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डायबिटीज से लेकर कैंसर तक जरूरी दवा होने वाली हैं महंगी, मरीजों को होगा भारी नुकसान

इन बढ़ती दवाइयों की कीमतों के साथ, यह स्पष्ट है कि मरीजों को वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जबकि दवा कंपनियों को राहत मिल सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

सरकार ने पिछले कुछ सालों से मरीजों को महंगी दवाओं से राहत देने के लिए कई जरूरी दवाओं को प्राइस कंट्रोल लिस्ट में रखा था. हालांकि, अब ये दवाएं महंगी हो सकती हैं, जिससे मरीजों के लिए वित्तीय बोझ बढ़ सकता है. दरअसल, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 1 अप्रैल से आवश्यक दवाओं की कीमतों में इजाफा करने का फैसला किया है, जिससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा. इनमें कैंसर, डायबिटीज, दिल की बीमारियों और एंटीबायोटिक्स जैसी महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं. आइए जानते हैं ऐसे क्या कारण हैं, जिनकी वजह से ये दवा महंगी होने जा रही हैं?   

कीमतों में 1.7% बढ़ोतरी का अनुमान

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार  नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) द्वारा कुछ जरूरी दवाओं की कीमतों में 1.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा सकती है. एनपीपीए द्वारा निर्धारित दवाओं के दाम में यह वृद्धि दवा कंपनियों को राहत देगी, लेकिन इसके साथ ही मरीजों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. एनपीपीए देश में दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है, और इस बढ़ोतरी से दवा कंपनियों को कच्चे माल और अन्य खर्चों में हो रही बढ़ोतरी को समायोजित करने में मदद मिल सकती है. 

क्यों बढ़ रही दवाओं की कीमतें?

NPPA के अनुसार, दवाओं की कीमतों में यह बढ़ोतरी मुद्रास्फीति आधारित मूल्य संशोधन के कारण की जा रही है. हर साल सरकार आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए एक संशोधन करती है. इस बार थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में वृद्धि के चलते दवा कंपनियों को कीमतें बढ़ाने की अनुमति दी गई है. वहीं, ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के महासचिव राजीव सिंघल के अनुसार, दवा कंपनियों को कच्चे माल की लागत और अन्य खर्चों में वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि दवाओं की नई कीमतों का असर अगले दो से तीन महीनों में बाजार में देखा जा सकता है, क्योंकि बाजार में दवाओं का करीब 90 दिनों का स्टॉक रहता है. इसका मतलब यह है कि आने वाले महीनों तक बाजार में पुरानी कीमतों पर ही दवाएं बिकती रहेंगी. 

 

ये दवा होंगी महंगी 

जो दवाएं राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (NLEM) में शामिल हैं, उनकी कीमतें बढ़ेंगी. इसमें एंटीबायोटिक्स, पेन किलर, हृदय रोग, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं शामिल हैं. बता दें, यह पहली बार नहीं है जब दवाओं की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं. 2023 में भी NPPA ने 12% तक की वृद्धि की थी, जिससे पहले से ही महंगाई से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा था.

सरकार के इस फैसले से जिन लोगों को नियमित रूप से दवाओं की जरूरत होती है, उनके मासिक खर्च में वृद्धि होगी. बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए मुश्किलें. कई वरिष्ठ नागरिक और क्रॉनिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे.हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे प्रीमियम दरें बढ़ने की संभावना है.

दवा कंपनियों पर नियमों के उल्लंघन का आरोप

रसायन और उर्वरक मंत्रालय द्वारा की गई एक जांच में पाया गया कि दवा कंपनियां अक्सर दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी करके सरकार द्वारा निर्धारित सीमा का उल्लंघन करती हैं. इसके चलते NPPA को 307 उल्लंघन मामले सामने आए हैं. ड्रग (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत, सरकार द्वारा निर्धारित कीमत से ज्यादा पर दवाएं बेचना गैरकानूनी है. 

मरीजों को हुई बचत

हाल ही में, रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल दवाओं की कीमतों में कमी से मरीजों को लगभग 3,788 करोड़ की सालाना बचत हुई है. हालांकि, कीमतों में होने वाली यह बढ़ोतरी मरीजों के लिए चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि इससे उनकी वित्तीय स्थिति पर असर पड़ सकता है.


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