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इंडस्ट्री को मिलेगा कर्ज का सहारा, बैंकों से 9-13% लोन ग्रोथ की उम्मीद: रिपोर्ट

सर्वे के अनुसार, रिटेल लोन सेगमेंट में उच्च दोहरे अंकों की ग्रोथ देखने को मिल सकती है. वहीं, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में भी 9-13% की वृद्धि का अनुमान है, जो ग्रामीण मांग में सुधार को दर्शाता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

भारत के बैंकिंग सेक्टर में साल 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) के दौरान कर्ज वितरण में स्थिर लेकिन मजबूत वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं. उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती मांग के चलते बैंकों द्वारा 9-13% तक लोन ग्रोथ दर्ज की जा सकती है. यह रुझान आर्थिक गतिविधियों में सुधार और निवेश चक्र की वापसी की ओर इशारा करता है.

औद्योगिक कर्ज में सुधार के संकेत

फिक्की-आईबीए सर्वे के मुताबिक, औद्योगिक कर्ज में 9-13% की वृद्धि संभव है. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में तेजी, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विस्तार और बाजार में मांग बढ़ने से समर्थित होगी. हालांकि, इसमें तेज उछाल के बजाय क्रमिक और स्थिर वृद्धि की संभावना जताई गई है.

अलग-अलग बैंकों की अलग रणनीति

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs): इन बैंकों में सबसे ज्यादा आशावाद दिख रहा है. बेहतर एसेट क्वालिटी, मजबूत पूंजी स्थिति और कॉरपोरेट लोन में सुधार के चलते 11-13% या उससे अधिक ग्रोथ की उम्मीद है.

निजी बैंक: निजी बैंकों का प्रदर्शन मिश्रित रहने की संभावना है, लेकिन अधिकतर 11-13% की ग्रोथ रेंज में रह सकते हैं. मजबूत रिटेल पोर्टफोलियो, MSME लोन और संतुलित कॉरपोरेट एक्सपोजर उनकी रणनीति का हिस्सा हैं.

छोटे वित्त और सहकारी बैंक: ये बैंक अपेक्षाकृत सतर्क रुख अपनाए हुए हैं. बड़े उद्योगों में सीमित जोखिम और रिटेल व MSME पर फोकस के चलते इनकी लोन ग्रोथ 7-9% रहने का अनुमान है.

विदेशी बैंकों का संतुलित रुख

विदेशी बैंकों के लिए 11-13% की मध्यम वृद्धि का अनुमान है. इनकी रणनीति वैश्विक तरलता, पूंजी आवंटन और भारतीय कॉरपोरेट बाजार में सीमित लेकिन रणनीतिक भागीदारी पर आधारित है.

रिटेल और कृषि क्षेत्र में मजबूत उम्मीद

सर्वे के अनुसार, रिटेल लोन सेगमेंट में उच्च दोहरे अंकों की ग्रोथ देखने को मिल सकती है. वहीं, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में भी 9-13% की वृद्धि का अनुमान है, जो ग्रामीण मांग में सुधार को दर्शाता है.

कुल मिलाकर, भारतीय बैंकिंग सेक्टर 2026 की पहली छमाही में संतुलित और टिकाऊ कर्ज वृद्धि की ओर बढ़ रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, कैपेक्स रिकवरी और मजबूत मांग इस ग्रोथ के प्रमुख चालक होंगे, जिससे अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.


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