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भारत-जापान के बीच 50 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य पर BW Businessworld की खास पेशकश
31 अक्टूबर के विशेष अंक में निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक और नेतृत्व के जरिए द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी के अगले चरण की संभावनाओं पर फोकस
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
BW Businessworld के 31 अक्टूबर, 2026 के अंक में भारत और जापान के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी और दशकों से कायम रणनीतिक विश्वास को गहरे कारोबारी सहयोग में बदलने की संभावनाओं पर चर्चा की गई है. पत्रिका की इस विशेष पेशकश में बताया गया है कि किस तरह जापान की पूंजी, तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग विशेषज्ञता भारत के बड़े बाजार, प्रतिभा और उद्यमशीलता के साथ मिलकर विभिन्न उद्योगों में नए अवसर पैदा कर रही है.
इस विशेष कवरेज में एसोचैम (Assocham) के अनुमान के मुताबिक, 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने की संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है. इसके साथ ही इस वृद्धि को गति देने के लिए जरूरी निवेश और क्षमताओं पर भी फोकस किया गया है. इसमें ऑटोमोबाइल क्षेत्र में पहले से स्थापित साझेदारियों से लेकर एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वच्छ ऊर्जा और नई पीढ़ी की मोबिलिटी तक सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया गया है.
27.5 अरब डॉलर के पार पहुंचा द्विपक्षीय व्यापार
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और जापान के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 27.5 अरब डॉलर रहा. वहीं, अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत में जापान से कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का इक्विटी प्रवाह 48.14 अरब डॉलर रहा. इसके साथ जापान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत बन गया है.
दोनों देशों ने 2035 तक के दशक में भारत में 10 लाख करोड़ येन के जापानी निजी निवेश का लक्ष्य भी निर्धारित किया है. यह लक्ष्य भारत में जापानी कंपनियों की दीर्घकालिक कारोबारी संभावनाओं और निवेश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
भारत में 1,500 जापानी कंपनियों की मौजूदगी
भारत में लगभग 1,500 जापानी कंपनियां और करीब 5,000 कारोबारी प्रतिष्ठान मौजूद हैं. इन कंपनियों के नेटवर्क में सप्लायर, इंजीनियर, कुशल कर्मचारी और वितरण से जुड़े साझेदार शामिल हैं. BW Businessworld की विशेष रिपोर्ट में इस बात का विश्लेषण किया गया है कि ये कंपनियां भारत में स्थानीय क्षमताओं को मजबूत करने के साथ देश को मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और निर्यात के केंद्र के रूप में विकसित करने में किस तरह योगदान दे रही हैं.
ऑटोमोबाइल सेक्टर में सहयोग पर विशेष फोकस
ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़ी रिपोर्ट में मारुति सुजुकी, टोयोटा, ब्रिजस्टोन, इसुजु और निसान के विचारों को शामिल किया गया है. इसमें स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन, सप्लायर नेटवर्क के विकास, बदलती मोबिलिटी जरूरतों और गुणवत्ता व ग्राहक विश्वास की भूमिका पर चर्चा की गई है.
यह कवरेज बताता है कि किस तरह मजबूत कारोबारी साझेदारियां लंबे समय तक टिकाऊ व्यवसाय खड़े करने में मदद करती हैं. साथ ही, स्थानीय उत्पादन और वैश्विक मानकों के बीच तालमेल स्थापित करने की जरूरत को भी रेखांकित किया गया है.
मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च में बढ़ता सहयोग
ऑटोमोबाइल क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए इस अंक में डाइकिन के मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च संबंधी निवेश, पैनासोनिक की जापानी गुणवत्ता को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप काम करने की क्षमता के साथ जोड़ने की रणनीति और हिताची एनर्जी के इंजीनियरिंग व प्रतिभा विकास पर जोर का विश्लेषण किया गया है.
इन कंपनियों से जुड़ी रिपोर्ट बताती हैं कि भारत-जापान साझेदारी का दायरा लगातार बढ़ रहा है. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में भारतीय टीमों की जिम्मेदारियां और भूमिका भी मजबूत हो रही हैं.
वैश्विक कारोबार में भारतीय नेतृत्व की बढ़ती भूमिका
इस विशेष पेशकश का एक प्रमुख विषय भारतीय नेतृत्व है. इसमें बताया गया है कि किस तरह भारतीय अधिकारी, इंजीनियर और कर्मचारी वैश्विक विशेषज्ञता को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढाल रहे हैं. वे उत्पादों और प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के साथ ऐसी क्षमताएं विकसित कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल भारत के बाहर के बाजारों में भी किया जा सकता है.
साझेदारी की राह में चुनौतियां भी अहम
भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी की पूरी क्षमता हासिल करने के लिए नियामकीय व्यवस्था में अधिक स्पष्टता और स्थिरता, परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना, मजबूत सप्लायर नेटवर्क तैयार करना और कौशल विकास में लगातार निवेश करना जरूरी होगा. जापान के साथ भारत का बड़ा व्यापार घाटा भी इस बात की ओर इशारा करता है कि भारतीय निर्यात में विविधता लाने और जापानी बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने की जरूरत है.
BW Businessworld के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा, “अंततः इस साझेदारी की सफलता का आकलन इससे पैदा होने वाली नौकरियों की गुणवत्ता, विकसित होने वाली विशेषज्ञता और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनने वाले व्यवसायों के आधार पर किया जाएगा.”
भारत-जापान साझेदारी पर विशेष कवरेज के अलावा, 31 अक्टूबर के इस अंक में विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार को प्रभावित करने वाले रुझानों पर विशेषज्ञों के लेख और विस्तृत रिपोर्ट भी शामिल हैं
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