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भारतीय बॉन्ड मार्केट से FPI ने निकाले 27,000 करोड़ रुपये, जानें कारण
भारत-अमेरिका बॉन्ड यील्ड में घटते अंतर और कम रिटर्न के कारण विदेशी निवेशक अपनी पूंजी सुरक्षित विकल्पों में लगा रहे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लगातार तीसरी बार ब्याज दरों में कटौती करने के फैसले का विदेशी निवेशकों पर नकारात्मक असर पड़ा है. उन्होंने भारतीय बॉन्ड मार्केट से तेजी से पैसे निकालने शुरू कर दिए हैं. आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने हाल ही में भारतीय बॉन्ड से 27,000 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है.
ब्याज दरों में कटौती और बॉन्ड यील्ड पर असर
RBI ने ग्रोथ को समर्थन देने के लिए फरवरी और अप्रैल 2025 में 25 बेसिस प्वाइंट (bps) की दो कटौती के बाद जून में एक बार फिर ब्याज दर में 50 बीपीएस की बड़ी कटौती की है. यह लगातार तीसरी बार है जब RBI ने ब्याज दर में कमी की है. इस फैसले का असर सीधे तौर पर भारतीय बॉन्ड यील्ड पर पड़ा है, जिससे विदेशी निवेशकों का आकर्षण कम हुआ है.
भारत-अमेरिका बॉन्ड यील्ड में घटा अंतर
वर्तमान में भारत और अमेरिका के बॉन्ड यील्ड में अंतर केवल 187 बीपीएस रह गया है, जो कि ऐतिहासिक रूप से बेहद कम माना जा रहा है. आमतौर पर जब दो देशों के बॉन्ड रिटर्न में अंतर कम होता है, तो विदेशी निवेशक ज्यादा सुरक्षित और स्थिर रिटर्न देने वाले देशों की ओर रुख कर लेते हैं. यही कारण है कि उन्होंने भारतीय बाजार से पूंजी निकालनी शुरू कर दी है.
विदेशी निवेश में गिरावट के आंकड़े
Clearing Corporation of India (CCIL) के अनुसार, Fully Accessible Route (FAR) के तहत विदेशी निवेशकों का निवेश 6 जून को 2.78 लाख करोड़ रुपये था, जो 11 जून तक घटकर 2.76 लाख करोड़ रुपये रह गया. सबसे बड़ी गिरावट 7.38% 2027 और 7.06% 2028 मच्योरिटी वाले बॉन्ड में देखी गई है. 7.38% 2027 बॉन्ड में निवेश 12.80% से घटकर 11.47% रह गया. वहीं, 7.06% 2028 बॉन्ड में निवेश 15.45% से गिरकर 15.20% हो गया है.
भारत पर संभावित असर
इस निकासी का भारतीय वित्तीय बाजारों पर प्रतिकूल असर हो सकता है. विदेशी पूंजी की वापसी से रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे उसकी वैल्यू गिर सकती है. इसके अलावा, इससे बाजार में अस्थिरता और अनिश्चितता भी बढ़ सकती है. सरकार और कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो सकता है क्योंकि निवेश की लागत बढ़ जाती है.
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