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आखिर क्‍या है भारत, मिडिल ईस्‍ट,यूरोप कनेक्टिविटी का मकसद? 

 जानकारों का मानना है कि इस समझौते से चीन के उस कॉरिडोर को भी चुनौती मिलेगी जिससे वो भारत के सामने चुनौती पेश की जाए. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

जी-20 देशों के बीच भारत मीडिल ईस्‍ट से लेकर यूरोप तक के आर्थिक कॉरिडोर की घोषणा 9 सितंबर को पीएम मोदी ने की. पीएम मोदी ने जब ये घोषणा की उस वक्‍त उनके साथ अमेरिका के राष्‍ट्रपति जो बाइडेन और सउदी अरब के पीएम मोहम्‍मद बिन मौजूद रहे. इस कॉरिडोर का मकसद तीनों क्षेत्रों में डेटा, ट्रेन, बंदरगाह, ऊर्जा नेटवर्क और हाइड्रोजन पाइप को जोड़ने का है. 

क्‍या बोले पीएम मोदी?
इस कनेक्टिविटी पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कर्ज के बोझ के बजाए वित्तिय व्‍यवहारिकता को बढ़ावा देने के साथ साथ कनेक्टिविटी परियोजनाओं में पर्यावरण संबंधी सभी दिशानिर्देशों का पालन करने पर भी जोर दिया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत कनेक्टिविटी को क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं करता है. क्‍योंकि उसका मानना है कि कनेक्‍िटिविटी आपसी विश्‍वास को और मजबूत करता है. 

आखिर क्‍या है कॉरिडोर का मकसद? 
इस कॉरिडोर के जरिए भारत से लेकर मिडिल ईस्‍ट और यूरोप के बीच कई क्षेत्रों में विकास किया जाना है. इसमें रेलवे, पोर्ट का विकास, ग्रीन हाइड्रोन का विकास करना मकसद है. इस कॉरिडोर के मकसद के बारे में बताते हुए अमेरिकी उप राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन फाइनर ने कहा कि निम्‍न और मध्‍यम आय वाले देशों को मदद पहुंचाने का है. इस कॉरिडोर के विकास से मध्‍य पूर्व का क्षेत्र वैश्विक व्‍यापार में मदद पहुंचाने में अहम रोल अदा कर सकेगा.  

क्‍या बोले सउदी प्रिंस?  
इस कॉरिडोर के बारे में अपनी बात कहते हुए सउदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्‍मद बिन सलमान ने कहा कि इस घोषित पहल और आर्थिक गलियारे से सभी के एक साथ आने की आशा करते हैं. उन्‍होंने कहा कि मैं उन निर्णय तक पहुंचने के लिए इसमें अहम भूमिका निभाने वाले और हमारे साथ काम करने वाले सभी देशों का आभार व्‍यक्‍त करते हैं. उन्‍होंने कहा कि इस महत्‍वपूर्ण आर्थिक गलियारे की स्‍थापना से भारत, मिडिल ईस्‍ट, यूरोपीय गलियारा, भारत संयुक्‍त अरब अमीरात, सऊदी अरब यूरोपीय संघ फ्रांस इटली जर्मनी और अमेरिका के बीच कनेक्टिविटी और बुनियादी ढ़ाचे पर सहयोग करने का एक अभूतपूर्व प्रयास होगा. 

एक कॉरिडोर से होंगे कई फायदे
इस कॉरिडोर की अहमियत बताते हुए The Imagindia Institute के अध्‍यक्ष रोबिन्‍द्र सचदेव कहते हैं कि ये जो इंडिया-मिडिल ईस्‍ट-कॉरिडोर है वो बुहत ही यूनीक प्रोजेक्‍ट है. इस प्रोजेक्‍ट को बनने में 10 से 15 साल लगेंगे. इस प्रोजेक्‍ट के तहत यूएई और सउदी अरेबिया में रेलवे नेटवर्क बिछाया जाएगा. वो रेलवे नेटवर्क इन देशों के पोर्टस तक आएगा. उन पोर्ट से भारत के पोर्ट का कनेक्‍ट भारत के साथ होगा. वहां से ये रेलवे नेटवर्क यूरोपीय यूनियन की ओर जाएगा. यूएई और सउदी अरेबिया में रेलवे लाइन बिछाने का पैसा ये दोनो देश लगाएंगे. तकनीक अमेरिका देगा. इंजन की सिगनलिंग की और दूसरी चीजों की और रेल लाइन बिछाने का काम भारत करेगा. इसमें केवल रेलवे लाइन ही नहीं होगी बल्कि ग्रीन हाइड्रोजन के लिए पाइपलाइन भी होगी, फाइबर ऑपटिकल केबल भी बिछाई जाएगी. बिजली का ग्रिड भी बनाया जाएगा. जब ये कॉरिडोर बन जाएगा तो ट्रेड बढेगा. हमारे इनके साथ होने वाले ट्रेड में ज्‍यादा तेजी आएगी. वहां से कनेक्‍ट होते हुए सउदी के पोर्ट ग्रीस होते हुए यूरोपीय यूनियन तक पहुंच जाएंगे. ये चाइना के बीआरआई प्रोजेक्‍ट का काउंटर भी है. यहां पैसा चाइना लगाता है. ये प्रोजेक्‍ट चीन का भी काउंटर होगा. इस कॉरिडोर से भारत और ग्रीस के संबंध ज्‍यादा मजबूत होंगे और तर्की के लिए एक संदेश होगा.


 


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