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दाल उत्पादन बढ़ाने के लिए 11,440 करोड़ रुपये की बड़ी योजना को कैबिनेट की मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल के ये फैसले भारत की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश के विकास और किसानों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. इस बैठक में सबसे खास निर्णय दालों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए 11,440 करोड़ रुपये के व्यापक मिशन की शुरुआत करने का रहा. साथ ही, शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए देशभर में 57 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने को भी मंजूरी दी गई है. ये कदम न केवल कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाएंगे, बल्कि भविष्य की पीढ़ी को बेहतर शिक्षा के अवसर भी प्रदान करेंगे.
दालों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
कैबिनेट द्वारा मंजूर ‘दालों में आत्मनिर्भरता मिशन’ वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक चलेगा. इसका उद्देश्य दालों का उत्पादन बढ़ाकर भारत की आयात पर निर्भरता कम करना और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है. इस मिशन में रिसर्च, बीज उत्पादन, खेती का रकबा बढ़ाने, कीमतों में स्थिरता और खरीद प्रणाली को बेहतर बनाने पर जोर होगा. किसानों को 88 लाख बीज किट मुफ्त में दिए जाएंगे और टिकाऊ खेती के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे.
खेती का दायरा और उत्पादन लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य है कि दालों की खेती का रकबा 310 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाया जाए. वर्तमान स्तर से 35 लाख हेक्टेयर ज्यादा भूमि दाल की खेती के लिए तैयार की जाएगी.
- उत्पादन बढ़कर 350 लाख टन तक पहुंचाने की योजना है.
- प्रति हेक्टेयर उपज 1,130 किलोग्राम तक बढ़ाई जाएगी.
- साल 2030-31 तक 126 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे.
इससे न केवल भारत दालों में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी और खेती के टिकाऊ मॉडल को बढ़ावा मिलेगा.
किसानों को मिलेगा सहारा: MSP में बढ़ोतरी
मंत्रिमंडल ने रबी की फसलों के लिए 842 अरब रुपये की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मंजूरी दी. यह कदम किसानों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगा.
नए केंद्रीय विद्यालय के लिए 5,862.55 करोड़ रुपये का खर्च
शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लेते हुए कैबिनेट ने देशभर में 57 नए केंद्रीय विद्यालय (KVs) खोलने को मंजूरी दी. इसके लिए 5,862.55 करोड़ रुपये का खर्च नौ साल में किया जाएगा.
इसमें 2,585.52 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय और 3,277.03 करोड़ रुपये परिचालन व्यय पर खर्च होंगे. पहली बार इन विद्यालयों में बालवाटिका (प्री-प्राइमरी स्तर) भी शामिल होगा.
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