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विशेष राज्य के दर्जे को लेकर टूट गया बिहार का सपना, जानिए कैसे मिलता है Special Status?
14वां वित्त आयोग पहाड़ी राज्यों को छोड़कर बाकी राज्यों के लिए विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर चुका है. केन्द्र सरकार ने ब्याज की हिस्सेदारी 32 से 42% तक कर दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
बिहार राज्य के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग पिछले एक दशक से भी लंबे समय से हो रही है. पिछले दस सालों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार बीजेपी के साथ रहे या विपक्ष में लेकिन उन्होंने इस मांग को नहीं छोड़ा. लेकिन आज केन्द्र सरकार ने संसद में साफ कर दिया है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता है. इसकी वजह वित्त राज्य मंत्री ने जो बताई उसने बिहार के नेताओं से लेकर वहां के 13 करोड़ लोगों को बड़ा झटका दे दिया है.
संसद में वित्त राज्य मंत्री ने कही क्या बात?
सोमवार को वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इसे लेकर कहा कि बिहा को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता है. इस मामले को लकर संसद में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि पहले देश के कुछ राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया जा चुका है. उन्होंने कहा कि विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए सरकार की ओर से कुछ नियम कायदे बनाए गए हैं. किसी भी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) की ओर से दिया जाता है. NDC किसी भी राज्य को तभी विशेष राज्य राज्य का दर्जा देता है जब वो सरकार द्वारा बनाए गए नियमों पर खरा उतरता है. उन्होंने कहा कि बिहार इन शर्तों पर खरा नहीं उतरता है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विकास परिषद ने बिहार की डिमांड पर विचार करते हुए 30 मार्च 2012 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत पेश की थी. विकास परिषद इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि मौजूदा एनडीसी मानदंडों के आधार पर, बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे का मामला नहीं बनता है.
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अब जानिए क्या है विशेष राज्य की शर्तें
बिहार को लेकर आई इस खबर के बाद ये भी जानना जरूरी है कि आखिर भारत सरकार ने किसी भी राज्य को स्पेशल कैटेगिरी का द र्जा देने के लिए क्या नियम बनाए हैं. इनमें प्रमुख तौर पर
1- राज्य को या तो पहाड़ी क्षेत्र होना चाहिए या उसका कठिन भूभाग होना चाहिए.
2- कम जनसंख्या घनत्व होना चाहिए या महत्वपूर्ण जनजातीय क्षेत्र होना चाहिए.
3- सीमाओं से सटा विशेष रणनीतिक क्षेत्र होना चाहिए.
4- आर्थिक एवं अवसंरचनात्मक पिछड़ापन
5- राज्य के वित्त की अव्यवहार्य प्रकृति
अगर कोई राज्य इन परिस्थितियों पर खरा उतरता है तभी उसे विशेष राज्य का दर्जा दिया जाता है.
अब तक इन राज्यों को मिल चुका है विशेष राज्य का दर्जा
अगर बीते समय में जिन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है उनमें ज्यादातर राज्य पहाड़ी ही हैं. इनमें असम, नागालैंड, मिजोरम, हिमाचल, मणिपुर, सिक्किम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड और तेलंगाना शामिल हैं. तेलंगाना को आंध्र प्रदेश से अलग होने के बाद विशेष राज्य दिया गया है. लेकिन 14वें वित्त आयोग ने पहाड़ी राज्यों को छोड़कर बाकी राज्यों के लिए विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया है. आयोग ने ये कदम टैक्स ट्रांसफर की सीमा को बढ़ाकर किया. पहले जहां राज्यों को केन्द्र से 32 प्रतिशत टैक्स जाता था वहीं इसे अब 42 प्रतिशत कर दिया गया है. मौजूदा समय में बीजेपी की दो प्रमुख सहयोगी जदयू और टीडीपी अपने अपने राज्यों के लंबे समय से विशेष राज्य का दर्जा मांगते आ रहे हैं.
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