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यूरोप में पोर्ट और एनर्जी कारोबार बढ़ाएगा अडानी समूह, Evos Terminals के लिए 31 हजार करोड़ रुपये की बोली
अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स ने यूरोप की लिक्विड स्टोरेज और टर्मिनल कंपनी Evos Terminals के लिए 3.3 अरब डॉलर का बाध्यकारी प्रस्ताव दिया है. पांच देशों में फैले इस कंपनी के नेटवर्क में आठ टैंक टर्मिनल शामिल हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
अडानी समूह अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार के विस्तार की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स (APSEZ) ने यूरोप में कारोबार करने वाली लिक्विड स्टोरेज और टर्मिनल कंपनी Evos Terminals को खरीदने के लिए 3.3 अरब डॉलर यानी करीब 31 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बोली लगाई है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी है.
गौतम अडानी की अगुवाई वाली कंपनी इस सौदे के जरिए यूरोप के पोर्ट और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है. खासकर ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक अस्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अडानी समूह के घरेलू पोर्ट वॉल्यूम पर भी पड़ा है. ऐसे में यूरोप में विस्तार कंपनी के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है.
पांच देशों में फैला है Evos का कारोबार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब पांच साल पुरानी Evos Terminals का स्वामित्व ग्लोबल एसेट मैनेजर Igneo Infrastructure Partners के पास है. यह First Sentier Group का हिस्सा है. कंपनी के पास यूरोप के पांच देशों के सात प्रमुख बंदरगाहों पर आठ टैंक टर्मिनल हैं. इनकी कुल स्टोरेज क्षमता 64 लाख क्यूबिक मीटर है. इस नेटवर्क के कारण Evos वैश्विक पोर्ट ऑपरेटरों और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए रणनीतिक महत्व रखती है.
वर्ष 2025 में कंपनी का EBITDA 20 करोड़ यूरो रहने का अनुमान था. हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि मौजूदा रियायती समझौतों को उनकी निर्धारित समाप्ति तिथि 1 नवंबर, 2028 के बाद आगे नहीं बढ़ाया जाएगा.
Evos के पोर्टफोलियो में गैसोलीन जैसे पारंपरिक मोटर ईंधन के भंडारण के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल ईंधन भी शामिल हैं. इनमें बायोडीजल, सस्टेनेबल एविएशन टर्बाइन फ्यूल, ग्रीन नेफ्था, बायो-इथेनॉल, ई-मेथनॉल और बायो-मरीन फ्यूल शामिल हैं. इस तरह कंपनी का कारोबार पारंपरिक ईंधन के साथ ऊर्जा बदलाव से जुड़े नए विकल्पों तक फैला हुआ है.
कई वैश्विक कंपनियों ने दिखाई थी दिलचस्पी
इस साल की शुरुआत में Evos के मालिक Igneo ने कंपनी की बिक्री प्रक्रिया संचालित करने के लिए Morgan Stanley को नियुक्त किया था. इस प्रक्रिया में कई वैश्विक निवेशकों और कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई. इनमें KKR, EQT और अन्य वित्तीय निवेशक, Macquarie, Goldman Sachs Alternatives और BlackRock जैसे प्राइवेट इक्विटी समूह, CPP Investments जैसे पेंशन फंड तथा LBC Tank Terminals और Exolum जैसे ऑपरेटर शामिल थे.
आने वाले हफ्तों में हो सकता है अंतिम फैसला
मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, APSEZ ने इस सप्ताह की शुरुआत में प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रिया के तहत बाध्यकारी प्रस्ताव जमा किया है. आने वाले कुछ हफ्तों में इस पर अंतिम फैसला होने की उम्मीद है.
इस बीच Evos ने जुलाई में अपनी फाइनेंसिंग इकाई Evos Finance BV के जरिए 95 करोड़ यूरो का कर्ज जुटाया था. इस राशि का इस्तेमाल कंपनी ने अपने मौजूदा कर्ज के बड़े हिस्से को रीफाइनेंस करने के लिए किया. कंपनी ने प्राइवेट प्लेसमेंट और बैंक लोन के मिश्रण से यह वित्तपोषण जुटाया और इस प्रक्रिया में इन्वेस्टमेंट-ग्रेड रेटिंग भी हासिल की.
उस समय कंपनी के CEO हैरी डीन्स ने कहा था कि इससे Evos को अपनी रणनीति को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी. ऊर्जा बदलाव के दौर में ग्राहकों के साथ कारोबार बढ़ाने के नए अवसर सामने आ रहे हैं.
ब्रिटेन में ABP की बोली में मिली थी हार
Evos के अधिग्रहण की यह कोशिश ऐसे समय में हो रही है, जब पिछले सप्ताह अडानी समूह को ब्रिटेन की Associated British Ports (ABP) को खरीदने की 10 अरब पाउंड की दौड़ में IFM से हार का सामना करना पड़ा था.
इसके बाद बुधवार को APSEZ के प्रबंधन ने बताया कि कंपनी अपने वैश्विक विस्तार की योजना के तहत बंदरगाहों और टर्मिनलों सहित 20 संपत्तियों का मूल्यांकन कर रही है. कंपनी के CEO अश्वनी गुप्ता ने अर्निंग कॉल के दौरान कहा कि APSEZ की मुख्य ताकत कंटेनर कारोबार है. इसलिए कंपनी सबसे पहले उन अवसरों पर ध्यान देती है, जहां कंटेनर कारोबार के विस्तार की संभावना है. इसके साथ ही कंपनी लिक्विड टर्मिनलों में भी अवसर तलाश रही है. उन्होंने कहा कि भविष्य में बंदरगाह ऊर्जा बदलाव के लिए प्रवेश द्वार के रूप में काम कर सकते हैं.
APSEZ की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी
APSEZ भारत में 15 बंदरगाहों और टर्मिनलों का संचालन करती है. इसके अलावा इजराइल, तंजानिया, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया में भी कंपनी की चार अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं हैं. कंपनी 140 से अधिक तरह के लिक्विड कार्गो को संभालती है. उसके नए परिचालन खुलासों के मुताबिक, घरेलू स्तर पर उसकी कार्गो हैंडलिंग क्षमता 653 मिलियन मीट्रिक टन है.
अडानी समूह अपने समुद्री कारोबार के दूसरे क्षेत्रों में भी अंतरराष्ट्रीय विस्तार कर रहा है. समूह के मरीन प्लेटफॉर्म Astro Offshore ने यूरोप में अपनी डीपवाटर इंजीनियरिंग और ऑफशोर एग्जीक्यूशन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए Oceaneering International के साथ एक अनुबंध किया है. इसके साथ ही APSEZ ने यूरोप में विशेष समुद्र के नीचे किए जाने वाले कार्यों के क्षेत्र में भी कदम रखा है.
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