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ईरान युद्ध के बीच बड़ा झटका: UAE OPEC से बाहर होगा, वैश्विक तेल बाजार में हलचल

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब ईरान से जुड़े जियो-पॉलिटिकल तनाव तेजी से बढ़ रहे हैं. UAE, OPEC+ समूह का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश रहा है, जिसमें रूस जैसे सहयोगी देश भी शामिल हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होरमुज़ जलडमरूमध्य में संकट के बीच वैश्विक तेल बाजार को बड़ा झटका लगा है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 1 मई 2026 से OPEC और OPEC+ गठबंधन से बाहर होने का ऐलान कर दिया है. इस फैसले से पहले ही दबाव में चल रहे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है.

OPEC को बड़ा झटका

तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC को मंगलवार को उस समय बड़ा झटका लगा जब UAE ने संगठन से अलग होने का फैसला किया. यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब ईरान से जुड़े जियो-पॉलिटिकल तनाव तेजी से बढ़ रहे हैं. UAE, OPEC+ समूह का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश रहा है, जिसमें रूस जैसे सहयोगी देश भी शामिल हैं. यह गठबंधन पहले वैश्विक तेल उत्पादन का करीब आधा हिस्सा नियंत्रित करता था.

ऊर्जा रणनीति के तहत लिया गया फैसला

UAE के ऊर्जा मंत्री सुहैल मोहम्मद अल मजुरी ने बताया कि यह फैसला देश की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति और उत्पादन लक्ष्यों की समीक्षा के बाद लिया गया है. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से एक नीतिगत निर्णय है, जिसे मौजूदा और भविष्य की उत्पादन नीतियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.

हार्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा जोखिम

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब स्ट्रेट ऑफ हार्मुज (Strait of Hormuz) में लगातार तनाव बना हुआ है. यह दुनिया का एक अहम समुद्री मार्ग है, जहां से करीब 20% वैश्विक कच्चे तेल और LNG की सप्लाई गुजरती है. ईरान की ओर से जहाजों पर हमलों और धमकियों के कारण खाड़ी देशों के लिए तेल निर्यात करना मुश्किल हो गया है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है.

बाजार पर असर और तेल की कीमतें

UAE के इस फैसले के बाद तेल कीमतों में शुरुआती बढ़त कुछ कम हुई, लेकिन सप्लाई को लेकर चिंता के चलते ब्रेंट क्रूड अब भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि असली चिंता OPEC से बाहर निकलना नहीं, बल्कि हार्मुज जलडमरूमध्य में जारी बाधाएं हैं, जो सप्लाई को प्रभावित कर रही हैं.

OPEC+ की पकड़ कमजोर

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, वैश्विक तेल उत्पादन में OPEC+ की हिस्सेदारी फरवरी के करीब 48% से घटकर मार्च में 44% रह गई है. आने वाले समय में यह और कम हो सकती है क्योंकि सप्लाई बाधाएं बढ़ रही हैं.

खाड़ी देशों में बढ़ते मतभेद

UAE का यह कदम खाड़ी देशों के बीच बढ़ती दरार को भी दर्शाता है. ईरान के साथ जारी संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति दोनों को प्रभावित किया है.

अमेरिका से बढ़ती नजदीकी

इस फैसले को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के लिए कूटनीतिक बढ़त के रूप में भी देखा जा रहा है, जो लंबे समय से OPEC की ऊंची तेल कीमतों की नीति की आलोचना करते रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में UAE ने अमेरिका और इजराइल के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं, खासकर 2020 के अब्राहम समझौते के बाद.

विश्लेषकों का मानना है कि OPEC से बाहर होकर UAE अपने सस्ते तेल भंडार से अधिकतम उत्पादन कर सकता है. ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर अतिरिक्त उत्पादन क्षमता सीमित है, यह कदम UAE को रणनीतिक बढ़त दे सकता है. कुल मिलाकर, यह फैसला न सिर्फ OPEC के लिए झटका है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और जियो-पॉलिटिकल समीकरणों को भी नए सिरे से बदल सकता है.
 


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