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AI की वजह से एंट्री-लेवल नौकरियों में गिरावट, स्किल डेवलपमेंट ही समाधान: राहुल अत्तुलुरी
NxtWave के CEO ने Tianjin में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से दी चेतावनी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
एजेंटिक एआई (Agentic AI) के बढ़ते प्रभाव के चलते एंट्री-लेवल नौकरियों में भारी गिरावट आ रही है और इससे वैश्विक कार्यबल पर गहरा असर पड़ सकता है. यह चेतावनी भारत की एडटेक कंपनी NxtWave और NIAT के सह-संस्थापक एवं CEO राहुल अत्तुलुरी ने बुधवार को तिआनजिन (Tianjin) में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वार्षिक बैठक में दी.
“हम पहले ही बड़ी संख्या में छंटनी और हायरिंग फ्रीज़ देख रहे हैं. ग्राहक सेवा जैसी एंट्री-लेवल नौकरियां तेजी से खत्म हो रही हैं क्योंकि कंपनियां एआई को अपनाकर अपने संचालन को अनुकूलित कर रही हैं,” अत्तुलुरी ने “Career Pathways: Rewired” सत्र में बोलते हुए कहा. उन्होंने मौजूदा परिवर्तन को ‘J-कर्व पैटर्न’ का हिस्सा बताया, जहां अल्पकालिक व्यवधान के बाद दीर्घकालिक अवसर आते हैं.
राहुल अत्तुलुरी ने कहा कि एजेंटिक एआई के चलते एंट्री-लेवल कार्य तेजी से ऑटोमेट हो रहे हैं जिससे पारंपरिक जॉब ट्रांजिशन मॉडल बदल रहे हैं. “पारंपरिक रोजगार मार्ग अब पुनर्परिभाषित हो रहे हैं. ऐसे में शिक्षा और उद्योग के बीच गहरा सहयोग जरूरी है ताकि छात्रों को प्रासंगिक कौशल मिल सकें,” उन्होंने कहा.
उन्होंने यह भी कहा कि एआई को शिक्षा में भी अपनाया जाना चाहिए. “छात्रों को एआई का उपयोग करके एआई सीखना चाहिए. कंपनियों को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि उन्हें किस तरह के स्किल सेट की आवश्यकता है,” उन्होंने कहा. उनका मानना है कि लर्निंग और वर्कफोर्स की आवश्यकताओं के बीच तालमेल बहुत जरूरी है.
भारत की युवा आबादी को लेकर अत्तुलुरी ने कहा कि देश की 60 प्रतिशत युवा जनसंख्या एक बड़ी ताकत है. “अगर हम इस टैलेंट को सही दिशा दें तो यह भारत के लिए वरदान है. लेकिन यदि इसे नजरअंदाज किया गया, तो यह एक बड़ी चुनौती बन सकता है,” उन्होंने कहा.
उन्होंने चेताया कि अगर एआई टूल्स और डिजिटल संसाधनों तक समान रूप से पहुंच नहीं दी गई, तो डिजिटल डिवाइड और गहराएगा. “AI तक शुरुआती शिक्षा स्तर से पहुंच सुनिश्चित करनी होगी. तभी हम समावेशी भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं,” उन्होंने कहा.
राहुल अत्तुलुरी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनियाभर की सरकारें और कंपनियां जनरेटिव एआई के प्रभाव के चलते अपने कार्यबल मॉडल को फिर से गढ़ने में जुटी हैं.
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