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बजट में बिहार पर 'रहमत' की बारिश से भी संतुष्ट नहीं नीतीश? इस वजह से लग रहे कयास
नीतीश कुमार को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है. माना जा रहा है कि बिहार के मुख्यमंत्री निर्मला सीतारमण के बजट से खुश नहीं हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट में यदि किसी को सबसे ज्यादा मिला है, तो वो नीतीश कुमार (Nitish Kumar) हैं. बिहार के लिए 26 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. मोदी 3.0 के इस बजट को 'कुर्सी बचाओ' बजट करार दिया जा रहा है. दरअसल, नई मोदी सरकार नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू के कंधों पर ही टिकी है. बजट में नीतीश के बिहार और नायडू के आंध्र प्रदेश के लिए ही वित्त मंत्री ने खजाना खोला है, जो स्वाभाविक भी था. हालांकि, इतने सब के बावजूद भी मोदी सरकार शायद नीतीश बाबू को खुश करने में विफल रही है. नीति आयोग की बैठक से नीतीश की दूरी को इसी नजरिये से देखा जा रहा है.
ममता का आरोप
नीति आयोग की बैठक शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई. इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हुईं, जबकि इंडिया गठबंधन के सहयोगियों ने इसका बहिष्कार किया था. हालांकि, ये बात अलग है कि वह बैठक बीच में ही छोड़कर चली गईं. ममता का आरोप है कि उनका माइक बंद कर दिया गया और उन्हें बोलने नहीं दिया गया. फिर भी ममता बनर्जी का बैठक में शरीक होना इंडिया गठबंधन के लिए एक झटके की तरह है. उधर, भाजपा के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन के लिए नीतीश के नदारद होने को झटके की तरह से देखा जा रहा है.
विपक्ष ने कसा तंज
माना जा रहा है कि नीतीश कुमार बिहार जो विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलने से नाराज हैं. भले ही उन्होंने शब्दों में अपनी नाराज़गी बयां न की हो, लेकिन बैठक से दूरी बनाकर यह दर्शा दिया है. वहीं, विपक्षी INDIA गठबंधन के सहयोगी दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी भाकपा माले का कहना है कि केंद्र ने बिहार को विशेष श्रेणी का दर्जा देने से इंकार कर दिया, इसी शर्मिंदगी से बचने के लिए नीतीश नीति आयोग की बैठक में शामिल नहीं हुए. इस पूरे मामले पर जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं की चुप्पी की कई सवाल खड़े कर रही है. नीतीश की पार्टी ने बैठक में उनकी उपस्थिति का कोई कारण नहीं बताया है.
मिला उम्मीद से कम
बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग लंबे समय से उठती रही है. लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने और सरकार में अहम् सहयोगी की भूमिका में आने के बाद नीतीश कुमार ने इस मांग को पुरजोर तरीके से उठाकर सरकार पर दबाव बनाया. लेकिन मोदी सरकार ने दो-टूक शब्दों में इससे इंकार कर दिया. एक रिपोर्ट के अनुसार, JDU प्रमुख नीतीश कुमार ने बिहार के लिए बजट में 30,000 करोड़ रुपए की मांग की थी, लेकिन मिले 26 हजार करोड़. लिहाजा, इस तरह से नीतीश कुमार की दोनों ही मांगें पूरी नहीं हो पाई हैं. माना जा रहा है कि उन्होंने नीति आयोग की बैठक से दूरी बनाकर अपनी नाराज़गी से सरकार को वाकिफ करा दिया है.
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