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Essar Group के को-फाउंडर शशि रुइया का 81 साल की उम्र में निधन, पीछे छोड़ गए इनती संपत्ति

पारिवारिक लोगों के मुताबिक 25 नवंबर की देर रात शशिकांत रुइया का मुंबई में निधन हो गया. शशिकांत रुइया के निधन पर पीएम मोदी ने शोक व्यक्त किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

अरबपति कारोबारी और स्टील, पावर, एनर्जी के साथ पोर्ट बिजनेस करने वाले एस्सार ग्रुप के को-फाउंडर शशि रुइया का लंबी बीमारी के बाद देहांत हो गया, वह 81 साल के थे. रुइया पहली पीढ़ी के उद्योगपति थे और वह अपने पीछे ट्रांसफॉर्मेटिव लीडरशिप और इनोवेशन की विरासत छोड़ गए. रुइया अपने कारोबारी जीवन के अलावा परोपकारी कामों के लिए भी जाने जाते थे.

शशि के भाई रवि रुइया ने दी जानकारी

शशि के भाई रवि रुइया और परिवार के सदस्यों ने एक बयान में कहा, 'हमें अत्यंत दुख के साथ बताना पड़ रहा है कि रुइया और एस्सार परिवार के संरक्षक शशिकांत रुइया का निधन हो गया है, वे 81 वर्ष के थे.सामुदायिक उत्थान और परोपकार के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ, उन्होंने लाखों लोगों के जीवन को छुआ और एक स्थायी प्रभाव छोड़ा. उनकी विनम्रता, गर्मजोशी और हर किसी से जुड़ने की क्षमता ने उन्हें वास्तव में एक असाधारण लीडर बनाया.'

प्रधानमंत्री ने जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शशि रुइया ने निधन पर शोक जताया है, मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'श्री शशिकांत रुइया जी उद्योग जगत की एक महान हस्ती थे. उनके दूरदर्शी नेतृत्व और उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने भारत के कारोबारी परिदृश्य को बदल दिया. उन्होंने इनोवेशन और विकास के लिए उच्च मानक भी स्थापित किए, वे हमेशा विचारों से ओतप्रोत रहते थे. हमेशा इस बात पर चर्चा करते थे कि हम अपने देश को कैसे बेहतर बना सकते हैं. शशि जी का निधन बेहद दुखद है, इस दुख की घड़ी में उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. ओम शांति.'

एस्सार ग्रुप की स्थापना

शशि रुइया ने अपने भाई रवि रुइया के साथ 1969 में एस्सार ग्रुप की स्थापना की थी. उसे मद्रास पोर्ट ट्रस्ट से बंदरगाह में बाहरी ब्रेकवाटर के निर्माण के लिए 2.5 करोड़ रुपये का ऑर्डर प्राप्त हुआ था. शुरुआती वर्षों में एस्सार ग्रुप ने कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग पर फोकस किया. उसने देश में कई पुलों, बांधों और बिजली संयंत्रों सहित कई प्रमुख इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स का निर्माण किया. 1980 के दशक में ग्रुप ने एस्सार ने कई तेल और गैस सेक्टर में विस्तार किया और 1990 के दशक में स्टील और टेलिकॉम में भी कदम रखा.

एस्सार ने हचिसन के साथ मिलकर भारत की दूसरा सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बनाई, लेकिन अब यह ग्रुप टेलिकॉम बिजनेस से निकल चुका है. साथ ही उसने अपनी तेल रिफाइनरी रूस की रोजनेफ्ट के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को बेच दी. ग्रुप का स्टील प्लांट भी इनसॉल्वेंसी प्रॉसीडिंग में आर्सेलर मित्तल के पास चला गया. रुइया कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय निकायों और उद्योग संघों में शामिल थे. वह फिक्की की प्रबंध समिति में थे. साथ ही वह प्रतिष्ठित इंडो-यूएस जॉइंट बिजनस काउंसिल और इंडियन नेशनल शिपऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे. रुइया प्रधानमंत्री के इंडो-यूएस सीईओ फोरम और भारत-जापान बिजनेस काउंसिल के सदस्य भी थे.

अपने पीछे छोड़ गए इतनी संपत्ति

फोर्ब्‍स के अनुसार, रुइया ब्रदर्स यानी शशि रुइया और रवि रुइया की नेटवर्थ 2.2 बिलियन डॉलर (करीब 18,304 करोड़ रुपये) है. शशि रुइया की नेतृत्व क्षमता और व्यापारिक दृष्टि ने एस्सार समूह को भारतीय कॉर्पोरेट परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया. एस्सार समूह की स्थापना के बाद निर्माण और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में सक्रिय था. बाद में, समूह ने तेल और गैस, ऊर्जा, और अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार किया. 

आज एस्‍सार ग्रुप का बिजनेस 25 देशों में फैला है और सालाना करीब 40 बिलियन डॉलर का राजस्‍व अर्जित करता है. एस्‍सार समूह में एस्सार ऑयल, एस्सार पावर, एस्सार शिपिंग, एस्सार टेलीहोल्डिंग्स, एस्सार कंस्ट्रक्शन और एस्सार इन्वेस्टमेंट्स जैसी कंपनियां शामिल हैं. 2010 में एस्सार ने अमेरिका के ट्रिनिटी कोल का अधिग्रहण किया था.एस्सार समूह का एक तिहाई हिस्सा हचिसन एस्सार में है, जो एक सेलुलर ऑपरेटर है.
 


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