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लगातार दूसरी बार फेड ने 0.75% बढ़ाई ब्याज दर, फेड ने कहा-''महंगाई के आगे सरेंडर नहीं''

अब अमेरिका की इकोनॉमी को फेड के सपोर्ट की जरूरत नहीं है, इसलिए उसने अपने कदम धीरे धीरे वापस लेना शुरू कर दिए. फेड महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरें बढ़ा रहा है जिससे इकोनॉमी में धीमापन आ रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: 40 साल में सबसे ज्यादा महंगाई को काबू करने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में फिर से 0.75% का इजाफा कर दिया है. ये लगातार दूसरी बार है जब फेडरल रिजर्व ने 0.75% की बढ़ोतरी की है. दो महीनों में ही ब्याज दरों में 1.5% की बढ़ोतरी की जा चुकी है. इस बढ़ोतरी के बाद अमेरिका में ब्याज दरें 2.25%-2.5% के बीच आ गई हैं., जो कि दिसंबर 2018 के बाद से सबसे ऊंची ब्याज दरें हैं. 

फेड का कदम पहले से तय था 
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी या FOMC की ये फैसला अनुमानों के हिसाब से ही है. फेड ये पहले ही संकेत दे चुका था कि बढ़ती महंगाई को काबू करने के लिए वो ब्याज दरों में 0.5% से लेकर 0.75% तक की बढ़ोतरी कर सकता है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व का कहना है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का मकसद अमेरिकी नागरिकों को 1980 के बाद से सबसे ज्यादा महंगाई से बचाना है. इस बढ़ोतरी को लेकर फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल का कहना है कि महंगाई को रोकने में नाकाम रहना हमारे लिए कोई विकल्प नहीं है. फेड ने इकोनॉमी में सुस्ती के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि ये गलत है, क्योंकि अमेरिका में हर महीने 3.5 लाख लोग काम पर रखे जा रहे हैं. 

फेड के अधिकारियों ने एक आधिकारिक बयान में कहा, "खर्च और उत्पादन के हालिया संकेतकों में नरमी आई है, फिर भी, जॉब को लेकर स्थिति मजबूत हुई है और बेरोजगारी दर कम बनी हुई है, लेकिन महंगाई अब भी बढ़ी हुई है. बीते महीनों में फेड ने ऊंची ईंधन की कीमतों को जिक्र किया था लेकिन ये पहली बार है कि फेड ने अपने एनालिसिस में बढ़ते फूड प्राइस को शामिल किया है. 

फेड के फैसले का क्या असर होगा
जब महामारी ने अमेरिका में पहली बार कदम रखा था तो फेड ने इकोनॉमी को सहारा देने के लिए कई ठोस कदम उठाए थे. अमेरिका ने कर्ज को जीरो परसेंट पर कर दिया था. ताकि लोग और कारोबार पैसा उधार लेकर खर्च कर सकें, इसने महंगाई को बढ़ावा दिया है. अब अमेरिका की इकोनॉमी को फेड के सपोर्ट की जरूरत नहीं है, इसलिए उसने अपने कदम धीरे धीरे वापस लेना शुरू कर दिए. फेड महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरें बढ़ा रहा है जिससे इकोनॉमी में धीमापन आ रहा है. फेड का कहना है कि फेड महंगाई को 2% के अपने लक्ष्य तक लाने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि कई एनालिस्ट फेड को इस बात का दोषी भी ठहराते हैं कि वक्त रहते वो महंगाई को सही वक्त पर भांप नहीं पाए और अब मजबूरी में आकर ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं. महंगी ब्याज दरों के चलते अमेरिका की इकोनॉमी पहले ही सुस्त है, जो कि हाउसिंग मार्केट में साफ दिखता है जहां, बिक्री तेजी से गिरी है. लेकिन फेड का कहना है कि वो इकोनॉमी की सॉफ्ट लैंडिंग को मैनेज कर लेंगे जिससे तेज गिरावट न आए, जबकि कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ये फैसला अमेरिका को मंदी की ओर ले जाएगा साथ ही बेरोजगारी भी तेजी से बढ़ेगी. 

सितंबर में फिर बढ़ेंगी दरें 
ब्याज दरों में ये बढ़ोतरी फेडरल रिजर्व के अनुमानों के मुताबिक ही है या इसे न्यूट्रल कह सकते हैं, जिस लेवल पर इकोनॉमी में न तो तेजी आएगी न ही धीमी होगी. जून में फेड के अनुमानों के हिसाब से इस साल तक ब्याज दरें 
बढ़कर 3.4% तक हो जाएंगी और साल 2023 के अंत तक दरें बढ़कर 3.8% हो जाएंगी. अब निवेशक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि क्या फेडरल रिजर्व आगे बढ़ोतरी करेगा और अगर करेगा तो क्या इतनी बड़ी बढ़ोतरी होगी. हालांकि अनुमान ये लगाया जा रहा है कि 20-21 सितंबर के दौरान होने वाली फेड की बैठक में 0.5% का इजाफा किया जा सकता है. 
 
इस साल अबतक 4 बार बढ़ी ब्याज दरें 
साल 2022 में फेडरल रिजर्व अबतक 4 बार ब्याज दरों को बढ़ा चुका है. कोरोना महामारी के दौरान अमेरिकी ब्याज दरें जीरो परसेंट हो गईं थी, फिर इसके बाद मार्च में फेड ने ब्याज दरों को बढ़ाना शुरू किया. मार्च में फेड ने ब्याज दरों में 0.25% का इजाफा किया. जो कि तीन साल में पहली बढ़ोतरी थी. फिर मई में 0.50% की और बढ़ोतरी की, जून में 0.75% का इजाफा किया, जिससे ब्याज दरें 1.5% से 1.75% की रेंज में आ गईं. इसके बाद जुलाई में 0.75% की बढ़ोतरी की.

VIDEO: Zomato के शेयरों में क्यों आ रही गिरावट, समझिए

 


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