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सरकार का बड़ा कदम! ऑनलाइन विज्ञापन पर डिजिटल टैक्स खत्म, जानिए किसे होगा फायदा?
ये बदलाव भारत में व्यापार करने के माहौल को आसान बनाने, विदेशी निवेश को आकर्षित करने और अंतरराष्ट्रीय कर विवादों से बचने के लिए किए जा रहे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
केंद्र सरकार जल्द ही टेक कंपनियों पर लगने वाले टैक्स को खत्म करने जा रही है. इससे गूगल, मेटा जैसी टेक कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी. दरअसल, सरकार ने अनिवासी इकाइयों द्वारा प्रदान की जाने वाली ऑनलाइन विज्ञापन सेवाओं पर 6% इक्विलाइजेशन शुल्क (डिजिटल कर) समाप्त करने का प्रस्ताव किया है. इस फैसले से गूगल, मेटा और एक्स जैसी बड़ी टेक कंपनियों को राहत मिलेगी. यह संशोधन वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा लोकसभा में पेश किए गए वित्त विधेयक 2025 का हिस्सा है. तो आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
क्या है इक्वलाइजेशन लेवी?
इसे साल 2016 में पेश किया गया था, जिसे 1 अप्रैल 2025 से हटाने की तैयारी है. इस बदलाव के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त विधेयक संशोधन पेश किया है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को संतुलित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है. खासकर, 2 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा संभावित जवाबी शुल्क लगाने की संभावना को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है.
आयकर कानून में हुआ ये बदलाव
वित्त विधेयक 2025 में आयकर अधिनियम की धारा 10(50) में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है. इस बदलाव के तहत, डिजिटल कंपनियों को मिलने वाली आयकर छूट को हटाने का निर्णय लिया गया है, जिससे उनकी ऐसी आय अब नियमित कर के दायरे में आ जाएगी. इससे पहले, सरकार ने 1 अगस्त 2024 से ई-कॉमर्स आपूर्ति पर 2% शुल्क भी समाप्त कर दिया था.
टैक्स हटाने से भारत को कितना होगा नुकसान
चालू वित्त वर्ष में सरकार ने 15 मार्च तक इक्वलाइजेशन शुल्क से 3,343 करोड़ रुपये हासिल किये थे. ऐसे में सरकार की तरफ से गूगल और फेसबुक कंपनियों से टैक्स हटाने से देश कों वित्तीय तौर पर नुकसान उठाना होगा. टैक्स विशेषज्ञ एमकेएम ग्लोबल के टैक्स पार्टनर अमित माहेश्वरी ने कहा, "अमेरिका में 2% शुल्क की आलोचना हुई थी. इसे हटाकर सरकार व्यापारिक संबंधों में सुधार लाने की दिशा में काम कर रही है. 6% डिजिटल कर हटाने का फैसला इसी नीति का हिस्सा है.
पेंशन नियमों में संशोधन
इसके अलावा सरकार ने पेंशन विनियमों में भी महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव रखा है. इसका उद्देश्य केंद्रीय लोक सेवा (पेंशन) नियमों को वैधता देना और सरकार के अधिकार को सुनिश्चित करना है. यह संशोधन सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले की प्रतिक्रिया में लाया गया है, जिसमें सरकार के पेंशनभोगियों को सेवानिवृत्ति की तिथि के आधार पर वर्गीकृत करने के अधिकार को चुनौती दी गई थी. अब सरकार स्पष्ट कर रही है कि पेंशन पात्रता सेवानिवृत्ति की तिथि के आधार पर तय होगी और नए वेतन आयोग के लाभ केवल आगे की अवधि से लागू होंगे.
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को प्रोत्साहन
वित्त विधेयक 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से जुड़ी कंपनियों को कर लाभ देने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 44बीबीडी में संशोधन किया गया है.यह विदेशी कंपनियों को वित्त वर्ष 2026 के बजट में प्रस्तावित कर प्रोत्साहन का लाभ उठाने की अनुमति देगा.
आयकर रिटर्न और तलाशी नियमों में बदलाव
सरकार ने वित्त विधेयक में आयकर अधिनियम की धारा 143(1) में संशोधन का भी प्रस्ताव रखा है. इससे आयकर विभाग को करदाता के पिछले वर्ष के रिटर्न में विसंगतियों के आधार पर रिटर्न को समायोजित करने की शक्ति मिलेगी. साथ ही, तलाशी और जब्ती कार्रवाई से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है. आयकर की धारा 113, 132 और 158 में संशोधन के तहत ‘कुल आय’ शब्द को ‘कुल अघोषित आय’ कर दिया गया है, ताकि पहले से घोषित आय पर दोबारा कर न लगाया जाए.
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