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ब्रिक्स घोषणा से भारत के MSME और निर्यातकों को मिल सकते हैं नए कारोबारी मौके: PHDCCI

PHDCCI के मुताबिक, व्यापार सुगमता, सस्ती वित्तीय व्यवस्था, सीमा पार भुगतान और तकनीकी सहयोग से भारतीय कंपनियों को उभरते बाजारों में विस्तार का अवसर मिल सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा (BRICS New Delhi Declaration) भारत के उद्योग जगत के लिए व्यापार, निवेश और विनिर्माण के नए अवसर खोल सकती है. पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के मुताबिक, घोषणा में व्यापार सुगमता, किफायती वित्त, भुगतान व्यवस्था, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी सहयोग पर जोर दिए जाने से भारतीय कंपनियों की उभरते बाजारों में भागीदारी बढ़ सकती है.

पीएचडीसीसीआई का कहना है कि इसका फायदा खास तौर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), निर्यातकों, विनिर्माण कंपनियों और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियों को मिल सकता है. इससे भारत के वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) में और गहराई से जुड़ने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं.

एमएसएमई और व्यापार वित्त पर जोर

घोषणा में एमएसएमई को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया है. पीएचडीसीसीआई के अनुसार, छोटे कारोबारों के लिए सस्ती वित्तीय व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी की बड़ी चुनौती है.

निर्यात आधारित एमएसएमई के लिए ऋण आकलन से जुड़े मार्गदर्शक सिद्धांत और इनवॉइस डिस्काउंटिंग मैकेनिज्म के अध्ययन का प्रस्ताव छोटे कारोबारों के लिए कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है. इससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कारोबार बढ़ाने में आसानी हो सकती है.

पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को भारतीय उद्योग के लिए ठोस अवसरों में बदलने का महत्वपूर्ण मौका देती है. उन्होंने कहा कि इसका वास्तविक प्रभाव सीमा पार व्यापार और निवेश को सस्ता, तेज और आसान बनाने वाले उपायों से आएगा.

सीमा पार भुगतान से कारोबार को मिल सकती है राहत

पीएचडीसीसीआई के अनुसार, बेहतर सीमा पार भुगतान व्यवस्था भारतीय कारोबारों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. घोषणा में भुगतान और संदेश भेजने वाले चैनलों के बीच बेहतर तालमेल के लिए काम जारी रखने के साथ-साथ ब्रिक्स की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और निवेश पर चर्चा का समर्थन किया गया है. बेहतर भुगतान व्यवस्था से अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में आने वाली दिक्कतें कम हो सकती हैं. इससे ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है.

विनिर्माण और निवेश सहयोग को बढ़ावा

ब्रिक्स घोषणा सदस्य देशों के बीच विनिर्माण और निवेश सहयोग को मजबूत करने का व्यापक ढांचा भी उपलब्ध कराती है. ब्रिक्स देशों ने मजबूत और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं की जरूरत पर जोर दिया है. साथ ही, वैश्विक विनिर्माण और उत्पादन के अधिक मूल्य वाले क्षेत्रों में उभरते बाजारों की भागीदारी बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया है.

पीएचडीसीसीआई के अनुसार, व्यापार, निवेश, तकनीक हस्तांतरण और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के माध्यम से भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं. इससे भारत केवल पारंपरिक आयात-निर्यात संबंधों तक सीमित रहने के बजाय उत्पादन और निवेश साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ सकता है.

बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स पर भी फोकस

घोषणा में बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और विकास वित्त पर जोर भारत की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत कर सकता है. इसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग का स्वागत किया गया है. इसके अलावा, निजी पूंजी जुटाने और वित्तीय लागत कम करने के लिए बहुपक्षीय गारंटी की भूमिका पर भी जोर दिया गया है.

टिकाऊ परिवहन बुनियादी ढांचे और मजबूत लॉजिस्टिक्स आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग से भारत की कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है. इससे देश के वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में और मजबूती से जुड़ने में मदद मिल सकती है.

डिजिटल और हरित अर्थव्यवस्था में अवसर

ब्रिक्स घोषणा में डिजिटल बदलाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हरित अर्थव्यवस्था, जलवायु वित्त और मजबूत बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया गया है. पीएचडीसीसीआई के मुताबिक, इन क्षेत्रों में भारतीय प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा, स्वच्छ ऊर्जा और सेवा क्षेत्र की कंपनियों के लिए नए अवसर बन सकते हैं. इससे ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग का दायरा पारंपरिक वस्तु व्यापार से आगे बढ़कर तकनीक और निवेश साझेदारी तक पहुंच सकता है.

घोषणा के अमल पर निर्भर करेगा वास्तविक फायदा

पीएचडीसीसीआई ने कहा कि ब्रिक्स से मिलने वाले आर्थिक लाभ अंततः घोषणा में किए गए प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन और कारोबार के स्तर पर मिलने वाले नतीजों पर निर्भर करेंगे.

बाजार तक पहुंच, व्यापार वित्त, भुगतान, लॉजिस्टिक्स, निवेश और तकनीकी सहयोग के लिए व्यावहारिक व्यवस्था तैयार करना जरूरी होगा. तभी ब्रिक्स सहयोग से भारतीय कंपनियों और व्यापक अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक फायदा मिल सकेगा.

पीएचडीसीसीआई के एसजी और सीईओ डॉ. रणजीत मेहता ने कहा कि ब्रिक्स भारत को पारंपरिक आयात-निर्यात संबंधों से आगे बढ़कर उत्पादन, निवेश और तकनीक साझेदारी की दिशा में ले जाने का अवसर देता है. उन्होंने कहा कि भारत मजबूत वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण में भागीदार बन सकता है. इससे देश और ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों में विनिर्माण, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं.
 


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