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पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कटौती से केंद्र पर पड़ेगा ₹1.1 लाख करोड़ का बोझ: SBI रिपोर्ट
सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए ईंधन की कीमतें स्थिर रखने का फैसला किया है, लेकिन इसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की गई है. हालांकि, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले से वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार को करीब ₹1.1 लाख करोड़ के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जनवरी 2026 में ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य 64.7 डॉलर प्रति बैरल था, जो मार्च तक बढ़कर 96.2 डॉलर प्रति बैरल हो गया. वहीं भारत का ऑयल बास्केट और अधिक बढ़कर 123.2 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.
इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे स्पष्ट है कि सरकार ने कीमतों का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डालने के बजाय खुद वहन करने का फैसला किया है.
ऑयल कंपनियों पर बढ़ा घाटा
बढ़ती लागत के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) पेट्रोल पर लगभग ₹24 प्रति लीटर और डीजल पर करीब ₹30 प्रति लीटर का नुकसान उठा रही हैं. इस दबाव को कम करने के लिए सरकार ने दोनों ईंधनों पर ₹10 प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी घटा दी है. कटौती के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹21.9 से घटकर ₹11.9 प्रति लीटर और डीजल पर ₹17.8 से घटकर ₹7.8 प्रति लीटर रह गई है.
सरकार ने लगाए अतिरिक्त टैक्स
राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने डीजल निर्यात पर ₹21.5 प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगाया है. साथ ही एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर विशेष अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी भी लागू की गई है, जो छूट के बाद प्रभावी रूप से ₹29.5 प्रति लीटर है. इसका उद्देश्य घरेलू आपूर्ति बढ़ाना और आंशिक रूप से नुकसान की भरपाई करना है.
राज्यों को हो सकता है फायदा
जहां एक ओर केंद्र सरकार को नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं राज्यों को वैट (VAT) के जरिए अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है. SBI रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा रुझान जारी रहने पर राज्यों को वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग ₹25,000 करोड़ की अतिरिक्त आय हो सकती है. केवल मार्च 2026 में ही राज्यों को बढ़ी हुई तेल कीमतों से करीब ₹2,500 करोड़ का अतिरिक्त लाभ मिला है.
VAT घटाने का दबाव बढ़ा
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि राज्यों के पास वैट दरों में कटौती करने की गुंजाइश है, ताकि केंद्र की एक्साइज कटौती के साथ मिलकर उपभोक्ताओं को और राहत दी जा सके. इससे केंद्र और राज्यों के बीच कर नीति में समन्वय की जरूरत भी सामने आई है.
रेटिंग एजेंसी का अनुमान और ज्यादा नुकसान का संकेत
इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च (Ind-Ra) के अनुसार, अगर कम एक्साइज दरें पूरे वित्त वर्ष 2026-27 तक जारी रहती हैं, तो केंद्र सरकार को करीब ₹1.70 लाख करोड़ तक का नुकसान हो सकता है. एजेंसी ने यह भी बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम स्थिर रखने से ऑयल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ा है, जिससे सरकार को यह कदम उठाना पड़ा.
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