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अपनी सहायक कंपनी में हिस्सेदारी बेचेगा Axis Bank, जानिए क्या है इसकी वजह?

Axis Bank का यह निर्णय बैंक और उसकी सहायक कंपनियों के बीच संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ RBI के नए दिशा-निर्देशों का पालन करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

ऐक्सिस बैंक (Axis Bank) ने अपनी पूरी स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ऐक्सिस फाइनेंस (Axis Finance) में हिस्सेदारी बेचने का बड़ा कदम उठाया है. बैंक इस बिक्री से 2,000 से 4,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रहा है, जो अपनी एनबीएफसी को आवश्यक पूंजी प्रदान करने के लिए उपयोग करेगा. इस फैसले के पीछे RBI के नए दिशा-निर्देश हैं, जो बैंकों को अपनी सहायक कंपनियों में अधिक इक्विटी निवेश करने से रोकते हैं. अब, इस हिस्सेदारी बिक्री से नए निवेशकों के लिए भी रास्ते खुलने वाले हैं.

हिस्सेदारी बेचने की योजना
निजी क्षेत्र के तीसरे सबसे बड़े ऋणदाता Axis Bank ने अपनी पूरी स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Axis Finance में अपनी हिस्सेदारी बेचने का निर्णय लिया है. बैंक के सूत्रों के मुताबिक, वह इस बिक्री से 2,000 से 4,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रहा है. बैंक की यह रणनीति इस समय खास महत्व रखती है क्योंकि RBI ने संकेत दिए हैं कि बैंक अपनी एनबीएफसी में सीधे तौर पर और अधिक इक्विटी निवेश नहीं कर सकता। इसके कारण Axis Bank को यह कदम उठाना पड़ा है, ताकि Axis Finance को जरूरी पूंजी मिल सके.

RBI के दिशा-निर्देशों के चलते लिया गया यह निर्णय
Axis Bank का यह कदम RBI द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के कारण है, जिसमें कहा गया है कि एक बैंक समूह की कंपनियां समान वित्तीय गतिविधियों में नहीं जुट सकतीं. इसके साथ ही, बैंक और उसकी सहायक कंपनियों के बीच ऋण गतिविधियों के मिश्रण की भी अनुमति नहीं होगी. इस कारण Axis Bank को अपने एनबीएफसी में अन्य निवेशकों को शामिल करने की आवश्यकता महसूस हो रही है. सूत्रों के अनुसार, बैंक के पास कई निजी इक्विटी और रणनीतिक निवेशकों से हिस्सेदारी खरीदने की रुचि प्राप्त हुई है, और यह प्रक्रिया अगले 3 से 6 महीनों में पूरी हो सकती है.

Axis Finance की वर्तमान स्थिति और पिछले निवेश
Axis Bank के पास वर्तमान में Axis Finance की 100% हिस्सेदारी है. पिछले कुछ वर्षों में, बैंक ने समय-समय पर Axis Finance में पूंजी का निवेश किया है. उदाहरण के लिए, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में बैंक ने 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त इक्विटी पूंजी डाली थी. अब तक के पिछले 10 वर्षों में, बैंक ने कुल 1,775 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश किया है, जिसमें वित्त वर्ष 2024 में 300 करोड़ रुपये का निवेश भी शामिल है.

RBI के नए मानदंडों का असर और भविष्य की दिशा
RBI द्वारा अक्टूबर में जारी मसौदा परिपत्र ने बैंक और उनकी सहायक कंपनियों के बीच गतिविधियों के घालमेल को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे. अगर यह दिशा-निर्देश लागू होते हैं, तो Axis Bank जैसे प्रमुख बैंकों को अपनी सहायक कंपनियों के संचालन में बदलाव करना पड़ सकता है. इसके अतिरिक्त, बैंक के पास Axis Finance जैसी कंपनी का स्वामित्व होना और उसका कॉर्पोरेट ऋण, रियल एस्टेट ऋण, और एमएसएमई ऋण क्षेत्र में काम करना आगे चलकर अन्य बैंकों को भी प्रभावित कर सकता है.

निवेशकों को एंट्री का मौका

Axis Finance की स्थापना 2013 में हुई थी और यह एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) है, जो ग्राहकों से जमा नहीं ले सकती. कंपनी ने कॉरपोरेट ऋण, रियल एस्टेट ऋण और एमएसएमई क्षेत्र में अपनी सेवाएं दी हैं और 2019 से उसने खुदरा ऋण कारोबार में भी कदम रखा है. हालांकि, RBI के नए दिशा-निर्देशों के कारण अब कंपनी को अपने संचालन के लिए अन्य निवेशकों से पूंजी जुटाने की आवश्यकता है, जिससे वह अपनी वृद्धि की दिशा में नए कदम उठा सके. इससे न केवल Axis Finance को पूंजी मिलेगी, बल्कि बैंक को अपनी वित्तीय संरचना में भी सुधार करने का अवसर मिलेगा. इस कदम से नए निवेशकों को भी एंट्री का मौका मिलेगा और Axis Finance के कारोबार को और मजबूत किया जा सकेगा.


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