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इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए ₹25,000 करोड़ की PLI योजना को मंजूरी, आएगी रोजगार की बहार
पैसिव इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग को प्रमोट करने के लिए लाई गई यह पहली स्कीम है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह स्कीम लगभग 59,350 करोड़ रुपये का निवेश अट्रैक्ट करेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने करोड़ों रुपये की Production-Linked Incentive (PLI) योजना को मंजूरी दे दी, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों के घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है. सूत्रों से पता चला है कि कैबिनेट ने इलेक्ट्रॉनिक घटक मैन्युफैक्चरिंग के लिए PLI Scheme को मंजूरी दे दी है, जिसका Financial Outlay 24,000 करोड़ रुपये से 27,000 करोड़ रुपये के बीच है.
4.56 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन!
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव वैष्णव ने कहा, "इलेक्ट्रॉनिक्स घटक पीएलआई योजना के तहत निष्क्रिय घटकों को मंजूरी दी गई है. इसका कुल पैकेज 22,919 करोड़ रुपये का है, यह छह साल से अधिक का होगा." मंत्री ने कहा कि यह खंड दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, चिकित्सा उपकरण, बिजली क्षेत्र आदि सहित कई क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करेगा. उन्होंने कहा कि इस योजना से 4.56 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन होने की उम्मीद है.
मंत्री जी ने इसके साथ ही कहा कि इस योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स घटक मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में बड़े निवेश (वैश्विक/घरेलू) को आकर्षित करके एक मजबूत घटक इकोसिस्टम विकसित करना, क्षमता और योग्यता विकसित करके घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) को बढ़ाना और भारतीय कंपनियों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (GVC) के साथ एकीकृत करना है.
नौकरियां पैदा करना है लक्ष्य
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस योजना का लक्ष्य 59,350 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना, 4,56,500 करोड़ रुपये का उत्पादन करना और अपने कार्यकाल के दौरान 91,600 व्यक्तियों के लिए अतिरिक्त प्रत्यक्ष रोजगार और कई अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करना है.
घरेलू उत्पादन में होगी वृद्धि
इलेक्ट्रॉनिक सामानों का घरेलू उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 में 1.90 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 17% से अधिक की सीएजीआर पर 9.52 लाख करोड़ रुपये हो गया है. इलेक्ट्रॉनिक सामानों का निर्यात भी वित्त वर्ष 2014-15 में 0.38 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 2.41 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो 20% से अधिक की सीएजीआर पर है.
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