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इस कोल्ड ड्रिंक का पुराना रुतबा वापस लौटा रहे अंबानी, मिलेगी कोका-कोला और पेप्सिको को टक्कर

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पिछले साल कैंपा कोला को करीब 22 करोड़ रुपये में खरीदा था, जिसने वित्त वर्ष 2023-24 में रिलायंस की कमाई में करीब 400 करोड़ रुपये का इजाफा किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारत का सॉफ्ट ड्रिंक बाजार आज तेजी से उभर रहा है. छोटी दुकानों से लेकर बड़े—ड़े रेस्तरां और होटल में सॉफ्ट ड्रिंक परोसी जाती है. ऐसे में 2027 तक भारत का सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट 11 अरब डॉलर हेने का अनुमान है. भारत में शुरुआत से ही सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में विदेशी कंपनियों का ही दबदबा था, लेकिन दिग्गज कारोबारी मुकेश अंबानी के भारतीय ब्रैंड कैंपा कोला को खरीदने के बाद उम्मीद है यह कोका कोला और पेप्सिको को टक्कर देगा. तो चलिए आज आपको बताते हैं भारत में कैंपा कोला की शुरुआत कैसे हुई थी?

फिलहाल दो ही अमेरिकी कंपनियों का दबदबा
इतने बड़े सॉफ्ट ड्रिंक सेगमेंट में केवल दो ही अमेरिकी कंपनियों का कब्जा है, जिसमें कोका कोला और पेप्सिको का नाम शामिल है. कोका कोला का मार्केट कैप 266 और पेप्सिको का 244 अरब डॉलर के आसपास है. दोनों के दबदबे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तीसरे नंबर पर मौजूद केयूरिग डॉ. पेपर (Keurig Dr Pepper) सिर्फ 46 अरब डॉलर है. 

एक समय कैंपा कोला का था दबदबा
आज कोई भी भारतीय ब्रैंड दुनिया की टॉप सॉफ्ट ड्रिंक कंपनियों के आसपास भी नहीं है, लेकिन, हमेशा से ऐसा नहीं था. एक वक्त था, जब भारतीयों के पास अपना देसी सॉफ्ट ड्रिंक ब्रैंड कैंपा कोला था, जिसके स्वाद का हर कोई दीवाना था. भारत में शुरुआत से ही सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में विदेशी कंपनियों का ही दबदबा था, लेकिन 1977 में इमरजेंसी हटने के बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार हुई और जनता पार्टी की सरकार बनी. नई सरकार की नीतिगत बदलावों के चलते भारतीय बाजार का स्वरूप ही बदल गया और कैंपा कोला देसी सॉफ्ट ड्रिंक ब्रैंड के रूप में तेजी से उभरी. 

इश्तिहारों के दम पर बढ़ाई पहुंच
आपको बता दें, कैंपा कोला शत प्रतिशत कोका कोला की नकल था. कंपनी ने 16 साल के नौजवान सलमान खान को अपना ब्रैंड अंबेसडर बनया और उनके साथ विज्ञापन में जैकी श्रॉफ की पत्नी आयशा भी थीं, जिससे लोग कैंपा कोला के प्रति खूब आकर्षित हुए. वहीं, कैंपा कोला का जोर 'राष्ट्रवादी साख' पर भी था, क्योंकि यह विशुद्ध 'मेड इन इंडिया' ब्रैंड था. कंपनी ने शुरुआत में भले ही नौजवानों पर फोकस किया, बाद में बुजुर्गों से लेकर बच्चे तक इसके खरीदार बन गए.

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कैसे खत्म हुआ कैंपा कोला का जादू?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साल 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया. इससे विदेशी कंपनियों के लिए लचीली शर्तों के साथ भारत आने का रास्ता खुल गया. इस फैसले ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नया जीवनदान दिया, लेकिन देसी कंपनियों के लिए यह काफी बड़ा झटका था. कैंपा कोला और थम्स अप ने इसका विरोधसभी किया, लेकिन वो इनके आगे टिक नहीं पाए. थम्स अप को तो कोका कोला ने ही खरीद लिया और फिर कैंपा कोला भी धीरे-धीरे मार्केट से गायब हो गया. 

रिलायंस की कमाई में 400 करोड़ रुपये का इजाफा कराया
आपको बता दें, अरबपति कारोबारी मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पिछले साल अपने फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) कारोबार को बढ़ाने के लिए कैंपा कोला को करीब 22 करोड़ रुपये में खरीदा था. यह रिलायंस की उम्मीदों पर बिल्कुल खरा भी उतरा है. इसने वित्त वर्ष 2023-24 में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की कमाई में करीब 400 करोड़ रुपये का इजाफा किया है. इस दौरान कोला कोला की ऑपरेशन से आमदनी लगभग 4,500 करोड़ रुपये रही. इसका मतलब कि कैंपा कोला की कमाई कोका कोला के रेवेन्यू का करीब दसवां हिस्सा है. भारत के 50,000 करोड़ रुपये के सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में कोका कोला के दबदबे को देखते हुए कैंपा की यह बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी. अब कैंपा कोला के सिर पर रिलायंस ग्रुप का हाथ है और रिलायंस के पास हर चुनौती से निपटने के लिए पैसों के साथ क्षमता भी है. 

 


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