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अनिल अग्रवाल की Vedanta के आ गए तिमाही नतीजे, जानें कैसी रही आर्थिक सेहत

माइनिंग और मेटल सेक्टर की दिग्गज कंपनी वेदांता ने जून तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं. कंपनी के प्रॉफिट में उछाल आया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

अरबपति कारोबारी अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) की दिग्गज कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited) ने जून 2024 तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं. इस तिमाही में कंपनी के नेट प्रॉफिट में 54% का उछाल देखने को मिला है. कंपनी का प्रॉफिट बढ़कर 5095 करोड़ रुपए हो गया है, जो पिछले साल की समान तिमाही में 3308 करोड़ था. 

रिवेन्यु में भी वृद्धि
जून तिमाही में वेदांता का रिवेन्यु  भी 6% बढ़कर 35,329 करोड़ रुपए रहा है. जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 33,342 करोड़ रुपए था. इस दौरान, कंपनी का कंसोलिडेट EBITDA सालाना आधार पर 47% बढ़कर 10275 करोड़ और EBITDA मार्जिन सालाना आधार पर 1000 बीपीएस की वृद्धि के साथ 34% रहा. वेदांता का कहना है कि कंपनी ने साल की मजबूत शुरुआत की है और आंकड़े यह दर्शा रहे हैं. 

शेयरों में उछाल
वहीं, वेदांता के शेयरों की बात करें, तो आज यह मामूली बढ़त के साथ 414 रुपए पर बंद हुए. इस साल अब तक ये शेयर 61% का रिटर्न दे चुका है और पिछले एक साल में यह आंकड़ा 73.99% रहा है. Vedanta का 52 वीक का हाई लेवल 506.75 रुपए है. इस लिहाज से देखें तो अभी इसे लंबा सफर तय करना है. वेदांता के चेयरमैन और फाउंडर अनिल अग्रवाल हैं. वेदांता माइनिंग और मेटल से जुड़ी दिग्गज कंपनी है. अनिल अग्रवाल को भारत का मेटल मैन भी कहा जाता है.

इस पर है फोकस
अनिल अग्रवाल तेजी से कर्ज का बोझ कम करने की योजना पर काम कर रहे हैं. हाल ही में करीब 8000 करोड़ रुपए जुटाने के लिए वेदांता क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट लॉन्च (QIP) लेकर आई थी. इस पैसों का इस्तेमाल कंपनी अपने कर्ज के बोझ को कम करने के लिए करेगी. वेदांता के देनदारों में एक सरकारी बैंक भी शामिल है, जिसका आंशिक या पूरा पैसा कंपनी QIP की राशि से चुकाया जा सकता है. पिछले महीने आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि वेदांता इस रकम का इस्तेमाल ओकट्री कैपिटल (Oaktree Capital), ड्यूश बैंक (Deutsche Bank) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) के कर्ज को आंशिक या पूरी तरह से चुकाने में करेगी.

कितना है कर्जा?
वेदांता ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया था कि उसके QIP का उद्देश्य कंपनी और उसकी सहायक कंपनी - टीएचएल जिंक वेंचर्स लिमिटेड के बकाया कर्ज को आंशिक या पूर्ण रूप से चुकाना है. साथ ही, इस राशि का एक छोटा हिस्सा कुछ सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. 25 जून तक के आंकड़ों के अनुसार, अनिल अग्रवाल की वेदांता पर ओकट्री, ड्यूश बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का 17,470 करोड़ रुपए बकाया था. वेदांता को यूनियन बैंक का 6400 करोड़ और ड्यूश बैंक का 1100 करोड़ रुपए चुकाना है.
 


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