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Tata Sons के IPO पर छिड़ा विवाद, RBI को भी कोर्ट ने भेजा नोटिस
Tata Sons का IPO के संबंध में कोर्ट ने RBI को नोटिस भेजा है. नोटिस में कहा गया है कि टाटा संस को लिस्टिंग से कैसे छूट देना कानूनी रूप से गलत है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
क्या आप भी टाटा संस (Tata Sons) के IPO का इंतजार कर रहे है. अगर हां, तो आपके लिए एक बुरी खबर है. दरअसल, शेयर बाजार के निवेशक उम्मीद कर रहे थे कि सितंबर 2025 तक टाटा संस का IPO बाजार में दस्तक देगा, लेकिन यह विवादों में फंसकर रह गया है. टाटा संस के आईपीओ का विवाद अब इतना बढ़ गया कि मामले में कोर्ट ने भी दखल दे दी है. कोर्ट ने इस मामले में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी नोटिस भेजा है. तो आइए जानते हैं क्या है से पूरा मामला?
आरबीआई को भेजा ये नोटिस
टाटा संस का विवाद और हितों का टकराव के चलते आरबीआई को लीगल नोटिस भेजा गया है. आरबीआई टाटा संस के आईपीओ न लाने पर विचार कर रहा है. ऐसे में इस नोटिस ने विवाद को और बढ़ा दिया है. नोटिस में दावा किया गया है कि वेणु श्रीनिवासन जब तक आरबीआई में हैं, तब तक टाटा संस के साथ उनका हितों का टकराव होता रहेगा, क्योंकि वे टाटा ट्रस्ट में भी हैं. एक कॉरपोरेट घराने का व्यक्ति अगर नियामक के बोर्ड में होगा तो ऐसी स्थिति में नियामक स्वतंत्र और निष्पक्ष फैसला लेगा, यह भी संभव नहीं है. बता दें, वेणु आरबीआई में 2022 से 2026 के लिए डायरेक्टर नियुक्त किए गए हैं.
आरबीआई पर भी उठे सवाल
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि आरबीआई टाटा संस आईपीओ के मामले में तमाम अनियमितताएं बरत रहा है. उदाहरण के तौर पर टाटा संस ने मुख्य निवेश कंपनी यानी सीआईसी के रूप में अपना पंजीकरण रद्द करने की मांग की है जो कि कानूनन गलत है. आरबीआई ने हाल में आरटीआई में कहा था कि वह टाटा संस के सीआईसी रद्द करने के आवेदन पर विचार कर रहा है. नोटिस में कहा गया है कि निवेशकों, बॉरोअर और आम जनता के हितों की रक्षा करने के लिए इस तरह के आवेदन पर विचार नहीं करना चाहिए. आरबीआई स्केल आधारित रेगुलेशन यानी एसबीआर को लाया था. इस एसबीआर में कुल 15 कंपनियों को अपर लेयर में रखा गया था, नियम के अनुसार इन सभी को सितंबर, 2025 के पहले शेयर बाजार में लिस्ट होना है. इसमें से 11 कंपनियां लिस्ट हो चुकी हैं, लेकिन टाटा संस सहित चार कंपनियां बाकी हैं.
टाटा संस को लिस्टिंग में नहीं मिल सकती छूट
नोटिस में कहा गया है कि जब 11 कंपनियों ने आरबीआई के नियमों का पालन किया तो फिर टाटा संस को लिस्टिंग से कैसे छूट दी जा सकती है. अगर छूट मिलती है तो यह पूरी तरह से कानूनन गलत होगा. नोटिस में आरोप लगाया गया है कि टाटा संस प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जनता का पैसा लेता है. भले ही उसने हाल में कर्ज चुकाकर लिस्टिंग से छूट मांगी है, पर वह इस सीआईसी को सरेंडर कर आरबीआई की स्क्रूटनी से बचना चाहता है. टाटा संस का आईपीओ देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा. यह अगर पांच पर्सेंट भी हिस्सा बेचता है तो इससे 55,000 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे.
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