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अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बावजूद भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 15.5% बढ़ा, 9.97 अरब डॉलर पर पहुंचा
भारत के कुल निर्यात में इंजीनियरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 27-28% है. वहीं, देश से निर्यात होने वाले कुल विनिर्मित उत्पादों में इसका योगदान लगभग 40% है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
अमेरिका के भारी टैरिफ के बावजूद भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग में मजबूती बनी हुई है. अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान अमेरिका को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात सालाना आधार पर 15.5% बढ़कर 9.97 अरब डॉलर पर पहुंच गया. अगस्त में निर्यात में 31% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. भारतीय निर्यातकों ने अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखने के साथ चीन, ब्रिटेन और यूरोप के दूसरे बाजारों में भी कारोबार बढ़ाया है.
भारत के कुल निर्यात में इंजीनियरिंग सेक्टर की 28% हिस्सेदारी
भारत के कुल निर्यात में इंजीनियरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 27-28% है. वहीं, देश से निर्यात होने वाले कुल विनिर्मित उत्पादों में इसका योगदान लगभग 40% है. इस सेक्टर में स्टील, धातु उत्पाद, मशीनरी, वाहन, ऑटो पार्ट्स, रक्षा उपकरण और विमान के पुर्जे शामिल हैं.
पिछले साल अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के बाद इस सेक्टर के निर्यात पर दबाव पड़ा था. सितंबर-अक्टूबर 2025 के दौरान निर्यात में दोहरे अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी. हालांकि, भारतीय कंपनियों ने नए कारोबारी रास्ते तलाशने और अमेरिकी ग्राहकों के साथ मिलकर लागत का बोझ उठाने जैसी रणनीतियों के जरिए स्थिति को संभाला.
अमेरिकी सप्लाई चेन में भारतीय कंपनियों की मजबूत पकड़
स्टील और एल्युमीनियम उत्पादों पर 50% तक टैरिफ लगाए जाने के बावजूद भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग बनी हुई है. स्टील फोर्जिंग के निर्यातक अविनाश गुप्ता के मुताबिक, यह शुल्क दूसरे देशों पर भी लागू होता है. ऐसे में अमेरिकी खरीदारों के लिए भारतीय उत्पादों के विकल्प तलाशना हमेशा आसान नहीं होता.
कोरोना स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) के पूर्व अध्यक्ष अरुण कुमार गड़ोदिया के अनुसार, अमेरिकी सप्लाई चेन में जगह बना चुकी कंपनियों को बदलना आसान नहीं है. किसी नए देश से सामान मंगाने के लिए सप्लाई सिस्टम, लॉजिस्टिक्स और कारोबारी प्रक्रियाओं को नए सिरे से तैयार करना पड़ता है. यही वजह है कि ग्राहक केवल टैरिफ के आधार पर अपने पुराने सप्लायर को नहीं बदलते.
अमेरिकी ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट, 1962 की धारा 232 के तहत ऑटो पार्ट्स और तांबे के उत्पादों पर भी 50% टैरिफ लगाया गया है. इसके बावजूद इन उत्पादों की मांग में बड़ी गिरावट नहीं आने की बात कही गई है.
बाजार बचाने के लिए निर्यातकों ने घटाया मुनाफा
अमेरिकी बाजार में कारोबार बनाए रखने के लिए भारतीय निर्यातकों और वहां के खरीदारों ने टैरिफ का बोझ साझा किया. कुछ मामलों में निर्यातकों ने अपने उत्पादों पर छूट देकर या कम मुनाफे पर सामान भेजकर बाजार में अपनी मौजूदगी बनाए रखी.
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन और ज्योति स्टील इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग पार्टनर पंकज चड्ढा के मुताबिक, अमेरिका से लगातार मांग मिल रही है. उन्हें उम्मीद है कि पिछले पांच महीनों के दौरान दिखी वृद्धि आगे भी जारी रह सकती है.
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) के अध्यक्ष और श्री टूल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर एससी रल्हन के अनुसार, कई भारतीय कारोबारियों ने अमेरिकी आयातकों के साथ मिलकर 50% टैरिफ का बोझ उठाया. कुछ निर्यातकों ने अमेरिकी सप्लाई चेन में बने रहने के लिए नुकसान सहकर भी कारोबार जारी रखा.
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में इन टैरिफ के रिफंड की प्रक्रिया शुरू होने से भारतीय निर्यातकों को भी राहत की उम्मीद है. उन्हें आशा है कि अमेरिकी आयातक रिफंड में मिलने वाली राशि का उचित हिस्सा उन्हें देंगे. हालांकि, यह प्रक्रिया अभी धीमी है.
चीन और यूरोप के बाजारों में भी बढ़ा निर्यात
भारतीय इंजीनियरिंग सेक्टर को अमेरिका के अलावा दूसरे बाजारों में बढ़ते कारोबार से भी सहारा मिला है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इंजीनियरिंग उत्पादों का कुल वैश्विक निर्यात 4.9% बढ़कर 122.43 अरब डॉलर पर पहुंच गया.
वित्त वर्ष 2025-26 में चीन को भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात 32.4% बढ़ा. इसी अवधि में ब्रिटेन में 18.2%, इटली में 16% और जर्मनी में 14.6% की वृद्धि दर्ज की गई. दक्षिण कोरिया, जापान, ब्राजील और नीदरलैंड जैसे बाजारों में भी दोहरे अंकों की वृद्धि देखने को मिली.
भारतीय कंपनियां अब यूरोप, ब्रिटेन और कनाडा में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं. इससे किसी एक बाजार पर निर्भरता कम करने और वैश्विक मांग में बदलाव के जोखिम को संभालने में मदद मिल सकती है.
यूरोपीय संघ से स्टील निर्यात के लिए 19 लाख टन का कोटा
भारतीय स्टील निर्यातकों के लिए यूरोपीय संघ (EU) का बाजार भी महत्वपूर्ण बना हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को यूरोपीय बाजार में स्टील उत्पादों के निर्यात के लिए 19 लाख टन का विशेष कोटा मिला है. इस सीमा के भीतर भेजे जाने वाले उत्पादों पर शून्य शुल्क का लाभ मिलता है, जबकि कोटे से अधिक निर्यात पर 50% टैरिफ लागू होने की बात कही गई है.
कुल मिलाकर, अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बावजूद भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात में आई तेजी इस सेक्टर की बाजार में बनी पकड़ और नए बाजारों में विस्तार की रणनीति को दर्शाती है. हालांकि, आगे निर्यात की रफ्तार कितनी बनी रहती है, यह वैश्विक मांग, टैरिफ नीतियों, माल ढुलाई की लागत और अमेरिकी बाजार में रिफंड की प्रक्रिया जैसे कारकों पर निर्भर करेगा.
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