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उम्मीद बंधी लेकिन पूरी नहीं हुई आस, बजट से पहले फिर उठी 5-डेज बैंकिंग की मांग
बैंक कर्मी पिछले काफी समय से सप्ताह में 5 दिन कामकाज की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
बैंक कर्मियों की 5 डेज बैंकिंग की मांग अब तक पूरी नहीं हुई है. लोकसभा चुनाव से पहले यह लगभग तय माना जा रहा था कि सरकार इस पर मुहर लगा सकती है. पिछले साल जुलाई में खबर आई थी कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने बैंकर्स की मांग को स्वीकार कर लिया है और अब वित्त मंत्रालय से भी इसे हरी झंडी मिल सकती है. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. अब 23 जुलाई को पेश होने वाले बजट से पहले बैंक कर्मियों की सप्ताह में 5 दिन कामकाज की मांग ने फिर से जोर पकड़ लिया है. सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्विटर पर 5DaysBanking ट्रेडिंग है.
क्या हुआ तेरा वादा?
सोशल मीडिया पर 5 डेज बैंकिंग के समर्थक ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA) सहित बैंक यूनियन के लीडर्स को निशाना बना रहे हैं. उनका मानना है कि यूनियन इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाने मन विफल रही है. यूनियन लीडर्स ने वादा किया था कि सप्ताह में पांच दिन कामकाज के प्रस्ताव पर जल्द मुहर लगेगी, लेकिन अब तक ऐसा हुआ नहीं है. #5DaysBanking के साथ ढेरों ट्वीट हो रहे हैं, इस वजह से यह ट्रेंडिंग टॉपिक बन गया है. लोकसभा चुनाव से पहले भी खबर आई थी कि सरकार इस प्रस्ताव के समर्थन में है और आदर्श आचार संहिता (MCC) लागू होने से पहले इसे मंजूरी देने पर गंभीरता से विचार कर रही है.
अभी क्या है व्यवस्था?
बैंक कर्मचारी यूनियनों द्वारा सभी शनिवारों को साप्ताहिक अवकाश घोषित करने की मांग को पिछले साल हुई बैठक में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने स्वीकार कर लिया था और प्रस्ताव को मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय भेज दिया गया था. इसके बाद दिसंबर में बैंक यूनियनों के बीच एक समझौते पर साइन हुए थे, जिसके तहत पब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारियों के सैलरी पर सहमति बनी. मगर 5 डेज बैंकिंग पर कोई फैसला नहीं हुआ. यदि वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो बैंक सप्ताह में सिर्फ पांच दिन ही चालू रहेंगे और बैंकर्स को पहले और तीसरे शनिवार को काम नहीं करना पड़ेगा. मौजूदा व्यवस्था के तहत रविवार के अलावा बैंक महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं.
कामकाज नहीं होगा प्रभावित
ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA) सरकार को पहले ही आश्वासन दिला चुकी है कि 5-डेज वर्किंग से बैंकों का कामकाज प्रभावित नहीं होगा. उसने इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA)को बाकायदा इस संबंध में पूरा खाका भी सौंपा था. उसने कहा था कि रोजाना काम के घंटों को बढ़ाकर हफ्ते में 5 दिन काम की पॉलिसी लागू की जा सकती है. AIBEA के मुताबिक, बैंकों में काम का प्रस्तावित समय सुबह 9.15 बजे से शाम 4.45 बजे तक रखा जाए, जो अभी तक सुबह 9:45 बजे से शाम 4:45 बजे है. बैंकों में कैश ट्रांजैक्शन से जुड़े कार्यों को सुबह 9.30 बजे से दोपहर 1.30 बजे और गैर-कैश ट्रांजैक्शन से जुड़े कामकाज को दोपहर 2 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक किया जाए. इस तरह, शनिवार की अतिरिक्त छुट्टी से बैंकों का कामकाज प्रभावित नहीं होगा.
इन कंपनियों का दिया हवाला
बैंक कर्मचारियों का कहना है कि बीते कुछ समय में काम का बोझ काफी बढ़ गया है. जब LIC सहित कई कंपनियां हफ्ते में 5 दिन कामकाज की पॉलिसी अपना रही हैं, तो बैंकों में भी इसे अमल में लाया जा सकता है. सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में सवाल पूछा गया है कि जब वित्तीय सेवाएं विभाग, RBI, LIC, CVC, SEBI, BSE, NSE, IRDAI, केंद्र-राज्य सरकार के सभी कार्यालयों, मंत्रालयों और NABARD में हफ्ते में 5 दिन कामकाज की नीति लागू है, तो फिर बैंकों में क्यों नहीं. उनका कहना है कि बैंकों में कामकाज लगातार बढ़ रहा है. सरकार की हर योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी बैंकों पर होती है, इसके बावजूद हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
क्या होने वाली है बैंक हड़ताल?
बैंकों में पांच दिन कामकाज के मुद्दे के जोर पकड़ने के बाद यह सवाल भी लाजमी हो गया है कि क्या आगे बैंक हड़ताल देखने को मिल सकती है? जानकार मानते हैं कि बैंक कर्मियों में सरकार के साथ -साथ यूनियन लीडर्स के खिलाफ भी गुस्सा है. उनका मानना है कि यूनियन इस मामले को उचित ढंग से उठाने और सरकार पर दबाव बनाने में नाकाम रही है. इसलिए केंद्र सरकार इस पर गंभीरता से विचार नहीं कर रही. ऐसे में कर्मचारियों के बढ़ते दबाव के मद्देनजर यूनियन को हड़ताल जैसे निर्णय लेने पड़ सकते हैं. एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि 5 डेज बैंकिंग में कोई बुराई नहीं है, क्योंकि बैंकों में कामकाज वाकई काफी बढ़ गया है.
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