पक्ष को उजागर किया है.
मुंबई में करीब दो दशकों तक जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करने वाले पलक ने धन, सत्ता और नियमन के बीच के संबंधों की गहराई से पड़ताल करके अपनी पहचान बनाई है. उनकी रिपोर्टें भारत के प्रमुख वित्तीय समाचार पत्रों और प्रकाशनों, जिनमें द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन शामिल हैं, में प्रकाशित हुई हैं. उनकी पैनी रिपोर्टिंग ने कई अहम मुद्दों पर विमर्श को आकार दिया है और कॉरपोरेट जगत में हलचल पैदा की है.
19 वर्ष की उम्र में अपराध पत्रकारिता की ओर आकर्षित हुए पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक में मुंबई में होने वाले गैंगवार की जगह संगठित अपराध के अधिक आधुनिक और जटिल रूप ने ले ली है. अब कॉरपोरेट इमारतों के भीतर सफेदपोश अपराध की योजनाएं बनाई जा रही थीं. इसी अनुभव ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने भारत की 'सफेद धन' वाली अर्थव्यवस्था की जटिल कार्यप्रणाली को समझने में वर्षों बिताए.
शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, पलक का काम उच्च वित्तीय जगत की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को उजागर करता है, जो पर्दे के पीछे से व्यवस्था को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे लोग नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें भारतीय पत्रकारिता की एक मजबूत आवाज बनाती है. वे यथास्थिति को चुनौती देने और खुद को कानून से ऊपर समझने वाले लोगों को बेनकाब करने से नहीं हिचकते.)
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