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सीमेंट के बाद केबल और तार उद्योग में अडानी-बिड़ला की नई जंग, जानें कितना बड़ा है कारोबार?
अडानी और बिड़ला समूह का तार व केबल कारोबार में उतरना न केवल बाजार में बदलाव लाएगा, बल्कि असंगठित क्षेत्र को भी प्रभावित करेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अरबपति उद्योगपति गौतम अडानी की अगुवाई वाला अडानी समूह (Adani Group) और कुमार मंगलम बिड़ला का आदित्य बिड़ला समूह (Birla Group) सीमेंट के बाद अब तार एवं केबल कारोबार में आमने-सामने होने के लिए तैयार हैं. दोनों ही समूह दहाई अंकों की वृद्धि वाले इस क्षेत्र में उतरने की घोषणा कर चुके हैं. एक महीने से भी कम समय में दोनों समूहों ने तार और केबल क्षेत्र में उतरने की घोषणा की है. इन दोनों समूहों की प्रतिस्पर्धा की वजह से सीमेंट क्षेत्र की छोटी कंपनियां पहले ही काफी पीछे छूट गई हैं. वहीं, तार और केबल उद्योग में असंगठित और छोटी कंपनियों का दबदबा है. दो बड़े समूहों के इस क्षेत्र में कदम रखने से तार और केबल उद्योग में प्रतिस्पर्धा तेज होने का अनुमान है. तो आइए इन दोनों समूहों की योजना के बारे में विस्तार से जानते हैं.
ऐसे होगा अडानी और बिड़ला ग्रुप का आमना-सामना
अडानी एंटरप्राइजेज ने अपनी सहायक कंपनी कच्छ कॉपर लिमिटेड (KCL) के माध्यम से इस महीने की शुरुआत में प्रणीता वेंचर्स के साथ साझेदारी में प्रणीता इकोकेबल्स नामक एक संयुक्त उद्यम का गठन किया, जो धातु उत्पादों, केबलों और तारों का निर्माण और बिक्री करेगा. यह कदम आदित्य बिड़ला समूह की प्रमुख कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट द्वारा 25 फरवरी को अगले दो वर्षों में 1,800 करोड़ रुपये के निवेश के साथ तारों और केबल खंड के माध्यम से निर्माण मूल्य श्रृंखला में अपने विस्तार की घोषणा के लगभग एक महीने बाद उठाया गया है. दिलचस्प बात यह है कि आदित्य बिड़ला और अडानी दोनों की उपस्थिति तांबे के कारोबार में है, जो तार और केबल उद्योग का मुख्य आधार है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एल्युमीनियम और तांबा उत्पादन में अग्रणी आदित्य बिड़ला की हिंडाल्को भी इसके तार और केबल कारोबार को सहयोग प्रदान कर सकती है. इसी प्रकार, अडानी की कच्छ कॉपर भी उसके केबल और तार व्यवसाय के लिए तालमेल प्रदान करती है.
तेजी से बढ़ता हुआ उद्योग
तार व केबल क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2018-19 से 2023-24 के बीच राजस्व में सालाना आधार पर 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है. यह क्षेत्र अब एक संगठित ब्रांड बाजार की ओर बढ़ रहा है. अडानी समूह द्वारा 19 मार्च को इस क्षेत्र में उतरने की घोषणा के एक दिन बाद सूचीबद्ध तार और केबल कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है. इस क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों पॉलीकैब इंडिया और केईआई इंडस्ट्रीज के शेयरों का मूल्य 20 मार्च को 52 सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया. इसी तरह हैवेल्स का शेयर भी पांच प्रतिशत टूट गया. अगले दिन फिनोलेक्स केबल्स में भी चार प्रतिशत की गिरावट आई.
बाजार में हिस्सेदारी और प्रतिस्पर्धा
तार और केबल को ‘गहरी जेब वाले नए प्रवेशकों के लिए आदर्श क्षेत्र’ बताते हुए जेएम फाइनेंशियल्स ने कहा, ‘‘यह एक ऐसा उद्योग है, जहां कोई भी अकेली कंपनी तार कारोबार में 15 प्रतिशत और केबल कारोबार में 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नहीं रखती है.’’ उद्योग में लगभग 400 खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें एसएमई से लेकर बड़े उद्यम शामिल हैं, जिनका राजस्व 50 से 400 करोड़ रुपये के बीच है.
आकर्षक अवसरों से भरा उद्योग
भारत में करीब 80,000 करोड़ रुपये का तार और केबल उद्योग (56,000 करोड़ रुपये केबल और 24,000 करोड़ रुपये तार) के पास ‘आकर्षक अवसर’ हैं. जेफरीज के विश्लेषकों ने कहा, ‘‘तार और केबल उद्योग में नए खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त जगह है, क्योंकि यह दहाई अंक में बढ़ रहा है और उद्योग का 30 प्रतिशत हिस्सा अब भी असंगठित क्षेत्र के पास है. वर्ष 2028-29 में इस उद्योग का आकार 1,30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा.’’
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