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बांग्लादेश में सामान्य होते हालात ने तोड़ डाली Bharat के इस सेक्टर की उम्मीद!
बांग्लादेश में शेख हसीना के पतन के बाद नई अंतरिम सरकार अस्तित्व में आ गई है. इस सरकार का नेतृत्व मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
हिंसा की आग में जले बांग्लादेश (Bangladesh) में नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हो गया है. इसी के साथ भारत के इस पड़ोसी मुल्क में हालात सामान्य होने की उम्मीद भी बढ़ गई है. हालांकि, इस 'उम्मीद' ने भारत के गारमेंट बाजार की उम्मीद को ज़रूर तोड़ने का काम किया है. बाजार जितने बड़े पैमाने पर ऑर्डर की उम्मीद लगाए बैठा था, अब उसका मिलना संभव नजर नहीं आ रहा है.
वापस खुल रहे हैं कारखाने
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश में स्थिति सामान्य हो रही है. कारोबारी गतिविधियां भी पुन: शुरू होने लगी हैं. हिंसां के चलते बंद हुए कपड़ों के कई कारखाने वापस खुल गए हैं. ऐसे में बांग्लादेश को मिलने वाले जिन ग्लोबल ऑर्डर्स के भारत डाइवर्ट होने की उम्मीद लगाई जा रही थी, वो अब टूट गई है. बांग्लादेश की गारमेंट फैक्ट्रियों में से करीब 90 प्रतिशत माल दूसरे देशों में भेजा जाता है. इनमें अमेरिका, ब्रिटेन आदि देश प्रमुख हैं. यदि यहां कारोबारी गतिविधियां कुछ और समय तक प्रभावित होतीं, तो इसका सीधा फायदा भारत के गारमेंट सेक्टर को मिलता.
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इतना बढ़ जाता ऑर्डर फ्लो
चंद रोज पहले एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में फैली अराजकता के चलते भारत को अल्पावधि में 20-25 करोड़ डॉलर के ज्यादा मासिक निर्यात ऑर्डर मिल सकते हैं. दुनिया के कुल गारमेंट मार्केट में बांग्लादेश की अच्छी-खासी हिस्सेदारी है. यह मुस्लिम देश वैश्विक रेडिमेड गारमेंट निर्यात में चीन की घटती हिस्सेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हासिल करने में कामयाब रहा है. इसलिए US और UK जैसे देशों से बांग्लादेश की गारमेंट फैक्ट्रियों को हर साल बड़े ऑर्डर मिलते हैं.
विकल्पों का करना पड़ता रुख
रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया था कि यदि बांग्लादेश में अशांति लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत को मिलने वाले एक्सपोर्ट ऑर्डर में बढ़ोतरी हो सकती है. बांग्लादेश में ऐसी ऐसे कारखाने हैं, H&M और Zara जैसे इंटरनेशनल ब्रैंड के लिए कपड़े तैयार करते हैं. हिंसा के दौरान मुल्क में ये कारखाने बंद हो गए थे. इस स्थिति में ग्लोबल ब्रैंड को विकल्पों का रुख करना पड़ता और भारत की कंपनियों का ऑर्डर फ्लो बढ़ जाता. हालांकि, अब इसकी संभावना न के बराबर है.
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