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केंद्र सरकार ने लिया बड़ा फैसला, बढ़ सकती हैं PNG-CNG की कीमतें, जानिए क्यों?
सरकार द्वारा प्राकृतिक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर सीएनजी और पीएनजी की दरों पर पड़ सकता है, जिससे आम जनता को आर्थिक रूप से प्रभावित होने की संभावना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस के दाम बढ़ाने का फैसला लिया है, जिससे पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतों में वृद्धि की संभावना बन गई है. सरकार के इस फैसले से देशभर में सीएनजी और पीएनजी उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में महंगाई का सामना करना पड़ सकता है. सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले का असर घरेलू उपभोक्ताओं और सार्वजनिक परिवहन पर पड़ सकता है.
एपीएम गैस की कीमतों में इजाफा
पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के नोटिफिकेशन के अनुसार, एडमिनिस्टर्ड प्राइसिंग मैकेनिज्म (APM) गैस की कीमत को 6.50 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से बढ़ाकर 6.75 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू कर दिया गया है. यह दो वर्षों में पहली बार हुआ है कि एपीएम गैस की कीमतें बढ़ाई गई हैं. APM गैस मुख्य रूप से सरकारी तेल कंपनियों ओएनजीसी (ONGC) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) द्वारा उन क्षेत्रों से उत्पादित की जाती है, जो सरकार द्वारा नॉमिनेट किए जाते हैं. इस गैस का उपयोग सीएनजी, उर्वरक उत्पादन और बिजली संयंत्रों के लिए किया जाता है.
कैसे तय होती हैं प्राकृतिक गैस की कीमतें?
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2023 में एक नई गैस मूल्य निर्धारण नीति लागू की थी, जिसमें घरेलू प्राकृतिक गैस की कीमत को कच्चे तेल के औसत आयात मूल्य के 10% पर निर्धारित किया गया था. सरकार ने न्यूनतम 4 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू और अधिकतम 6.5 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू की सीमा तय की थी. इस नीति के तहत, गैस की कीमतों में सालाना 0.25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू की वृद्धि की जाएगी. सोमवार को घोषित की गई यह वृद्धि उसी नीति का हिस्सा है.
एक साल तक प्रभावी रहेंगी नई कीमतें
PPAC के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक APM गैस की नई कीमत 6.75 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू रहेगी. अगले वर्ष अप्रैल 2026 में इसमें 0.25 डॉलर की और वृद्धि होगी. बता दें, अप्रैल 2023 से पहले APM गैस की कीमतें छमाही आधार पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों के अनुसार तय की जाती थीं. लेकिन नई नीति लागू होने के बाद, अब मासिक आधार पर मूल्य संशोधित किया जाता है, हालांकि यह तय सीमा के भीतर रहता है.
आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
गैस की कीमतें बढ़ने से सीएनजी और पीएनजी के दामों में भी बढ़ोतरी हो सकती है. इसका सीधा असर वाहन मालिकों, घरेलू उपभोक्ताओं और उर्वरक उद्योगों पर पड़ेगा. साथ ही, परिवहन लागत बढ़ने से अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं. सरकार की इस नीति का उद्देश्य स्थानीय गैस उत्पादकों को प्रोत्साहित करना है, लेकिन इससे आम जनता पर वित्तीय दबाव भी बढ़ सकता है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार सीएनजी और पीएनजी के दामों को नियंत्रित रखने के लिए कोई राहत उपाय लाती है या नहीं.
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