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दिल्ली-मुंबई में ED की छापेमारी, 4,500 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले का हुआ खुलासा!
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच में देश के अलग अलग राज्यों में छापेमारी करके कई महत्वपूर्ण सबूत जब्त किए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुंबई और दिल्ली में छापेमारी के दौरान बड़े मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसमें 50 लाख से ज्यादा निवेशकों को ठगा गया है. ईडी ने पैनकार्ड क्लब लिमिटेड (PCL) और उसके निदेशकों के खिलाफ महत्वपूर्ण सबूत जब्त किए हैं, जो विदेशी संपत्तियों और धोखाधड़ी योजनाओं के जरिए अवैध लाभ कमा रहे थे. इस घोटाले में 4,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है. बता दें, ईडी द्वारा यह जांच मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज की गई FIR के आधार पर शुरू की गई थी.
Pancard Clubs पर ED का शिकंजा
ईडी के अनुसार, तलाशी के दौरान कई "आपत्तिजनक" दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनमें मुख्य आरोपी, दिवंगत सुधीर मोरवेकर के परिवार के सदस्यों द्वारा संचालित विदेशी संपत्तियों का विवरण शामिल है. सुधीर मोरवेकर उस समय M/s Pancard Clubs Limited के निदेशक थे. ये दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं. इसके अलावा, यह भी पाया गया है कि इन संपत्तियों से लीज रेंटल आय हो रही थी, जिसे पैनकार्ड क्लब के निदेशकों ने गुप्त रूप से वसूल किया.
मनी लॉन्ड्रिंग का गहरा नेटवर्क
ईडी ने बताया कि M/s Pancard Clubs Ltd और इसके निदेशकों ने विभिन्न अवधि की निवेश योजनाएं चलाईं, जिनकी अवधि तीन से नौ वर्ष तक थी. इन योजनाओं में निवेशकों से जमा राशि पर उच्च रिटर्न का वादा किया गया था, साथ ही होटल छूट, दुर्घटना बीमा और अन्य लाभों का भी आश्वासन दिया गया था. हालांकि, इन योजनाओं को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा निर्धारित मौजूदा नियमों की अनदेखी करते हुए चलाया गया था.
आरोपियों ने संपत्तियां बेचने की कोशिश की
ईडी ने आगे कहा कि सर्च ऑपरेशन के दौरान ऐसे दस्तावेजी सबूत मिले हैं, जो दिखाते हैं कि सह-आरोपियों और परिवार के सदस्यों ने संपत्तियों को बेचने का प्रयास किया. ये संपत्तियां प्रथम दृष्टया अपराध से अर्जित धन का हिस्सा लगती हैं. तलाशी के दौरान डिजिटल रिकॉर्ड भी बरामद किए गए और जब्त कर लिए गए.
क्लाउड पार्टिकल इन्वेस्टमेंट स्कैम में करोड़ों की हेराफेरी
ईडी ने एक अन्य मामले में, जालंधर जोनल ऑफिस के माध्यम से VueNow Marketing Services Ltd के CEO सुखविंदर सिंह खरौर और उनकी पत्नी डिंपल खरौर को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया. यह कार्रवाई कथित 3,558 करोड़ रुपये के क्लाउड पार्टिकल इन्वेस्टमेंट घोटाले से जुड़ी है.
ईडी के अनुसार, जांच में यह पाया गया कि VueNow Group के CEO सुखविंदर सिंह इस घोटाले के "मास्टरमाइंड" थे. उन्होंने अपने करीबी सहयोगियों के साथ मिलकर कथित तौर पर कई हजार करोड़ रुपये के "क्लाउड पार्टिकल घोटाले" को अंजाम दिया. ईडी का आरोप है कि आरोपियों ने निवेशकों के पैसे का दुरुपयोग कर उसे निजी लाभ के लिए हड़प लिया. बता दें, ईडी अब इन मामलों की गहनता से जांच कर रहा है, और भविष्य में ऐसे अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है.
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