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भारत में 9 महीनों में पहली बार घटी कोयले की आपूर्ति, जानें कारण
कोयला आधारित बिजली उत्पादन और रेलवे ढुलाई में भी गिरावट आई. आने वाले महीनों में मौसम और औद्योगिक गतिविधियाँ इस प्रवृत्ति की दिशा तय करेंगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत में कोयले की देशव्यापी आपूर्ति (डिस्पैच) मई 2025 में साल-दर-साल 1.91 प्रतिशत घटकर 89.22 मिलियन टन (MT) रह गई है. यह बीते नौ महीनों में पहली बार है जब कोयले की वार्षिक आपूर्ति में गिरावट दर्ज की गई है. कोयला मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस गिरावट का मुख्य कारण बिजली क्षेत्र की मांग में कमी रही, जो असामयिक बारिश और अपेक्षाकृत ठंडे मौसम के कारण आई है.
हालांकि महीने-दर-महीने तुलना में कोयले की आपूर्ति में लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, लेकिन कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की ओर से हुई 5.69 प्रतिशत वार्षिक गिरावट ने कुल आंकड़ों को प्रभावित किया. CIL ने मई में 65.40 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की, जो पिछले तीन महीनों में उसकी पहली सालाना गिरावट है.
इसके विपरीत, सिंगरेनी कोलियरीज़ कंपनी लिमिटेड (SCCL) और कैप्टिव/अन्य खनिकों ने क्रमशः 3.36 प्रतिशत और 12.58 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की.
बिजली क्षेत्र को कोयले की आपूर्ति मई में 1.68 प्रतिशत घटकर 72.98 मिलियन टन रही. गैर-विनियमित क्षेत्रों (NRS) को आपूर्ति में भी 2.91 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. स्पंज आयरन और अन्य उद्योगों में गिरावट आई, जबकि इस प्रवृत्ति के विपरीत इस्पात और सीमेंट उद्योगों ने क्रमशः 6.66 प्रतिशत और 15.24 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की.
कोयले पर आधारित बिजली उत्पादन में भी बड़ी गिरावट देखी गई, जो मई में 9.27 प्रतिशत तक घटी. यह बिजली की समग्र मांग में आई कमी को दर्शाता है. इसके साथ ही, रेलवे के माध्यम से कोयले की ढुलाई में भी 1.88 प्रतिशत की सालाना गिरावट दर्ज की गई, जो औसतन 318.7 रेक्स प्रतिदिन रही.
विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में गिरावट और मानसून की समय से पहले दस्तक से बिजली की खपत में कमी आई है, जिससे कोयले की मांग और आपूर्ति दोनों पर असर पड़ा है. आने वाले महीनों में मानसून की प्रगति और औद्योगिक गतिविधियों की चाल इस प्रवृत्ति को तय करेगी.
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