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CCD पर संकट, कुल डिफॉल्ट बढ़कर ₹425.38 करोड़ हुआ, क्या बंद हो जाएगा मशहूर कैफे कॉफी डे?
कंपनी, जो अपनी संपत्तियां बेचकर कर्ज़ कम करने की कोशिश कर रही है, ने एक सरकारी दस्तावेज़ में बताया कि उसने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए गए कर्ज़ की किस्तें नहीं चुकाई हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
Coffee Day Enterprises Ltd (CDEL) ने बताया कि उसने ₹425.38 करोड़ (करीब 51 मिलियन डॉलर) के कर्ज का भुगतान नहीं किया है (31 मार्च 2025 तक). कंपनी ने इसकी वजह पैसों की भारी कमी और कर्ज देने वालों के साथ चल रहे कानूनी झगड़े को बताया है. कंपनी ने कहा कि कई बैंकों ने उसे नोटिस भेजा है और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.
कंपनी पहले से ही अपनी प्रॉपर्टी बेचकर कर्ज चुकाने की कोशिश कर रही है. अब उसने सरकार को जानकारी दी है कि ये चूक (डिफॉल्ट) बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए गए कर्ज और कुछ खास तरह के बॉन्ड जैसे NCDs (non-convertible debentures) और NCRPS (non-convertible redeemable preference shares) पर हुई है. CDEL ने बताया कि उसने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए गए लोन पर ₹174.83 करोड़ का मूलधन (original loan amount) और ₹5.78 करोड़ का ब्याज नहीं चुकाया. इसके अलावा, कंपनी ने ₹200 करोड़ का मूलधन और ₹44.77 करोड़ का ब्याज NCDs और NCRPS पर भी नहीं चुकाया.
कंपनी ने कहा कि कई बैंकों ने उसे नोटिस भेजा है और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. इसी कारण अप्रैल 2021 से कंपनी ने ब्याज जोड़ना बंद कर दिया है, क्योंकि मामला अभी तक सुलझा नहीं है और एक बार की सेटलमेंट की बात चल रही है. CDEL को 2019 में कंपनी के संस्थापक वी.जी. सिद्धार्थ की मौत के बाद से ही आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, मार्च 2020 में कंपनी ने अपनी टेक्नोलॉजी पार्क बेचकर 13 बैंकों को ₹1,644 करोड़ चुका दिए थे.
अगस्त 2024 में, IDBI Trusteeship Services Ltd ने CDEL के खिलाफ ₹228.45 करोड़ के बकाया को लेकर दिवालिया प्रक्रिया (insolvency) शुरू करने की याचिका डाली, जिसे NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) ने स्वीकार कर लिया. इसके बाद कंपनी ने ऊपरी अदालत NCLAT में अपील की, और 14 अगस्त को इस प्रक्रिया पर रोक लग गई. CDEL अब ₹3,535 करोड़ की वसूली के लिए कानूनी कदम उठा रही है, जो कंपनी का दावा है कि Mysore Amalgamated Coffee Estates Ltd में गलत तरीके से ट्रांसफर कर दिया गया था. ये कंपनी वी.जी. सिद्धार्थ द्वारा शुरू की गई थी.
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