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भारत के मसाला उद्योग को नई ऊंचाई देने के लिए ‘वैल्यू शिफ्ट’ की जरूरत: विशेषज्ञ
सरकार के “विकसित भारत 2047” विजन के तहत भारत को “ग्लोबल फूड बास्केट” बनाने में मसाला उद्योग की अहम भूमिका रहने की उम्मीद है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 days ago
भारत के मसाला उद्योग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए अब मात्रा आधारित मॉडल से हटकर गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक ब्रांडिंग पर आधारित वैल्यू-ड्रिवन मॉडल अपनाना जरूरी है. यह बात उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने कही. यह सुझाव ऐसे समय में आया है जब देश के मसाला बाजार के आकार को दोगुना करने की कोशिशें चल रही हैं. इस दौरान किसानों को वैल्यू चेन से जोड़ने, रिसर्च और टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन मजबूत करने पर जोर दिया गया.
हाई-वैल्यू सेगमेंट में बढ़त जरूरी
भारत मसाला सम्मेलन 2026 में बोलते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि मसाला व्यापार में भारत की ऐतिहासिक बढ़त को अब हाई-वैल्यू और प्रोसेस्ड उत्पादों में नेतृत्व में बदलने की जरूरत है. भारत दुनिया के 109 मान्यता प्राप्त मसालों में से 60 से अधिक का उत्पादन करता है और 200 से ज्यादा देशों को निर्यात करता है, लेकिन अभी भी निर्यात का बड़ा हिस्सा कच्चे या कम वैल्यू वाले उत्पादों का है.
वॉल्यूम से वैल्यू की ओर बदलाव जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोसेस्ड, ब्रांडेड और फंक्शनल प्रोडक्ट्स जैसे वैल्यू एडिशन पर ध्यान देने से निर्यात आय और किसानों की आमदनी दोनों बढ़ सकती हैं. सरकार इस बदलाव को बढ़ावा देने के लिए 100% विदेशी निवेश (FDI) और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिककरण योजना (PMFME) जैसी योजनाओं के जरिए समर्थन दे रही है. मंत्री ने यह भी कहा कि न्यूट्रास्यूटिकल्स और वेलनेस प्रोडक्ट्स जैसे उभरते क्षेत्रों में मसालों के उपयोग से नए अवसर पैदा हो सकते हैं.
क्वालिटी और स्टैंडर्ड पर फोकस जरूरी
विशेषज्ञों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भरोसा बढ़ाने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण मजबूत करना बेहद जरूरी है. अनिल राजपूत ने कहा कि प्राकृतिक और हेल्थ-ओरिएंटेड प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा मौका है. उन्होंने टिकाऊ (सस्टेनेबल) और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया, क्योंकि वैश्विक खरीदार अब सख्त सुरक्षा और पर्यावरण मानकों को प्राथमिकता दे रहे हैं.
ग्लोबल ब्रांडिंग पर देना होगा ध्यान
रणजीत मेहता ने कहा कि भारत को अब वैश्विक स्तर पर मजबूत ब्रांड बनाने पर ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा, “भारत के पास उत्पादन और परंपरा की मजबूत नींव है, अब इसे ग्लोबल ब्रांड लीडरशिप में बदलने की जरूरत है.”
किसानों और MSME को सशक्त बनाना जरूरी
जे डी देसाई ने कहा कि किसानों और MSME सेक्टर की क्षमता बढ़ाना समावेशी विकास के लिए जरूरी है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर भारतीय मसालों को प्रीमियम उत्पाद के रूप में पेश किया जा सकता है.
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में यह निष्कर्ष निकला कि गुणवत्ता सुधार, वैल्यू एडिशन और वैश्विक मांग के अनुसार उत्पादन से भारत अपने मसाला उद्योग को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है.
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