होम / बिजनेस / इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बूम : FY26 की पहली तिमाही में निविदाएं छह गुना बढ़ीं
इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बूम : FY26 की पहली तिमाही में निविदाएं छह गुना बढ़ीं
वित्त वर्ष 2026 की शुरुआत में भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर ने तेज गति पकड़ी है, लेकिन चुनौतियां अभी बरकरार हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है. निविदाओं और ऑर्डरों में सालाना आधार पर बड़ा उछाल आया है. मई 2025 में कुल निविदाएं 6.4 गुना बढ़कर 1.26 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गईं, जो मासिक आधार पर 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है. हालांकि यह आंकड़ा अब भी FY25 के 1.32 लाख करोड़ रुपये के मासिक औसत से थोड़ा कम है. इस उछाल में अस्पताल, जल-निकासी और बिजली वितरण परियोजनाओं का अहम योगदान रहा.
प्रमुख श्रेणियों में बेतहाशा वृद्धि
कुछ प्रमुख इन्फ्रास्ट्रक्चर श्रेणियों में निविदाओं की मात्रा में भारी इजाफा देखा गया:
-राजमार्ग : 32,500 करोड़ रुपये (10.6 गुना वृद्धि)
-भवन निर्माण : 19,800 करोड़ रुपये (6.9 गुना वृद्धि)
-रेलवे: 16,800 करोड़ रुपये (2.5 गुना वृद्धि)
यह वृद्धि मुख्य रूप से पिछले वर्ष की पहली तिमाही में चुनावों के चलते कम आधार होने की वजह से भी है.
ऑर्डर में भी सुधार, लेकिन औसत से कम
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मई 2025 में कुल ऑर्डर 2.1 गुना बढ़कर 51,100 करोड़ रुपये हो गए, जो पिछले महीने के मुकाबले 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. हालांकि यह आंकड़ा अब भी FY25 के 1.05 लाख करोड़ रुपये के मासिक औसत और FY24 के 73,500 करोड़ रुपये के औसत से नीचे है.
टॉप ऑर्डर पाने वाली कंपनियां
इस अवधि में कुछ कंपनियों ने महत्वपूर्ण ऑर्डर हासिल किए:
-डीआर अग्रवाल इन्फ्राकॉन : 4,100 करोड़ रुपये
-लार्सन ऐंड टुब्रो (L&T) : 3,800 करोड़ रुपये
-एनसीसी : 2,500 करोड़ रुपये
वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही में ऑर्डर हासिल करने वाली शीर्ष 14 सूचीबद्ध कंपनियों के ऑर्डर में सालाना आधार पर 105 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इसके परिणामस्वरूप इन कंपनियों का बुक-टू-बिल अनुपात FY24 के अंत में 2.2 गुना से बढ़कर FY25 के अंत में 3 गुना तक पहुंच गया.
कार्यशील पूंजी पर दबाव, राजस्व में गिरावट
हालांकि निविदाओं और ऑर्डर में तेजी रही, लेकिन FY25 की चौथी तिमाही में क्रियान्वयन कमजोर रहा. भुगतान में देरी और क्रियान्वयन में सुस्ती के कारण बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के कुल राजस्व में सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 10.3% (पिछले साल की तुलना में 80 बेसिस प्वाइंट की गिरावट और वर्किंग कैपिटल पूरे सेक्टर में दबाव में है.
सड़क और रेलवे क्षेत्र में चुनौतियां
FY26 के बजट में सड़क और रेलवे क्षेत्र के लिए आवंटन में कोई खास बढ़ोतरी नहीं की गई. नतीजतन, सड़क क्षेत्र की EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) कंपनियों के राजस्व में पिछले साल की तुलना में 10% से अधिक की गिरावट देखी गई. वहीं शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे संकेत मिलता है कि विकास अब पारंपरिक ढांचे से आगे शहरी परियोजनाओं की ओर बढ़ रहा है.
टैग्स