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अमेरिकी बैंक डूबने के बाद सरकार ने स्टार्टअप की मदद के लिए उठाए ये कदम, क्या होगा फायदा
दरअसल भारत में पिछले लंबे समय से स्टार्टअप के लिए मुहैया कराए जा रहे इंफ्रा के बाद देश में इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है. सरकार उन्हें और बूस्ट देने के लिए अलग-अलग तरह के प्रयास कर रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
अमेरिका में आए सिलिकॉन वैली बैंक के घटनाक्रम के बाद भारत सरकार ने स्टार्टअप की मदद के लिए एक कमिटी गठित की है. ये कमिटी SVB घटनाक्रम के बाद स्टार्टअप की फंडिंग के हालात पर नजर रखने के लिए बनाई गई है. इस समिति में DPIIT के मेंबर भी शामिल किए गए हैं. जो इस पूरे हालात के बाद स्टार्टअप की फंडिंग में मदद को लेकर काम करेंगे.
कैसे जांच करेगी ये समिति
अमेरिका में आए बैंक संकट के बाद इंडियन बैंक एसोसिएशन ने एक कमिटी बनाई है. ये कमिटी पता लगाएगी कि आखिर इस संकट के कारण कहीं भारत में स्टार्टअप की मदद में किसी तरह की परेशानी तो नहीं आ रही है. ये कमिटी ये भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि आखिर किस तरह से स्टार्टअप के लिए और फंडिंग का इंतजाम किया जा सकता है. यही नहीं ये कमिटी ये भी पता लगाएगी कि क्या इस संकट के कारण किसी तरह के अवसर पैदा हुए हैं अगर ऐसा है तो उनका लाभ कैसे लिया जाएगा. ये कमिटी अगले दो महीने में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है जिसके बाद सरकार उस दिशा में अपने कदम उठाएगी.
Startup के लिए अवॉर्ड शो
सरकार की ओर से प्रतिभाशाली Startup को अवॉर्ड देने के लिए इस बार भी अवॉर्ड शो का कार्यक्रम ओयाजित किया जाएगा. इस बार होने वाला कार्यक्रम ये इस श्रृंखला का पांचवा अवार्ड शो होगा. सरकार इसमें अवॉर्ड जीतने वाले स्टार्टअप को अलग-अलग तरीके से मदद करती है. अवॉर्ड जीतने वाले को 5 लाख रुपये कैश अवॉर्ड और उसके बाद उन्हें उनके कारोबार को और बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग अवसर भी मुहैया कराये जाते हैं. जो भी इस अवॉर्ड को जीतते हैं उन्हें DPIIT की ओर से चलाई जाने वाली स्कीम में प्राथमिकता दी जाती है.
नॉर्थ ईस्ट में शुरू हुए 140 स्टार्टअप
ज्वॉइंट सेक्रेट्री मनमीत चंद्रा ने बताया कि सरकार की ओर से स्टार्टअप को लेकर दी सुविधाओं के चलते अब तक नॉर्थ ईस्ट में 140 स्टार्टअप रजिस्टर हो चुके हैं. सरकार दरअसल उन स्टार्टअप को स्टार्टअप मानती है जो उसकी तय परिभाषा में फिट होते हैं. उन्होंने ये भी बताया कि सरकार के पास केवल उन्हीं स्टार्टअप की जानकारी मौजूद है जो सरकार के क्राइटेरिया पर खरे उतरते हैं. लेकिन देश में ऐसे भी कई स्टार्टअप काम कर रहे हैं जो सरकार के क्राइटेरिया पर खरे नहीं उतरते हैं. लेकिन उनकी जानकारी सरकार के पास नहीं है.
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