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BW MarketWorld: एक्सपर्ट्स ने बताया पिछले कुछ सालों में कितनी बदल गई मार्केटिंग
BW Businessworld द्वारा दिल्ली में आयोजित इवेंट में मार्केटिंग की दुनिया की दिग्गज हस्तियां अपने विचार व्यक्त कर रही हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
पिछले कुछ सालों में मार्केटिंग की दुनिया ने कई बदलाव महसूस किए हैं. खासकर कोरोना महामारी ने मार्केटिंग के तौर-तरीकों को काफी हद तक बदल दिया है. ऐसे में इंडस्ट्री एक्सपर्ट इस बारे में क्या सोचते हैं और वह किस तरह के बदलाव महसूस कर रहे हैं, इसकी जानकारी BW बिजनेसवर्ल्ड (BW BusinessWorld) द्वारा आयोजित ‘फेस्टिवल ऑफ मार्केटिंग’ में मिली. देश की राजधानी नई दिल्ली में चल रहे इस कार्यक्रम में मार्केटिंग की दुनिया की दिग्गज हस्तियां शिरकत कर रही हैं.
इन्होंने की डिस्कशन में शिरकत
कार्यक्रम के दौरान आयोजित पैनल डिस्कशन में Nastle India के डायरेक्टर एवं सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (स्ट्रेटेजी, मार्केटिंग एवं कम्युनिकेशन) चंदन मुखर्जी, HCL Software के डायरेक्टर (डिजिटल एक्सपीरियंस एवं कॉमर्स) हिमांशु खन्ना, Hyundai India के ग्रुप हेड मार्केटिंग विराट खुल्लर ने मार्केटिंग के विभिन्न पहलुओं, उसकी चुनौतियों और बदलावों पर प्रकाश डाला. सेशन चेयर के तौर पर Intel Solutions & Services India की जनरल मैनेजर एवं रीजनल CMO (एशिया पैसिफिक एवं जापान - मार्केटिंग एवं पार्टनर स्केल) रोशनी दास उपस्थित रहीं. दास ने इंडस्ट्री से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनके जवाब सभी गेस्ट ने बेहतरीन अंदाज में दिए.
भारत कंजप्शन ड्रिवन इकॉनमी
Nastle India के डायरेक्टर एवं सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (स्ट्रेटेजी, मार्केटिंग एवं कम्युनिकेशन) चंदन मुखर्जी ने कहा कि हमारे आसपास बहुत कुछ बदल रहा है. भारत कंजप्शन ड्रिवन इकॉनमी है. कंजप्शन के लिहाज से अभी देश में काफी संभावनाएं हैं और मार्केटियर के तौर पर हमें इन सभी संभावनाओं को एक्सप्लोर करना है. मुखर्जी ने आगे कहा कि मौजूदा वक्त में ऐसे कई पहलू हैं, जिन पर हमें पहले के मुकाबले ज्यादा ध्यान देना है. डिजिटलाइजेशन से बहुत कुछ बदल गया है. हमें उस बदलाव के साथ कदमताल मिलाना है. AI के आने के बाद बहुत कुछ तेजी से बदल रहा है, जो हमारे लिए अवसर भी है और चिंता का विषय भी. हालांकि, इस बदलते परिवेश में कुछ ऐसा भी है जो स्थिर है और वो है फंडामेंटल.
हॉट टॉपिक बन गया है AI
AI पर बात आगे बढ़ाते हुए चंदन मुखर्जी ने कहा कि AI यानी आर्टिफिशल इंटेलीजेंस 2023 में एक बेहद हॉट टॉपिक बन गया है. हालांकि, ऐसा नहीं है कि ये टेक्नोलॉजी पहले नहीं थी. पहले भी इस पर काम होता है, मगर अब इसमें तेजी आ गई है. अक्सर इस तरह के सवाल उठते रहे हैं कि मैन बनाम मशीन या मैन एंड मशीन. हमारा मानना है कि मैन एंड मशीन कहना ज्यादा सही होगा. क्योंकि दोनों साथ मिलकर बेहतर काम कर सकते हैं. कुछ काम ऐसे हैं, जहां मशीन बेहतर कर सकती है तो हमें मशीन पर फोकस करना चाहिए. वहीं कुछ काम ऐसे भी हैं जहां मैन या वुमन ज्यादा बेहतर कर सकते हैं. हम अलग-अलग तरीके से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. मुखर्जी के मुताबिक, टेक्नोलॉजी भविष्य में ज्यादा विकसित होंगी, तब उन पर ज्यादा भरोसा किया जा सकेगा. आजकल पर्सनलाइजेशन में भी AI का इस्तेमाल बढ़ा है. उन्होंने यह भी कहा कि देश में प्रति व्यक्ति खपत काफी कम है, इसलिए ग्रोथ की सम्भावना ज्यादा है.
कंजप्शन पैटर्न में आ रहा बदलाव
Hyundai India के ग्रुप हेड मार्केटिंग विराट खुल्लर ने कहा कि हम खुद कंजप्शन पैटर्न बदल रहे हैं. अपने घर, ऑफिस में आप ब्रैंड कंजप्शन बदल रहे हैं, मीडिया कंजप्शन बदल रहे हैं. कोरोना काल में इसमें सबसे बड़ा बदलाव आया था और कोरोना के बाद भी सबकुछ बदला है. केवल मार्केटिंग ही नहीं, क्रिकेट, मीडिया सभी में बदलाव देखने को मिला है. आज हर कोई नई दुनिया में रीफॉर्मेट कर रहा है. मार्केटिंग से जुड़े होने के नाते हमें न केवल आज के कंजप्शन पैटर्न को देखना है बल्कि अगले 2 साल, 4 साल के पैटर्न का भी ख्याल रखना है. हमें ग्राहक के कंजप्शन बेहिवियर को ट्रैक करना है और उसके अनुरूप काम करना है.
ChatGPT ने बहुत कुछ सिखाया
HCL Software के डायरेक्टर (डिजिटल एक्सपीरियंस एवं कॉमर्स) हिमांशु खन्ना ने कहा - हम टेक्नोलॉजी बिजनेस में हैं, हम पर बदलावों का असर सबसे ज्यादा होता है. हमें अपने ग्राहकों के बिजनेस पैटर्न को समझना होता है. मैं सभी की बातों से सहमत हूं कि पिछले कुछ साल बदलावों के नाम रहे हैं और AI जैसी टेक्नोलॉजी ने इन बदलावों को तेजी से आगे बढ़ाया है. हमारा पूरा इको-सिस्टम AI पर केन्द्रित हो गया है. चैटGPT ने हमें कई बिन्दुओं पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर दिया है.
ब्रैंड बिल्डिंग पर फोकस जरूरी
विराट खुल्लर ने AI पर बोलते हुए कहा कि AI के बारे में बहुत सी अच्छी बातें हैं लेकिन गाहकों के साथ सीधे डील करते समय हमें काफी सतर्क रहने की जरूरत होती है. AI पहले से थी लेकिन अब ज्यादा विकसित हो गई है. हम बहुत से कंज्यूमर फेसिंग AI टूल के पायलट प्रोजेक्ट पर चला रहे हैं, लेकिन हम किसी के साथ लाइव नहीं गए हैं. क्योंकि यदि हम अपनी किसी कार को पूरी तरह अपग्रेड करते हैं तो हमें ग्राहक को सटीक तौर पर बताना होगा कि नई कार क्या ऑफर कर रही है, ये नहीं कि उसने पिछली बार क्या ऑफ़र किया था या आगे क्या ऑफर करेगी. जहां तक बात AI के मनुष्यों को नकारात्मक तौर पर प्रभावित करने की है, तो कंप्यूटर के समय भी यही कहा गया था, मगर प्रोसेसिंग ने केवल हमारी मदद ही की. AI के साथ भी यही है. मार्केटिंग से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि लॉन्ग टर्म ब्रैंड बिल्डिंग और शॉर्ट टर्म डिमांड जनरेशन में संतुलन मार्केटियर के लिए कोई नई बात नहीं है. लोग सही मायनों में प्रोडक्ट से पहले ब्रैंड खरीदते हैं तो ब्रैंड बिल्डिंग ऐसा विषय है जिसपर सबसे ज्यादा फोकस होना चाहिए.
युवा ज्यादा खरीद रहे कार
कंज्यूमर फंडामेंटल पैटर्न में बदलाव पर बोलते हुए विराट खुल्लर ने कहा कि पिछले 4 सालों में इस पैटर्न में बदलाव देखने को मिला है. उदाहरण के तौर पर एवरेज बाइंग ऐज लगातार कम हो रही है. कारों की सेल भी इन 4 सालों में बढ़ी है. अब ज़्यादातर युवा हमारी कारें खरीद रहे हैं. ज्यादा फीचर पैक्ड प्रोडक्ट उनकी पहली पसंद होते हैं. मौजूदा समय में कार खरीदने का निर्णय परिवार के सभी लोग लेते हैं, जबकि पहले यह फैसला अमूमन पुरुष लेते थे.
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