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स्टॉक स्प्लिट करने वाली है Dr Reddy's, जानें इसके बारे में सबकुछ

फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज जल्द ही अपने शेयरों को विभाजित कर देगी. 27 जुलाई को इसे लेकर एक बैठक होनी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

दिग्गज फार्मा कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज  (Dr Reddy's Laboratories) अपने शेयरों को विभाजित करने वाली है. स्टॉक स्प्लिट के इस प्रस्ताव पर 27 जुलाई को होने वाली बोर्ड की मीटिंग में फैसला लिया जाएगा. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया है कि 5 रुपए फेस वैल्यू वाले शेयरों को स्प्लिट करने का प्रस्ताव है. बोर्ड की मंजूरी के बाद प्रस्ताव पर कंपनी के शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी. डॉ. रेड्डीज के शेयर आज नुकसान के साथ कारोबार कर रहे हैं. खबर लिखे जाने तक इसमें 0.37% की गिरावट आ गई थी. 

अब तक दिया अच्छा रिटर्न
डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में आज भले ही गिरावट आई हो, लेकिन इसका पिछला रिकॉर्ड अच्छा रहा है. बीते 5 दिनों में यह 2.93% चढ़ा है और इस साल अब तक 17 प्रतिशत से अधिक रिटर्न दे चुका है. इस कंपनी का मार्केट कैप 1.14 लाख करोड़ रुपए है. डॉ. रेड्डीज के शेयरहोल्डिंग पैटर्न की बात करें, तो जून 2024 के आखिर तक कंपनी में प्रमोटर्स के पास 26.65% और पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 73.18%  हिस्सेदारी थी. यह पहला मौका है जब डॉ. रेड्डीज अपने स्टॉक को स्प्लिट करने जा रही है. कंपनी ने हाल ही में वोनोप्राजन टैबलेट के कमर्शियलाइजेशन के लिए टेकेडा फार्मास्यूटिकल के साथ एक नॉन-एक्सक्लूसिव पेटेंट लाइसेंसिंग समझौता पर साइन किए हैं. रेड्डीज अपने ट्रेडमार्क VONO™ के तहत वोनोप्राजन की मार्केटिंग करेगी.

क्या होता है स्टॉक स्प्लिट?
अब बात स्टॉक स्प्लिट की निकली है, तो यह भी जान लेते हैं कि आखिर ये क्या होता है. जैसा कि नाम से ही समझ आ रहा है स्टॉक स्प्लिट यानी शेयरों का विभाजन. इस प्रक्रिया के तहत कंपनी स्टॉक एक्सचेंज को सूचित करके एक निर्धारित तिथि पर अपने शेयरों को एक निश्चित अनुपात में बांट देती है. जिस अनुपात में कंपनी स्टॉक स्प्लिट करती है, उसी अनुपात में शेयरहोल्डर्स के शेयरों में बदलाव हो जाता है. उदाहरण के तौर पर, यदि आपके पास किसी कंपनी के 400 शेयर हैं और कंपनी स्टॉक स्प्लिट लाकर 1 शेयर को 2 में तोड़ देती है, आपके पास कंपनी के 800 शेयर हो जाएंगे. हालांकि, इससे उसकी निवेश की वैल्यू पर कोई असर नहीं होगा.  

क्यों पड़ती है इसकी जरूरत?
जब कंपनी के शेयर की डिमांड काफी ज्यादा होती है, लेकिन उसकी ऊंची कीमत के चलते छोटे निवेशक ना चाहते हुए भी दूरी बना लेते हैं, तो कंपनी स्टॉक स्प्लिट करती है. इस प्रक्रिया से महंगा शेयर सस्ता हो जाता है और छोटे निवेशक आसानी से निवेश कर सकते हैं. डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज का शेयर इस समय 6,840.10 रुपए पर मिल रहा है. एक शेयर के लिए इतना बड़ा अमाउंट इन्वेस्ट करना हर किसी के बस की बात नहीं. लेकिन शेयरों के बंटवारे के बाद जब इसकी कीमत कम हो जाएगी, तो छोटे निवेशक भी इसमें पैसा लगा पाएंगे. कुल मिलाकर कहें तो कोई कंपनी स्टॉक स्प्लिट केवल इसलिए करती है, ताकि छोटे निवेशकों को आकर्षित किया जा सके.

मार्केट कैप होता है प्रभावित?
क्या स्टॉक स्प्लिट से कंपनी के मार्केट कैप पर भी कोई असर पड़ता है? इस सवाल का जवाब है -ना. चलिए इसे एक उदाहरण के जरिए समझते हैं. पिज्जा अक्सर 4 टुकड़ों में विभाजित होता है, लेकिन यदि आप छह लोग खाने वाले हों तो आप अपने हिसाब से उसे छह हिस्सों में भी बांट सकते हैं. क्या आपके ऐसा करने से पिज्जा का साइज घट या बढ़ जाएगा? निश्चित तौर पर नहीं. ठीक इसी तरह, स्टॉक स्प्लिट से केवल शेयर के टुकड़े होते हैं, इससे कंपनी के मार्केट कैप पर कोई असर नहीं पड़ता. बस शेयरों की संख्या बढ़ जाती है. रही बात निवेशकों के फायदे की, तो शेयरों के विभाजन से उनके पास डिमांड वाले शेयरों को कम कीमत में खरीदने का मौका मिल जाता है.
 


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