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महंगाई को लेकर RBI ने दूर की लोगों की यह बड़ी चिंता, दिए ये संकेत

जुलाई के लिए जारी किए इस बुलेटिन में कहा गया है ग्लोबली सभी जगह इकोनॉमी में मारामारी चल रही है, ऐसे में भारतीय इकोनॉमी के रास्ते पर लौटने के संकेत मिलना सभी के लिए अच्छी बात है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने मासिक बुलेटिन में कहा है कि इकोनॉमी में सुधार के संकेत दिख रहे हैं, क्योंकि महंगाई दर अपने उच्च स्तर से नीचे आ रही है. जुलाई के लिए जारी किए इस बुलेटिन में कहा गया है ग्लोबली सभी जगह इकोनॉमी में मारामारी चल रही है, ऐसे में भारतीय इकोनॉमी के रास्ते पर लौटने के संकेत मिलना सभी के लिए अच्छी बात है.

युद्ध और मंदी के बीच भी इकोनॉमी ठीक प्रोग्रेस पर

आरबीआई ने कहा कि जब पूरा विश्व युद्ध और मंदी की आशंककाओं के बीच जी रहा है, ऐसे में उसका थोड़ा-बहुत असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखेगा. हालांकि पिछले तीन महीने से जहां महंगाई दर अपने चरम पर पहुंच गई थी, वहीं अब इसके नीचे आना भी धीरे-धीरे दिख रहा है. देश में मानसून का अच्छा होना, मैन्युफेक्चरिंग और सर्विस इंडस्ट्री में ग्रोथ दिखना, महंगाई रोकने के लिए किए गए उपाय, खाद्य पदार्थों का स्टॉक बफर में होना और फाइनेंशियल सिस्टम में मजबूती होना बताता है कि इकोनॉमी ठीक प्रोगेस कर रही है.

मौद्रिक नीति में बदलाव करना समय की मांग

सेंट्रल बैंक ने कहा कि महंगाई के बढ़ने के कारण और उस पर अंकुश लगाने के लिए ही उसको अपनी मौद्रिक नीति में बदलाव करना पड़ा, जिसके कारण रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में इजाफा हुआ. बैंक द्वारा किए गए इस बदलाव से महंगाई थोड़ी सी कम हुई है और इसके अक्टूबर से पहले तक और कम होने की संभावना है.

50 हजार करोड़ रुपये बाहर गए

हालांकि जून के महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफपीआई) द्वारा 49,469 करोड़ रुपये निकाल लिए गए जो कि मार्च 2020 के बाद सबसे ज्यादा है. रुपये में जो कमजोरी आई है उसके पीछे यह एक बहुत बड़ा कारण है. 2022-23 में एफपीआई द्वारा कुल 1.2 लाख करोड़ रुपये भारतीय इक्विटी मार्केट से निकाल लिए है. डॉलर इंडेक्स में मजबूती होना दूसरा सबसे बड़ा कारण है जिससे रुपया कमजोर हुआ है.

बढ़ सकता है CAD

भारत का करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) भी चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 8.37 लाख करोड़ रुपये हो सकता है, जो कि जीडीपी का 3 फीसदी है. रुपये के और कमजोर होने से यह और बढ़ सकता है क्योंकि भारत अपनी जरूरतों का 80 फीसदी तेल आयात करता है. आरबीआई ने रुपये में तेल खरीदने के लिए सरकार और तेल कंपनियों से कहा है. इससे चालू वित्तीय घाटा में असर नहीं पड़ेगा.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पिछले सप्ताह के बयान के अनुसार भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अन्य विदेशी मुद्राओं की तुलना में बेहतर स्थिति में है. यह देखते हुए कि भारत अपने कच्चे तेल का 80 फीसदी से अधिक आयात करता है, रुपये में गिरावट से मुद्रास्फीति सबसे अधिक प्रभावित होगी. यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक रही हैं. साल की शुरुआत से ही रुपया गिर रहा है और जुलाई में ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है.

स्थिर स्थिति में भारतीय इकोनॉमी

हालांकि भारतीय इकोनॉमी ने अब तक खुद को स्थिर दिखाया है, अगर डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपया जारी रहा, तो कच्चे माल की ऊंची कीमतें जारी रहेंगी, जिसका असर पूरे जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) पर पड़ेगा.

VIDEO: डॉलर और यूरो की वैल्यू बराबर, जानें आपके लिए हैं क्या मायने


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