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अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से भारत को मिलेगा बड़ा प्रतिस्पर्धी लाभ: पीयूष गोयल
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में किसानों और घरेलू हितधारकों के संवेदनशील हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. उनके मुताबिक, समझौते से भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नए अवसर मिलेंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के बाद भारत को मजबूत प्रतिस्पर्धी लाभ मिलेगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस समझौते में किसानों और अन्य घरेलू हितधारकों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी.
इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में गोयल ने कहा कि इस समझौते में घरेलू हितों से जुड़े किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर समझौता नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नए अवसर पैदा होंगे.
गोयल ने कहा, "मुझे पूरे विश्वास के साथ यह घोषणा करने का साहस है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते का पूरा विवरण सामने आने के बाद भारत के लोग इसका जश्न मनाएंगे, क्योंकि इसमें हमारे किसानों या किसी भी हितधारक के संवेदनशील हितों से जरा भी समझौता नहीं किया गया है."
उन्होंने आगे कहा, "इसके उलट, भारत को बहुत मजबूत प्रतिस्पर्धी लाभ मिलेगा. और व्यापार प्रतिस्पर्धी लाभ पर ही आधारित होता है."
मंत्री का यह बयान भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को लेकर बढ़ी उम्मीदों के बीच आया है. इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे के बाद बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत मिले थे. इस यात्रा के दौरान रुबियो ने संकेत दिया था कि कुछ ही हफ्तों में व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है. गोयल भी हाल में दोहरा चुके हैं कि बातचीत अंतिम चरण के करीब है.
छह साल में आठ व्यापार समझौते
भारत ने पिछले छह वर्षों में आठ व्यापार समझौते किए हैं और घरेलू निर्यातकों के लिए व्यापारिक साझेदारियों में विविधता लाने तथा बाजार तक पहुंच बढ़ाने के प्रयासों के तहत कई अन्य देशों के साथ बातचीत कर रहा है.
चालू वित्त वर्ष में भारत ने ओमान, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड के साथ तीन मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को लागू किया है. सरकार दिसंबर तक यूरोपीय संघ (EU) के साथ भी समझौते पर हस्ताक्षर करने का लक्ष्य लेकर चल रही है.
गोयल ने कहा कि इन समझौतों में 38 विकसित और अपेक्षाकृत समृद्ध देश शामिल हैं. उनके मुताबिक, इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं भारत के साथ प्रतिस्पर्धा करने के बजाय एक-दूसरे की पूरक हैं.
उन्होंने कहा, "हम एक-दूसरे के पूरक हैं. जिन उत्पादों का हमें निर्यात करना है, उनकी जरूरत उन्हें है और जिन उत्पादों का उन्हें निर्यात करना है, उनकी जरूरत हमें है. यह दोनों पक्षों के लिए फायदे की स्थिति है."
संतुलित व्यापार समझौतों पर जोर
मंत्री ने संतुलित व्यापार समझौते करने के महत्व पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि पहले हुए कुछ समझौतों के कारण भारत का व्यापार घाटा बढ़ा था. गोयल ने कहा, "असंतुलित समझौते आपको बहुत आगे नहीं ले जा सकते. 2014 से पहले हुए सभी समझौते वैश्विक अर्थव्यवस्था के केवल 10 लाख करोड़ डॉलर के हिस्से को कवर करते थे और मुख्य रूप से ऐसे देशों के साथ थे, जिनसे हमारी प्रतिस्पर्धा थी."
2014 से पहले भारत ने जापान और दक्षिण कोरिया के साथ-साथ दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (ASEAN) के सदस्य देशों के साथ व्यापार समझौते किए थे. गोयल का तर्क है कि इनमें से कई समझौते असंतुलित थे और इनके लागू होने के बाद भारत का व्यापार घाटा काफी बढ़ गया.
RCEP से बाहर रहने के फैसले को बताया अहम
गोयल ने नवंबर 2019 में क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) समझौते की बातचीत से भारत के बाहर निकलने के फैसले का भी बचाव किया. उन्होंने कहा कि इस समझौते में शामिल होने से घरेलू विनिर्माण क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ सकता था.
RCEP में ASEAN के सदस्य देशों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन शामिल हैं. भारत शुरुआत में इस समझौते की बातचीत का हिस्सा था, लेकिन घरेलू उद्योगों के लिए बाजार पहुंच और सुरक्षा उपायों से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होने की चिंता के कारण नवंबर 2019 में इससे बाहर हो गया था.
गोयल ने इस फैसले को भारत के विनिर्माण क्षेत्र के लिए निर्णायक मोड़ बताया. उनका कहना था कि इस समझौते में शामिल होने का मतलब घरेलू उद्योगों को चीनी आयात से अधिक प्रतिस्पर्धा के सामने ला देना होता.
उन्होंने कहा, "मैं आपको बताता हूं कि 4 नवंबर, 2019 को बैंकॉक में लिया गया एक फैसला ही इसकी वजह है कि आज हम विनिर्माण और भारत के उद्योगों की चर्चा कर रहे हैं." उन्होंने आगे कहा, "अन्यथा, हम भारत में चीनी सामान बेचने वाले सेल्समैन और सेल्सगर्ल्स का देश बनकर रह जाते."
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