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BW Marketing World: Gen Z सबसे ज्यादा विरोधाभासी कम्युनिटी है
ये कम्युनिटी सेल्फी में इंट्रेस्ट रखती है जबकि दूसरी ओर इनके बारे में ये भी कहा जाता है कि अगर इन्हें आप पर विश्वास नहीं है तो उसे लेकर एक्सपेरीमेंट भी नहीं करेंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
BW Marketing के दिल्ली में चल रहे इवेंट के एक पैनल चर्चा में पहुंचे मार्केटिंग की दुनिया के अलग-अलग एक्सपर्ट ने कई बातें कहीं. इस इवेंट में वैसे तो कई विषयों को लेकर पैनल डिस्कशन हुआ लेकिन Gen Z को लेकर हुई एक चर्चा में कई अहम बातें निकलकर आई. इस सेशन में पहुंचे लोगों ने कहा कि इस आयु वर्ग के लोगों के बारे में किसी एक बात को नहीं कहा जा सकता है. इस पैनल को बिजनेस वर्ल्ड की ग्रुप एडिटर नूर वार्सिया ने संचालित किया. कार्यक्रम में बिजनेस वर्ल्ड समूह के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ डॉ.अनुराग बत्रा भी मौजूद रहे.
कई विरोधाभासों से भरी कम्युनिटी है Gen Z
Communicator और Marketer & Learner Karthi Marshan ने Gen Z के बारे में अपनी बात रखते हुए कहा कि मैं आपको बताना चाहूंगा कि कोई कहता है कि ये लोग सेल्फी लेते रहते हैं या ये बड़े सेल्फ सेंटर्ड होते हैं लेकिन इनके बारे में मैं जो जानता हूं उसके अनुसार उम्र कोई भी हो अब वो भले ही 40 हो 50 हो 60 हो वो सभी लोग सेल्फी लेते हैं और सेल्फ सेंटर्ड होते हैं. एक ओर इनके बारे में कहा जाता है कि ये लोग सुपर सोशली अवेयर होते हैं, ये लोग ऐसे ब्रैंड को महत्व नहीं देते हैं जिस पर ये भरोसा नहीं करते हैं, इसमें कुछ सच हो सकता है. लेकिन एक ओर हम देखते हैं कि इसी उम्र के कुछ लोग हमेशा स्विगी से ऑर्डर करते रहते हैं. कुल मिलाकर मैं ये कहना चाहूंगा कि Gen z कई तरह के विरोधाभासों से भरे हुए होते हैं. इसलिए उन्हें किसी एक कैटेगिरी में बांधना सही नहीं है.
अलग तरह से सोचती है ये कम्युनिटी
Ashish Mishra EVP Marketing – ACKO ने कहा कि 4 साल बाद इस उम्र के लोग 30 के हो जाएंगे और उसके बाद उन्हें इंश्योरेंस की जरूरत होगी. उनके पास एक मजबूत परचेजिंग पॉवर होगी. इसके कई सेगमेंट अभी प्रॉफिटेबल नहीं हो सकते हैं, लेकिन आगे चलकर ये बहुत प्रॉफिटेबल होंगे. मेरा 25 साल का कजिन है और उसके फोन के ऐप मुझसे बिल्कुल अलग हैं. वो मुझसे बिल्कुल अलग म्यूजिक सुनता है, इसलिए आप ये नहीं कह सकते हैं कि मैं इन्हें ठीक से पहचानता हूं.
3 T से हो सकता है इसका सही आंकलन
Amit Tiwari, Global Head of Marketing Demand Centre, TCS ने इस मसले को लेकर कहा कि मुझे लगता है कि इसे आप दो तरह से देख सकते हैं, या तो आप इन्हें डेमोग्राफी के अनुसार देख सकते हैं या आप इन्हें बिहेवियरल तरीके से देख सकते हैं. अगर किसी 50 साल के आदमी की सोच और काम भी वैसे ही हैं तो आप उसे ये कहकर नहीं नकार सकते हैं कि वो 50 साल का है. मुझे लगता है इसे हमें 3 T से देखना होगा. इसे ट्रस्ट, ट्रांसपेरेंसी और टेक्नोलॉजी से देखना होगा. इन तीनों के अनुसार अगर हम देखें तो मुझे लगता है कि हम इनका सही आंकलन कर पाएंगे. हम इनका वर्तमान भी समझ पाएंगे और भविष्य भी समझ पाएंगे.
अगर उन्हें आपके ब्रैंड पर भरोसा नहीं है तो वो उसे लेकर प्रयोग तक नहीं करेंगे. अगर उन्हें ब्रैंड में ट्रांसपेरेंसी नहीं दिखती है तो भी वो आपके ब्रैंड को नहीं पसंद करेंगे. इसमें टेक्नोलॉजी भी अहम है अब आप उन्हें ऐप के जरिए कुछ दे रहे हैं या दूसरी कोई सुविधा दे रहे हैं तो उसे देखने का नजरिया अलग हो सकता है. लेकिन वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जो ऐसा कुछ भी नहीं करते हैं लेकिन वो सबसे फेमस ब्रैंड बने हुए हैं. आप उसके लिए फिलिप्स का उदाहरण ले सकते है. वो इसे कभी इस तरह से नहीं देखते हैं और आज भी सबसे ज्यादा प्रोडक्ट सेल करते हैं.
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